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खुशखबरी:हम विश्व गुरु केवल भाषण देकर नहीं हो सकते हैं: प्रो. रामजी सिंहदिल्ली-मुंबई की तरह मधेपुरा में भी 2023 से दौड़ेंगी सीएनजी संचालित बसें, घरों

मनीष वत्स | मधेपुरा10 महीने पहले
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सीएनजी व पीएनजी के लिए बिछाया जा रहा आईओसीएल का पाइप। - Dainik Bhaskar
सीएनजी व पीएनजी के लिए बिछाया जा रहा आईओसीएल का पाइप।
  • मधेपुरा होकर गेल बिछा रहा बरौनी से गुवाहाटी तक 721 किमी पाइप लाइन

दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में वाहनों में इंधन के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले सीएनजी से वर्ष 2023 में मधेपुरा जिले में भी गाड़ियां चलेंगी। इसके लिए गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएलगेल) के द्वारा पाइप लाइन बिछाने और सब स्टेशन बनाने का कार्य शुरू है। उम्मीदों के अनुसार कार्य चलता रहा तो वर्ष 2023 के जून से पहले न सिर्फ यहां सीएनजी से वाहन चलने लगेंगे, बल्कि लोगों के रसोईघर में भी खाना बनाने वाले इंधन (पाइप नेचुरल गैस) की भी आपूर्ति होने लगेगी। इस परियोजना से जुड़े पदाधिकारियों की मानें तो पहले चरण में मधेपुरा शहरी क्षेत्र के आसपास आईओसीएल के कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंप पर सीएनजी का स्टेशन डेवलप किया जाएगा। जहां से वाहनों में इंधन भराया जा सकेगा। जबकि घरेलू गैस की घर-घर कनेक्शन के आधार पर मधेपुरा शहरी क्षेत्र में आपूर्ति की जाएगी। दूसरे फेज में जिले के अन्य नगर निकाय क्षेत्रों में पीएनजी की आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए उदाकिशुनगंज के बीड़ी रणपाल गांव में गेल और आईओसीएल का स्टेशन बनेगा। वहीं से आईओसीएल का पाइप लाइन मधेपुरा शहर की ओर आ रहा है। दोनों कंपनी का पाइप बिछाया जा रहा है। गेल, मधेपुरा में 25 किलोमीटर की दूरी में आलमनगर, उदाकिशुनगंज और बिहारीगंज प्रखंड के 19 गांवों से होकर पाइप को आगे ले जाएगा।

जिले में 50% पूरा हाे गया है कार्य
दरअसल, प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा योजना के तहत बरौनी से गुवाहाटी गैस पाइपलाइन परियोजना का कार्य चल रहा है। बिहार में इस परियोजना के तहत बरौनी से गुवाहाटी तक कुल 721 किलोमीटर तक गैस पाइपलाइन बिछाया जा रहा है। बिहार में इस परियोजना की शुरुआत मई 2019 में की गई। कार्य को 31 दिसंबर 2021 तक पूरा कर लेने का लक्ष्य निर्धारित है। जबकि मधेपुरा जिले में जनवरी 2020 से गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू है। अगले साल के अंत तक कार्य पूरा कर लिए जाने की तैयारी है। ऐसे में तकनीकी कारणों से हो रही देरी के कारण 2023 तक में लोगों को सुविधा मिलने की संभावना है। गेल के परियोजना से जुड़े राजन कुमार झा बताते हैं कि मधेपुरा जिले में गैस पाइप लाइन बिछाने का कार्य लगभग 50% पूरा कर लिया गया है। पाइप का वेल्डिंग का काम पूरा कर लिया गया है।

घरेलू गैस में 35-40% की होगी बचत
पीएनजी कनेक्‍शन मिलने से लोगों को रसोई गैस उठाकर लाने की परेशानी के साथ ही घटतौली की आशंका से भी निजात मिल जाएगी। पीएनजी कनेक्‍शन किफायती और सुरक्षित भी होगा। पीएनजी परम्परागत गैस सिलेंडर से सस्ती होगी। इससे करीब 35-40 फीसद की बचत होगी। साथ ही पाइप लाइन से आपूर्ति मिलने से गैस सिलेंडर ढोने की समस्या भी समाप्त होगी। जितना खर्च होगा, उतना ही बिल आएगा। यानी गैस चोरी की शिकायत भी नहीं रहेगी। कोई भी मौसम हो, रसोई गैस की किल्लत नहीं होगी।
सीएनजी का खर्च कम
इसका प्रयोग डीजल इंजन तथा पेट्रोल इंजन दोनों में किया जाता है। पर्यावरण के लिहाज से यह गैस बेहतर मानी जाती है। पैट्रोल और डीजल की तुलना में यह कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और जैविक गैसें कम उत्सर्जित करती है। पैट्रोल और डीजल गाड़ियों की तुलना में सीएनजी का खर्च कम होता है।

गैस पहुंचाने के लिए बिछाया जा रहा पाइप
गैस पहुंचाने के लिए बिछाया जा रहा पाइप

यह हवा से हल्की होती है

प्राकृतिक गैस को दबाकर कम करने का प्रमुख उद्देश्य यह है कि यह आयतन कम घेरे और इंजन के दहन प्रकोष्ठ में उपयुक्त दाव के साथ प्रवेश करे। प्राकृतिक गैस की तरह सीएनजी के अवयव हैं, मिथेन, इथेन और प्रोपेन। प्राकृतिक गैस की तरह सीएनजी भी रंगहीन, गंधहीन और विषहीन होती है। यह हवा से मामूली सी हल्की होती है।

पर्यावरण के लिहाज से बेहतर है सीएनजी
सीएनजी, प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले ज्वलनशील गैस को अत्यधिक दबाव के अंदर रखने से बने तरल को कहते हैं। इस गैस को वाहनों में प्रयोग करने के लिए 200 से 250 किलोग्राम प्रति वर्ग सेमी तक दबाया जाता है।

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