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कैंपस अलर्ट:बीएनएमयू में होगी गांधी विचार की पढ़ाई, कवायद तेज

मधेपुराएक महीने पहले
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  • पाठ्यक्रम समिति का किया गया गठन, कुलसचिव ने जारी की अधिसूचना
  • प्रति कुलपति को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है

बीएन मंडल विश्वविद्यालय में गांधी विचार की पढ़ाई शुरू करने की कवायद तेज हो गई है। जनसंपर्क पदाधिकारी डाॅ. सुधांशु शेखर ने बताया कि विद्वत परिषद की बैठक 23 दिसंबर में लिए गए निर्णय के आलोक में कुलपति प्रोफेसर आरकेपी रमण के आदेशानुसार स्नातकोत्तर एवं स्नातक स्तर पर गांधी विचार की पढ़ाई करने के लिए नियम-परिनियम एवं पाठ्यक्रम निर्माण समिति का गठन किया गया है।

समिति में प्रति कुलपति प्रोफेसर आभा सिंह को अध्यक्ष और अस्सिटेंट प्रोफेसर (दर्शनशास्त्र) डाॅ. सुधांशु शेखर को सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। समिति में दर्शनशास्त्र विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डाॅ. राजेश रंजन तिवारी, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के डाॅ. मनोज कुमार एवं गांधी विचार विभाग, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर के अध्यक्ष डाॅ. विजय कुमार बाह्य विशेषज्ञ सदस्य हैं। समिति में दर्शनशास्त्र विभाग के अध्यक्ष शोभाकांत कुमार, निदेशक अकादमिक डाॅ. एमआई रहमान एवं परीक्षा नियंत्रक डाॅ. नवीन कुमार भी सदस्य के रूप में शामिल हैं। कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव प्रसाद ने इस आशय की अधिसूचना जारी कर दी है। अधिसूचना में समिति से निर्देशानुसार अपना विस्तृत प्रतिवेदन 15 दिन के अंदर अकादमिक शाखा कार्यालय में अग्रेतर कार्यार्थ जमा कराने का कष्ट करें।

विश्वविद्यालय में चार वर्ष से पढ़ाई शुरू करने का चल रहा है प्रयास : डॉ. सुधांशु शेखर
डाॅ. शेखर ने बताया कि वे विगत चार वर्ष से विश्वविद्यालय में गांधी विचार की पढ़ाई शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं। इस संबंध में एक दिसंबर 2018 को स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग की विभागीय परिषद की बैठक के माध्यम से विश्वविद्यालय को प्रस्ताव भेजा गया था।

बैठक में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष (2018-19) के उपलक्ष्य में भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में गांधी विचार में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की शुरुआत करने के लिए प्रस्ताव भेजने पर सहमति बनी थी। प्रस्ताव में कहा गया था कि पर्यावरण असंतुलन, आतंकवाद, सांप्रदायिकता, बेरोजगारी, विषमता आदि समस्याओं के समाधान के लिए महात्मा गांधी के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है और इस दृष्टि से गांधी विचार में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की महती उपादेयता है।

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