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कोरोना काल में दोहरी मार:डीजल-पेट्रोल व खाद्य पदार्थों के बढ़े दाम ने बिगाड़ा बजट

मधेपुरा7 दिन पहले
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  • काम-धंधा बंद होने से मध्यम और गरीब तबके के लोगों की कमर मानो टूटी

कोरोना संक्रमण के दौर में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों के बीच लोगों को अब महंगाई से भी मुकाबला करना पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण बाजार पूरी तरह से नहीं खुले हैं। ऐसे में गरीब व मध्यम वर्गों के लोगों की हालत खराब है। क्योंकि खाने-पीने की वस्तुओं की बढ़ी कीमतें कम होने का नाम ही नहीं ले रही है। कोरोना की दूसरी लहर से आम आदमी की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। एक तरफ कोरोना के कारण कई लोग संक्रमित हो गए हैं तो दूसरी आेर इसके प्रभाव के कारण महंगाई आसमान छूने लगी है। अन्य काम-काज भी प्रभावित हुए है। रविवार को भी पेट्रोल की कीमत में 20 पैसा तथा डीजल की कीमत में 30 पैसा प्रति लीटर का उछाल देखा गया। इसके कारण पेट्रोल 97.97 रुपए तथा डीजल 91.98 रुपए प्रति लीटर बिकने लगा। खासकर बढ़ी महंगाई से मध्यम वर्ग को खासा परेशानी को सामना करना पड़ रहा है। मध्यम वर्ग के लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया है। बाजार में काेई भी दाल 100 रुपए प्रति किलो से कम नहीं है। जबकि खाने का तेल तो 170-190 रुपए में मिल रहा है जो कोरोना के पहले 120 रुपए प्रति लीटर की दर से मिलता था। सब्जियांे की कीमत में भी भारी उछाल दिख रहा है। कोरोना के पूर्व 30 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिकने वाला परवल अब 60 से 80 रुपए प्रतिकिलो की दर से मिल रहा है।

महीने के राशन में की कटौती
बढ़ती महंगाई की वजह से रसोई में अब लोग जरूरत से कम सामान का उपयोग करने लगे हैं। महिलाआंे की माने तो महीने के राशन में भी कटौती की जा रही है। गृहिणी मंजू कुमारी व रीता कुमारी का कहना है कि एक महीने का राशन सामान्य परिवार में तीन हजार से पांच हजार तक में आता है। लेकिन महंगाई को देखते हुए वे कम तेल में ही सब्जी व अन्य सामग्री तैयार कर लेती हैं। महंगाई से घर का बजट गड़बड़ा गया है। पेट्रोल-डीजल के हर रोज बढ़ रहे दामों का असर अन्य सामानों पर दिख रहा है। ट्रांसपोर्ट का भी भाड़ा बढ़ गया है।

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