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मुख्य पार्षद की कुर्सी पर रार:सुधा कुमारी ने डीएम को पत्र लिख कहा मुख्य पार्षद के रूप में कार्य करने दिया जाए

मधेपुरा4 दिन पहले
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  • अविश्वास प्रस्ताव 6 अगस्त को वोटिंग से किया गया था पास
  • विपक्षी खेमे की निर्मला देवी ने सीएम को पत्र लिखा

मधेपुरा नगर परिषद के मुख्य पार्षद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अब भी तेज है। सुधा कुमारी का जहां कहना है कि नियम के अनुसार वह अब भी मुख्य पार्षद हैं, लेकिन कार्यपालक पदाधिकारी उन्हें कोई कार्य नहीं करने दे रहे हैं। उपमुख्य पार्षद से ही मुख्य पार्षद का कार्य लिया जा रहा है। तो वहीं विपक्षी खेमा का कहना है कि मुख्य पार्षद पर लाए गए अविश्वास प्रस्ताव से लेकर अविश्वास प्रस्ताव के पास हाेने तक में नगर पालिका अधिनियम का पालन किया गया है। डीएम के बाद अब इन लोगों ने मुख्यमंत्री को भी आवेदन दिया है। इन लोगों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री कहेंगे तो वे सभी सदेह भी उनके समक्ष उपस्थित हो सकते हैं। विदित हो कि पिछले तीन माह से नगर परिषद में मुख्य पार्षद की कुर्सी को लेकर राजनीति चल रही है। उनके विरुद्ध 19 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव लाया था। अविश्वास प्रस्ताव का लाया जाना भी सहज नहीं रहा। इसके बाद छह अगस्त को अविश्वास प्रस्ताव को लेकर विशेष बैठक की गई, जिसमें उपस्थित 22 पार्षदों में से 21 ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वोट दिया। जबकि एक वोट रद्द घोषित कर दिया गया था। डीएम को दिए पत्र में सुधा कुमारी का कहना है कि 6 अगस्त 2021 को नगर पालिका अधिनियम के विपरीत एक विशेष बैठक की गई। जिसमें उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया तथा अविश्वास प्रस्ताव पास होने के तुरंत बाद कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा इसकी सूचना निर्वाचन आयोग को सीधे प्रेषित कर दी गई। कार्यपालक पदाधिकारी के इस विधि विरुद्ध आचरण को निर्वाचन आयोग द्वारा काफी गंभीरता से लिया गया। साथ ही कार्यपालक पदाधिकारी से शो-कॉज पूछते हुए उनसे विशेष बैठक के संबंध में प्रतिवेदन भेजने को कहा गया। इस पत्र के आलोक में कार्यपालक पदाधिकारी द्वारा विहित प्रपत्रों में साक्ष्यों सहित प्रतिवेदन जमा करने के बाद निर्वाचन आयोग के अनुसार 6 अगस्त की बैठक की सूचना निर्गत करने में नगर पालिका अधिनियम की धारा 49 का अनुपालन नहीं होने के कारण मुख्य पार्षद के निर्वाचन हेतु तिथि निर्धारित करने से उन्होंने साफ- साफ शब्दों में इंकार कर दिया। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 6 अगस्त की विशेष बैठक तथा इसमें पारित अविश्वास प्रस्ताव की वैधता के संबंध में कुछ भी कहने से परहेज किया गया है, क्योंकि कानून द्वारा यह शक्ति राज्य निर्वाचन आयोग में नहीं है। सुधा कुमारी का कहना है कि 6 अगस्त की विशेष बैठक के अवैध करार होने के कारण इसमें पारित अविश्वास का प्रस्ताव भी अवैध है। ऐसी स्थिति में वह आज भी नगर परिषद के मुख्य पार्षद हैं। बावजूद कार्यपालक पदाधिकारी उन्हें मुख्य पार्षद का कार्य नहीं करने दे रहे हैं न ही कोई संचिका उनके पास भेज रहे हैं। जबकि उपमुख्य पार्षद से ही मुख्य पार्षद का कार्य लिया जा रहा है। ऐसे में उन्होंने डीएम से कार्यपालक पदाधिकारी नियम विरुद्ध कार्य करने से रोकने और उन्हें मुख्य पार्षद का कार्य करने देने की मांग की है।

मुख्य पार्षद ने जानबूझकर देर से रिसीव किया पत्र : निर्मला
इधर, विपक्षी खेमा को लीड कर रहीं पार्षद निर्मला देवी ने मुख्यमंत्री समेत अन्य पदाधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि चूंकि मुख्य पार्षद के विरुद्ध ही अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था, इस कारण से उन्होंने पत्र को देर से रिसीव कराया, ताकि उनकी कुर्सी बची रह जाए। जबकि अन्य दो पार्षद अहिल्या देवी और मो. सफीक आलम अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में शामिल हुए थे। उन लोगों ने शपथ-पत्र भी बनवाकर दिया है। निर्मला देवी का कहना है कि बिहार नगर पालिका अधिनियम 2007 की धारा- 49 में नगर पालिका की प्रत्येक बैठक में सिवाए स्थगित बैठक के किए जाने वाले कार्यों की सूची रजिस्ट्रीकृत पते पर ऐसी बैठक के लिए नियत समय से कम से कम 72 घंटे पूर्व प्रत्येक पार्षद को भेजी जाएगी तथा जिस कार्य की सूचना दी गई हो उससे भिन्न कोई कार्य बैठक में न तो लाया जाएगा नहीं निष्पादित किया जाएगा। यह कहीं नहीं लिखा गया है कि पत्र निर्गत होने में विलंब होने पर बैठक संपादित ही नहीं होगी या बैठक को अवैध माना जाएगा। उन्होंने कहा कि नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा- 49 के तहत अगर बैठक गलत हुई है तो इसे अवैध घोषित कर फिर से चुनाव कराने का आदेश दिया जाए या बैठक सही है तो चुनाव की तिथि निर्धारित की जाए। वर्तमान स्थिति में नगर का विकास अवरुद्ध है।

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