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सख्ती:41 साल की नौकरी के बाद सेवा से बर्खास्त की गईं तीन शिक्षिका, चौथे का पेंशन रोका

मधेपुरा19 दिन पहले
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  • राजकीय कन्या मध्य विद्यालय की शिक्षिकाओं पर आरडीडीई ने की कार्रवाई
  • फैसले के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी शिक्षिकाएं

लगातार 41 साल शिक्षक की नौकरी करने के बाद रिटायरमेंट से कुछ ही वर्ष पूर्व शहर की राजकीय कन्या मध्य विद्यालय की तीन शिक्षिकाओं की सेवा को बर्खास्त कर दिया गया। जबकि इनमें से एक शिक्षिका स्कूल की प्रभारी एचएम भी हैं। इसके अलावा कार्रवाई की जद में आई एक अन्य शिक्षिका सेवानिवृत्त भी हो गई हैं। मधेपुरा की चार शिक्षिकाओं पर उक्त कार्रवाई फिलहाल सहरसा प्रमंडल के आरडीडीई जगतपति चौधरी ने की है। इसके अलावा सहरसा की भी तीन शिक्षिकाओं पर भी इस तरह की कार्रवाई की गई है। हालांकि इन सभी शिक्षिकाओं का मामला 35 साल से भी पुराना है। बताया गया कि निम्न अवर शिक्षा सेवा (महिला संवर्ग) में विद्यालय निरीक्षिका-सह- उप निदेशिका, बिहार एवं जिला विद्यालय निरीक्षिका, मधेपुरा द्वारा वर्ष 1980 में शिक्षिकाओं की बहाली की गई थी। उक्त कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षा विभाग में हलचल मच गई है। आरडीडीई के आदेश की प्रति डीईओ कार्यालय को भेज दी गई है। फिलहाल इस आदेश-पत्र का अध्ययन किया जा रहा है। बताया गया कि जिला मुख्यालय के राजकीय कन्या मध्य विद्यालय में वर्ष 1980 में शिक्षिका पद पर मिन्नी गुप्ता, पुष्पा कुमारी, किरण कुमारी तथा कांता कुमारी की नियुक्ति की गई थी। शिकायत के आलोक में नियुक्ति की वैधता की जांच की जवाबदेही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को दी गई थी। जांच के दौरान सीबीआई ने पाया कि चारों शिक्षिकाओं की नौकरी अवैध है। लिहाजा 29.9.2016 को इनकी सेवा समाप्त कर बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के निदेशक को जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है।

सीबीआई की जांच रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई
सीबीआई की जांच रिपोर्ट में दर्शाया गया कि इनकी नियुक्ति में बिना प्रक्रिया पालन करते हुए अनियमितता बरती गई। नियुक्ति के पूर्व समाचार पत्र में न तो विज्ञापन दिया गया और न आरक्षण रोस्टर का अनुपालन किया गया। द्वितीय शोकॉज में शिक्षिकाएं, सीबीआई की जांच रिपोर्ट के विरुद्ध साक्ष्य उपस्थापित नहीं कर पाईं। इस कारण से सीबीआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रमंडलीय स्थापना समिति ने तीन शिक्षिकाओं की सेवा समाप्त कर दी। जबकि अवकाश प्राप्त कांता कुमारी का पेंशन, उपादान एवं अर्जित अवकाश नकदीकरण शून्य कर दिया गया।

शिक्षिकाएं जांच रिपोर्ट के खिलाफ हाईकोर्ट गई थीं
जांच रिपोर्ट के खिलाफ शिक्षिकाएं हाईकोर्ट चली गई थीं। दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शिक्षिकाओं को पुनर्बहाली करने का आदेश जारी किया था। आदेश के आलोेक में इन्हें लंबित वेतन भुगतान का भी आदेश दिया गया। प्राप्त साक्ष्य के आलोक में शिक्षा विभाग के निदेशक उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों तथा केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के जांच प्रतिवेदन में दिए गए मंतव्य के आलोक में उक्त शिक्षिकाआंे पर प्रपत्र क गठित करते हुए जांच की जिम्मेदारी डीईओ और डीपीओ को सौंप दी। पदाधिकारियों ने जांच रिपोर्ट समेत प्रपत्र क से संबंधित सारे अभिलेख शिक्षा विभाग को सौंपते हुए मार्ग दर्शन करने की मांग की थी। इसके बाद शिक्षिकाआंे से दूसरा शो-कॉज पूछा गया। विभाग ने मार्गदर्शन भी दे दिया। उक्त मार्ग निर्देश के बाद आरोपी शिक्षिकाओं के संबंध में अंतिम निर्णय के लिए 20 जुलाई 21 को प्रमंडलीय स्थापना समिति की बैठक की गई। जिसमें इनके विरुद्ध संचालित विभागीय कार्रवाई की समीक्षा की गई।

शो-कॉज का जवाब दे दिया था
विभागीय कार्रवाई से संबंधित कोई भी पत्र अभी प्राप्त नहीं हुआ है। प्रपत्र क गठित होने के बाद वर्ष 2018 में शो-कॉज से संबंधित जवाब दे दिया गया था। दूसरे शो-कॉज का भी जवाब दे दिया गया था। इसके बाद निवेदन भी किया था कि जवाब में जो कमी है उसकी जानकारी दी जाए। अभी तक न तो कोई जवाब मिला और न पत्र। फैसले के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। एगी।
-मिन्नी गुप्ता, प्रभारी एचएम, राजकीय कन्या मवि, मधेपुरा

रिपोर्ट के आधार पर की गई है कार्रवाई
वर्षों पूर्व सीबीआई ने मामले की जांच की थी। उसी जांच रिपोर्ट के आलोक में प्रमंडलीय स्थापना समिति द्वारा यह कार्रवाई की गई है।
जगतपति चौधरी, आरडीडीई, सहरसा

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