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भास्कर एक्सपोज:नाबालिग छात्र का नाम केस से हटाने के लिए एसडीपीओ के रीडर ने मांगे ‌50 हजार, पीड़ित ने बाछी बेचकर दिए रुपए

मधेपुरा22 दिन पहलेलेखक: मनीष वत्स
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  • जमीन विवाद के केस में आठवीं और 11वीं के दो छात्रों समेत सात लोगों पर दर्ज है केस

मधेपुरा पुलिस पर आए दिन घूस लेने का आरोप लगते रहता है। मारपीट के मामले में बिहारीगंज थाने के एक जमादार द्वारा कुछ माह पूर्व घूस लेने का मामला अभी पूरी तरह से शांत भी नहीं हुआ था कि उदाकिशुनगंज के एसडीपीओ के रीडर संदीप कुमार पर एक केस में नाम छंटवा देने के नाम पर एक पीड़ित पक्ष से दो बार में 15 हजार रुपए घूस लेने का मामला सामने आया है। मामला बिहारीगंज थाना कांड संख्या 115/21 के तहत राजगंज गांव से जुड़ा हुआ है।

पीड़ित का कहना है कि पिछले तीन दिन से गवाही से लेकर दोनों किस्त में घूस देने का उन लोगों ने वीडीओ और ऑडियो क्लिप बना लिया और एसपी मधेपुरा और डीआईजी सहरसा को भेजा है। पीड़ित का कहना है कि जमीन विवाद के मामले में दूसरे पक्ष की ओर से दो नाबालिग छात्रों समेत सात लोगों पर झूठा केस दर्ज करा दिया गया है। इसमें एससी-एसटी एक्ट भी लगा है।

छात्रों का चरित्र खराब हो जाने से बचाने के लिए उदाकिशुनगंज एसडीपीओ के रीडर संदीप कुमार ने पीड़ित पक्ष से कार्यालय में 13 हजार और अगले दिन बाजार में दो हजार रुपए लिए। पीड़ित का कहना है कि वे लोग काफी गरीब हैं। छात्रों का चरित्र खराब होने से बचाने के लिए उनलोगों ने रविवार को बिहारीगंज हाट में गाय का एक बाछी को बेचकर 5000 रुपए और अन्य से शेष रुपए कर्ज लेकर रीडर को दिए। ऐसे में पीड़ित पक्ष ने एसपी और डीआइजी से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

घूस लेते समय रीडर ने कहा-मोबाइल अंदर करो
रीडर संदीप के मामले में चोर की दाढ़ी में तिनका... वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि जब वे लोग घूस की बात करने गए तो रीडर संदीप ने उनलोगाें से कहा कि मोबाइल काे अंदर करो। उन्होंने शंका जाहिर की कि लोग मोबाइल से रिकॉर्डिंग भी कर लेते हैं।

रीडर ने कहा-केस कमजोर करवा देंगे
पीड़ित पक्ष का कहना है कि 29 मई 2021 को केस दर्ज हाेने के बाद छानबीन करने के लिए दो-चार दिन बाद एसडीपीअो सतीश कुमार के साथ उनका रीडर संदीप कुमार भी आए थे। उसी समय रीडर ने कहा कि कार्यालय में आकर मिलें। इसके बाद जब ये लोग उनसे मिलने गए तो उनलोगों से कहा गया कि केस बहुत खराब है। नाबालिग छात्र भी नामजद हैं। सलाह दी कि कि छात्रों का नाम छंटवा लो। भविष्य में कभी नौकरी लग रही होगी, तो दिक्कत हो जाएगी। पीड़ित की माने तो मदद के लिए पहले 50 हजार रुपए की मांग की गई।

यह भी कहा कि गवाह लेकर आना, साहब से मिलवा देंगे। लेकिन पीड़ित पक्ष गरीबी का हवाला देकर 8-10 हजार में काम कर देने की बात कह रहे थे। इसके बाद 15 हजार देने की बात हुई। इसके बाद कार्यालय आकर पीड़ित ने पहले दिन 13 हजार रुपए दिए। उसके अगले दिन सुबह को बाजार में आकर दो हजार रुपए और दिए। रीडर नरम दिल निकले। पीड़ित ने जब कहा कि थोड़े रुपए की उसे भी जरूरत है, तो रीडर ने 100 रुपए वापस भी कर दिए। आश्वासन दिया कि दोनों नाबालिग का नाम छंटवा देंगे। साथ ही केस में अन्य मदद भी करवा देंगे, ताकि कोर्ट से बेल हो जाए।

एसडीपीओ और रीडर ने मैसेज के बाद भी नहीं दिया बयान
रीडर संदीप कुमार और एसडीपीओ सतीश कुमार से उनका पक्ष लेने के लिए फोन किया गया, लेकिन उन्होंने नहीं उठाया। संदीप को वाट्सएप पर मैसेज भी किया गया, लेकिन उन्होंने अपना पक्ष नहीं दिया। बाद में फोन कर कहा कि वे अभी पारिवारिक मामले को लेकर थोड़ा परेशान हैं। एसडीपीओ ने फोन करने पर कहा कि मैसेज भेज दें। इसके बाद उन्हें मैसेज और वाट्सएप पर भी मामले की जानकारी देकर बयान के लिए कहा गया, लेकिन उनका भी पक्ष नहीं आया।

डीआईजी बोले-इस तरह का मामला कतई क्षम्य नहीं है
मामले को लेकर कोसी रेंज के डीआईजी प्रवीण कुमार प्रणव ने बताया कि मामला गंभीर है। पीड़ित के आवेदन और साक्ष्य के आधार पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस तरह का मामला कतई क्षम्य नहीं है। विदित हो कि पीड़ित पक्ष पर जो 31 मई को केस दर्ज कराया गया है, इसमें घटना की तिथि, दिन और समय भी अंकित नहीं है। यह एफआईआर कॉपी देखने से भी स्पष्ट होता है। दोनों पक्षों का विवाद आवासीय जमीन को लेकर है। केस के नामजद पक्ष के कुंदन कुमार का कहना है कि जमीन उनको केवाला से प्राप्त है।

बावजूद दूसरे पक्ष के लोग अक्सर परेशान करते हैं। उनलोगों ने पूर्व में कोर्ट में सनहा भी दर्ज कराया था। जिसमें भी इस बात का भी जिक्र किया गया था कि उनके पक्ष के लोगों पर पूर्व से भी संगीन कांड दर्ज है। दूसरी ओर, बुधवार को जब केस के नामजद पक्ष के कुंदन ने एसपी और डीआईजी को सारा साक्ष्य वाट्सएप पर भेज दिया और इस बात की जानकारी स्थानीय स्तर पर किसी माध्यम से उदाकिशुनगंज के एसडीपीओ के रीडर को हुई, तो उसपर भी मामला को रोकने को लेकर दबाव बनाया जाने लगा।

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