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सुविधा के नाम पर खानापूर्ति:नाम सेंट्रल लाइब्रेरी, छह साल से नहीं खरीदी गई नई किताबें

मधेपुरा16 दिन पहले
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  • एक साल में भी बीएनएमयू के केंद्रीय पुस्तकालय का नहीं हो सका ऑटोमेशन

बीएन मंडल विश्वविद्यालय विवि के जिस सेंट्रल लाइब्रेरी को विश्वस्तरीय बनाने की बात हुई थी वह इन दिनों खुद दूसरों से अपनी पहचान पूछता है। लाइब्रेरी की दीवारें जितनी चमकती हैं उसके अंदर का सच उतना ही भयानक है। पिछले 6 सालों से किताबों की खरीद नहीं हुई। विदेशी किताबें तो यहां के छात्रों को सपने में आता है। लाइब्रेरी का रख-रखाव भी बुरी तरह प्रभावित है।

बुनियादी सुविधाओं की हालत भी बदतर है। बीएनएमयू के सेंट्रल लाइब्रेरी को हाईटेक बनाने की बात की जाती है। कभी कहा जाता है कि यहां के छात्र ऑनलाइन विदेशी लेखकों की किताबें पढ़ पाएंगे तो कभी इस बात पर जोर दिया जाता है कि सेंट्रल लाइब्रेरी में एक क्लिक पर किताब के बारे में जानकारी मिल जाएगी। ताकि यहां पढ़ने वाले छात्र हाईटेक बन सकें।

लेकिन अब तक यह बातें सिर्फ भाषणों में ही हुई है। धरातल पर कुछ भी काम नहीं दिख रहा है। सेंट्रल लाइब्रेरी में अब सिर्फ अधिकारियों की बैठकें होती हैं। विदित विवि के सेंट्रल लाइब्रेरी में करीब 40 हजार किताबें हैं। सभी किताबों को अलमीरा में सजा कर रखा गया है।

लाइब्रेरी में छात्र यदा-कदा ही आते हैं। छात्रों को लाइब्रेरी में बैठकर किताब पढ़ने की सुविधा दी जाती है, लेकिन घर ले जाने की अनुमति नहीं है। लाइब्रेरी में वाटर प्यूरीफायर हुआ करता था। लेकिन अब इससे पानी नहीं निकलता है। सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन यह काम कर रहा है कि नहीं कोई नहीं जानता।

करीब 15 हजार किताबों का किया गया क्लासिफिकेशन

लाइब्रेरी का ऑटोमेशन कराने का कार्य पिछले वर्ष शुरू किया गया था। मार्च-अप्रैल में दो माह तक ऑटोमेशन का कार्य चला। 15 हजार किताबों का क्लासिफिकेशन भी किया गया। लॉकडाउन में काम बंद कर दिया गया। पुस्तकालय में रखे किताबों की नंबरिंग शुरू की गई थी।

किताबों का नंबर और नाम के साथ कंप्यूटर पर डाला जाता। इससे छात्रों के एक क्लिक पर पुस्तकों की सारी जानकारियां मिल जाती। छात्र कंप्यूटर की मदद से किताब का नाम, लेखक का नाम, पुस्तक का टाइटल, प्रकाशक का नाम व प्रकाशन वर्ष आदि आसानी से जान पाते।

ऑनलाइन होने से कौन सी पुस्तक पुस्तकालय के किस हिस्से में रखी है, इसकी जानकारी भी एक क्लिक में मिलती। लेकिन यह प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है। इंचार्ज डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि पुस्तकालय में उपलब्ध किताबों को विषयवार क्लासिफिकेशन शुरू किया गया था। लॉकडाउन बाद फिर दोबारा काम शुरू नहीं हो पाया है। बताया कि ऑटोमेशन कार्य के लिए नए लोगों की खोज की जा रही है। जल्द ऑटोमेशन का कार्य होगा।

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