विवाद:वकील:डीसीएलआर के तबादले तक नहीं जाएंगे कोर्टडीसीएलआर:बिना वकील के वादी करें केस की पैरवी

मधेपुरा9 महीने पहले
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  • उदाकिशुनगंज अनुमंडल में डीसीएलआर और अधिवक्ता संघ के बीच गहराया विवाद

उदाकिशुनगंज के डीसीएलआर और अधिवक्ता संघ के बीच विवाद लगातार गहराते जा रहा है। अधिवक्ता संघ और डीसीएलआर, दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। अधिवक्ताओं ने जहां मुख्यमंत्री समेत अन्य को पत्र भेजकर डीसीएलआर पर अशोभनीय व मनमाना रवैया अपनाते हुए परेशान करने की बात कह कर उनका तबादला होने तक उनके कोर्ट कार्य का बहिष्कार कर दिया है। वहीं डीसीएलआर ने नोटिस जारी कर कहा है वादी और प्रतिवादी खुद उपस्थित रहकर अपने केस की पैरवी और हाजिरी लगा सकते हैं। अधिवक्ता महेंद्र कुमार ठाकुर, मनोज रंजन, संजय कुमार मिश्रा, तपेंद्र मेहता, विकास सिंह, सोनी कुमारी आदि ने दिए गए शिकायती आवेदन में बताया है कि नामांतरण अपील वाद संख्या 123/18-19 विकास सिंह बनाम कलरी देवी को 18 जनवरी 2021 को अदम पैरवी में खारिज किया जाना व नामांतरण अपील वाद संख्या 94/19-20 सुमित्रा देवी बनाम उदाकिशुनगंज अदम पैरवी में खारिज किया जाना व नामांतरण अपील वाद संख्या 61/11-12 सोना प्रसाद सिंह बनाम आलमनगर में वारिसानों को पक्षकार नहीं बनाना तथा वाद के संबंधित अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह को अपमानित किया जाना, डीसीएलआर कुंदन कुमार के अशोभनीय व्यवहार का उनके खिलाफ सबूत है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर संघ ने 8 मार्च को बैठक कर सर्वसम्मति से प्रस्ताव लिया कि डीसीएलआर कुंदन कुमार के न्यायालय के अधिवक्ता तब तक बहिष्कार करें, जब तक इनका स्थानांतरण न हो जाए। अब डीसीएलआर के नए आदेश से नाराज अधिवक्ता संघ मंगलवार को बैठक कर आगे की रणनीति तैयार करने का निर्णय लेगा। कहा कि ऐसे अधिकारी पर कार्रवाई होना जरूरी है।

पहले रुपए लेकर दिया जाता था आदेश, अब मेरे आने से सब कुछ हो गया है बंद: कुंदन कुमार
डीसीएलआर कुंदन सिंह ने कहा की अधिवक्ता संघ के आरोप निराधार हैं। मेरे आने से पहले ठीका-पट्टा चलता था। 50 से 60 हजार तक में लोग काम कराने का ठेका लेते थे। अब उनके पक्ष में आदेश नहीं हो रहा है। हमारे आने से यह सब बंद हो गया। जिसका कागज सही होता है, उस के पक्ष में हम जजमेंट देते हैं। म्यूटेशन एक्ट में कहीं भी डीसीएलआर के आदेश के विरुद्ध में आदेश को पुनर्जीवित करने का प्रावधान नहीं है, तो हमने उसको खारिज कर दिया। यही आदेश को एडवोकेट ने देखा और उसे शॉक लग गया।

अब वे लोग कह रहे हैं कि उसे अपमानित किया गया। लेकिन मामला दूसरा है। दरअसल, वह पार्टी से 50 हजार रुपए लिया हुए थे। मेरे कोर्ट से वह खारिज हो गया, तो पार्टी रुपए वापस मांग रही थी। इस पर सब वकील हमको दबाव दे रहे थे कि उस केस को पुनर्जीवित कीजिए। हमने कहा केस पुनर्जीवित नहीं होगा। एडीएम के यहां रिविजन कीजिए। वहां से जो आदेश होगा उसका पालन किया जाएगा। एक्ट के विरोध में हम काम नहीं करेंगे। पुनर्जीवित करने का कोई ऑप्शन ही नहीं है। यहां साल भर में 35 आर्डर होता था वह भी रुपए के लेकर। हमने 2 माह में 72 ऑर्डर लिखा है। एक रुपए किसी से नहीं लिया है।

बैठक कर तय करेंगे रणनीति: संजय मिश्रा
अधिवक्ता संघ के महासचिव संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि हम लोग डीसीएलआर के निर्णय के विरुद्ध बैठक कर आगामी रणनीति तैयार कर विचार-विमर्श करेंगे। संविधान का ही नियम है कि वादी चाहे तो स्वंय अपना पैरवी न्यायालय में कर सकता है। उसका कोई आदेश नहीं है। यदि वह वादी सक्षम नहीं है, तब अधिवक्ता को नियुक्त किया जाता है। हमारे संघ के प्रतिनिधि जिला से लेकर मुख्यमंत्री तक लिखित शिकायत कर दिए हैं। आगे की रणनीति बैठक के बाद तय की जाएगी। कहा कि एक अधिकारी को ऐसा व्यवहार नहीं करना चाहिए।

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