पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

लापरवाही:8 महीने से नहीं हो रहा आंखों का ऑपरेशन

मधेपुरा4 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • प्रत्येक साल होता है 250-300 ऑपरेशन, ऑपरेशन नहीं होने से लोग हो रहे अंधापन का शिकार

सदर अस्पताल में 8 महिने से आंखों का ऑपरेशन नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि जहां प्रत्येक साल 250-300 ऑपरेशन होता था, वहां एक भी ऑपरेशन नहीं हो रहा है। गरीब व जरूरतमंद लोग राशि के अभाव में ऑपरेशन नहीं करवा पा रहे हैं। जिसके कारण एेसे लोग अंधापन के शिकार हो रहे हैं। दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जब चिकित्सक नहीं है तो आंखों का ऑपरेशन कौन करेगा। विभाग के बदनीयति का शिकार गरीब लोग हो रहे हैं, जो लाचारी में अपनी मोटी व गाढ़ी कमाई निजी अस्पतालों में दे रहे हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि लोग तो ऑपरेशन के लिए आते हैं, लेकिन डॉक्टर नहीं रहने के कारण बैरंग वापस लौट जाते हैं।
8 माह का नेत्र विभाग का नहीं खुला ओटी : राज्य अंधापन समिति जिले में आंख से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए कई तरह के दावा करता है। लेकिन स्थिति यह है कि ऑपरेशन नेत्र रोग विभाग के कमरे का ताला तक नहीं खोला जाता है। जबकि नेत्र रोग विभाग में तमाम उपकरण मौजूद है फिर भी एक भी मोतियाबिंद मरीजों के आंखों का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। स्वास्थ्य विभाग से जिले को वर्तमान वित्तीय वर्ष में एक हजार से ज्यादा मोतियाबिंद रोगियों को आंखें के ऑपरेशन का लक्ष्य दिया गया है। लोगाों का कहना है कि अगर मोतियाबिन्द का ऑपरेशन अस्पताल में शुरू हो जाता तो अगले तीन माह में विभाग आराम से अपना लक्ष्य पूरा कर लेता। अस्पताल अधीक्षक डॉ. डीपी गुप्ता ने बताया कि मधेपुरा सदर अस्पताल में पहले 2 चिकित्सक पदस्थापित थे। एक डॉक्टर का 6 महीना पहले ट्रांसफर हो गया है।

विभाग काे कराया अवगत
डाक्टर के बाबत हमने विभाग को पत्र भी लिखा है। लेकिन अभी तक कोई निर्णय सीएस या वरीय अधिकारी को ही लेना है। डॉक्टर आते ही ऑपरेशन का काम शुरू हो जाएगा।
डॉ. डीपी गुप्ता, अस्पताल अधीक्षक, मधेपुरा

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- घर-परिवार से संबंधित कार्यों में व्यस्तता बनी रहेगी। तथा आप अपने बुद्धि चातुर्य द्वारा महत्वपूर्ण कार्यों को संपन्न करने में सक्षम भी रहेंगे। आध्यात्मिक तथा ज्ञानवर्धक साहित्य को पढ़ने में भी ...

और पढ़ें