आयोजन:कीर्ति बाबू ने शिक्षा के लिए सर्वस्व दान कर दिया

मधेपुरा2 महीने पहले
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माल्यार्पण के दौरान प्राचार्य व अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं। - Dainik Bhaskar
माल्यार्पण के दौरान प्राचार्य व अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं।
  • टीपी कॉलेज परिसर में मनाई गई कीर्ति नारायण मंडल की जयंती, प्राचार्य बोले-

व्यक्ति की यश एवं कीर्ति उसे अमर बना देती है। महामना कीर्ति नारायण मंडल भी अपनी यश एवं कीर्ति से अमर हो गए हैं। उक्त बातें शनिवार को टीपी कॉलेज परिसर में आयोजित महाविद्यालय के संस्थापक कीर्ति नारायण मंडल के जन्मदिन समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्य डॉ. केपी यादव ने कही। उन्होंने कहा कि कीर्ति बाबू को पढ़ना आसान है, समझना मुश्किल है। उनके कार्यों को जीवन में उतारना और भी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि कीर्ति बाबू दधीचि थे। उन्होंने शिक्षा के उन्नयन के लिए अपना सर्वस्व दान कर दिया। मधेपुरा में सैद्धांतिक महान लोगों की कमी नहीं है। लेकिन कृति नारायण मंडल व्यावहारिक रूप से महान व्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि हम सबों को कीर्ति बाबू के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए। मुख्य अतिथि के रूप में हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डाॅ. वीणा कुमारी ने कहा कि महामना कीर्ति नारायण मंडल एक महान शिक्षाविद, सजग समाज निर्माता एवं लोक कल्याणार्थ समर्पित संत थे। उनका संपूर्ण जीवन प्रेरणादायी है।

बुद्ध की तरह गृह त्यागी थे कीर्ति बाबू: डॉ. नरेश
मुख्य वक्ता बीएनमुस्टा के महासचिव डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि कीर्ति नारायण मंडल महात्मा बुद्ध के जैसे गृहत्यागी, कबीर जैसे फक्कड़, थे। महात्मा गांधी जैसे सत्याग्रही और मदन मोहन मालवीय की तरह शिक्षा के प्रचारक थे। उन्होंने कहा कि कीर्ति बाबू ने समाज को शिक्षित करने के लिए दर्जनों शैक्षणिक संस्थान का निर्माण किया। उनके बनाए शिक्षण संस्थानों से आज हजारों छात्र पढ़-लिखकर अच्छे-अच्छे पदों पर देश की तरक्की में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि कृति बाबू कर्म पर विश्वास करते थे। उनकी कीर्ति आज भी जिंदा है और सदियों तक इस समाज को आलोकित करती रहेगी। कीर्ति बाबू के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तब मानी जाएगी, जब हम उनके विचारों एवं कार्यों का अनुकरण करें। हमें हमेशा यह याद रहे कि कीर्ति नारायण मंडल को पूजनीय नहीं, बल्कि अनुकरणीय हैं। इसके पूर्व सभी लोगों ने विज्ञान परिसर स्थित कीर्ति नारायण मंडल की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि की। कार्यक्रम में आए अतिथियों का स्वागत परीक्षा नियंत्रक डॉ. मिथिलेश कुमार अरिमर्दन ने किया। संचालन पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर और धन्यवाद ज्ञापन सिंडिकेट सदस्य डॉ. जवाहर पासवान ने किया। इस अवसर पर कीर्ति बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर एक पुस्तक के प्रकाशन का निर्णय लिया गया।

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