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आदेश:मधेपुरा जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अधीक्षक हटाए गए

मनीष वत्स|मधेपुराएक महीने पहले
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  • बेतिया मेडिकल कॉलेज के डॉ. भूपेंद्र प्रसाद प्राचार्य और मधेपुरा मेडिकल कॉलेज के सह प्राध्यापक डॉ. बैद्यनाथ ठाकुर बनाए गए अधीक्षक

अव्यवस्थाओं को लेकर लगातार बदनामी झेल रहे मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और अधीक्षक को सरकार ने शुक्रवार को एक साथ अचानक हटा दिया है। स्वास्थ्य विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी एसएस पांडेय ने पत्र जारी किया है। आदेश के तहत प्राचार्य डॉ. गौरीकांत मिश्रा को हटाकर बेतिया के राजकीय मेडिकल कॉलेज के नेत्र विभाग के प्राध्यापक डॉ. भूपेंद्र प्रसाद को अगले आदेश तक के लिए प्राचार्य बनाया गया है। जबकि अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार को हटाकर मधेपुरा के ही जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल के पैथोलॉजी विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. बैद्यनाथ ठाकुर को अगले आदेश तक के लिए अधीक्षक बनाया है। निवर्तमान दोनों ही पदाधिकारी को आदेश दिया गया है कि वे तत्काल प्रभाव से अपना-अपना प्रभार नवनियुक्त पदाधिकारियों को सौंप देंगे। शुक्रवार की शाम को अचानक से हुई बड़ी कार्रवाई का बाद मेडिकल कॉलेज में शाम के बाद हलचल मच गई। दोनों ही नए पदाधिकारियों के लिए इस मेडिकल कॉलेज में व्यवस्था को ठीक कर पाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

प्राचार्य और अधीक्षक के आपसी टकराव में बढ़ रही थी अव्यवस्था
एक सप्ताह पूर्व ही मधेपुरा के जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल को 500 बेड का कोविड डिडिकेटेड अस्पताल घोषित किया गया था। लेकिन इसके बाद से ही यहां तनाव बढ़ने लगा था। अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार खुलकर यह कहने लगे थे कि उनके पास अभी 102 बेड है। लेकिन ऑक्सीजन 40 से 50 मरीजों के लिए ही मिल पा रहा है। जबतक ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो जाता, यहां 500 बेड तो क्या, 102 बेड भी चलना मुश्किल है। इसके अलावा डॉक्टर, नर्स, अन्य स्टाफ की घोर किल्लत है। ऐसे में 500 बेड का कोविड अस्पताल चलना मुश्किल है। जबकि मेडिकल कॉलेज के अधिकार और दायित्वों को लेकर भी उनका प्राचार्य से लगातार मतभेद चल रहा था। चर्चा है कि वे पिछले कुछ दिनों से जो भी पत्र जारी करते थे वे डीएम व विभाग को तो भेजते थे, लेकिन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को सूचित तक नहीं करते थे। जबकि मेडिकल कॉलेज और उससे सम्बद्ध अस्पताल का सम्पूर्ण नियंत्रण प्राचार्य का होता है। प्राचार्य डॉ. गौरीकांत मिश्र इसको लेकर नाराजगी भी जाहिर कर चुके थे। जबकि अधीक्षक डॉ. राकेश कुमार इसे लिपिकीय भूल बता रहे थे। इन सब मामलों को लेकर भी सरकार के पास रिपोर्ट जा रही थी। दोनों पदाधिकारियों के आपसी टकराव के कारण भी यहां अव्यवस्था बढ़ती जा रही थी। रोस्टर के अनुसार डॉक्टर की ड्यूटी का मैनेजमेंट भी सटीक तरीके से नहीं चल पा रहा था। डॉक्टरों के मेडिकल कॉलेज में नहीं रहने की खबर दैनिक भास्कर में प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद दो दिनों तक डीएम समेत जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों के निरीक्षण में भी डॉक्टर अनुपस्थित पाए जा रहे थे। ऐसे में यहां चर्चा चल रही है कि क्या इनदोनों पदाधिकारियों को मेडिकल कॉलेज की स्थिति का सच सामने लाने की सजा मिली है या दोनों को उनके आपसी टकराव में बढ़ती अव्यवस्था के कारण हटाया गया है।

पदाधिकारी बोले- 500 बेड वाले अस्पताल चालू होने में लगेंगे 2 माह
800 करोड़ की लागत से बने मेडिकल कॉलेज का उद्घाटन पिछले साल 7 मार्च को खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। तब बड़े-बड़े वादे किए गए थे। लेकिन यहां अबतक कई आवश्यक सुविधा बहाल नहीं हो पाया है। ऑपरेशन समेत कई विभाग अबतक सुचारू रूप से संचालित नहीं हो रहे हैं। मरीजों को रेफर कर दिया जाता था। एक सप्ताह पूर्व ही इसे 500 बेड का कोविड डिडिकेटेड अस्पताल घोषित किया गया था। लेकिन पदाधिकारी कहते हैं कि इसके पूरी तरह से व्यवस्थित होने में कम से कम दो माह लगेंगे। इस बीच इसी बहाने यहां एक सप्ताह पूर्व से ही ओपीडी को बंद कर दिया गया है। सिर्फ कोविड मरीजों को रही भर्ती लिया जा रहा है। जबकि अभी संचालित 102 बेड भी कोविड मरीज से पूरा नहीं भर पाता है। ऐसे में जबकि इस बार एंटीजन और आरटीपीसीआर टेस्ट में भी कई मरीज निगेटिव आ रहे हैं, जबकि वे कोरोना संक्रमित होते हैं, उन्हें भी भर्ती नहीं लिया जा रहा है। लोग यहां बिलबिलाते रहते हैं या फिर भर्ती होने होने के लिए पैरवी और जुगाड़ लगाते रहते हैं। इसके अलावा आए दिन मरीजों को बोल दिया जाता है कि यहां ऑक्सीजन बेड खाली नहीं है।

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