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बाढ़ का कहर:1.5 लाख की आबादी बाढ़ से घिरी, नाव के अभाव में बाहर नहीं निकल पा रहे लोग, पीने का पानी भी नहीं

मधुबनी10 महीने पहले
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परिचय भकुआ में कमला नदी में तेजी से हाे रहा कटाव। - Dainik Bhaskar
परिचय भकुआ में कमला नदी में तेजी से हाे रहा कटाव।
  • मधेपुर प्रखंड क्षेत्र में कोसी, कमला बलान, भूतही बलान एवं तिलयुगा नदी में भीषण बाढ़, बढ़ी लोगों की परेशानी
  • खुले आसमान के नीचे कोसी तटबंध पर आश्रय ले रहे हैं विस्थापित परिवार

प्रखंड क्षेत्र में मंगलवार को कोसी, कमला बलान, भूतही बलान एवं तिलयुगा नदी की भीषण बाढ़ से लगभग डेढ़ लाख की आबादी घिर चुकी है। कोसी तटबंध के अंदर अवस्थित गढ़गांव, बसीपट्टी, द्वालख, डारह, महपतिया, भरगामा और बकुआ पंचायत का पूर्ण भाग तथा मटरस, तरडीहा, करहारा, रहुआ संग्राम तथा भेजा पंचायत के पूर्वी भाग में कोसी, भूतही बलान एवं तिलयुगा नदी की बाढ़ का पानी फैला हुआ है। कमला तटबंध के भीतर अवस्थित रजौर, दर्जिया एवं नवटोलिया गांव में बाढ़ का पानी फैला हुआ है।

इन क्षेत्रों का सड़क सम्पर्क भंग हो चुका है। प्रभावित गांवों को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने वाली सड़कों पर तीन से पांच फीट तक बाढ़ का पानी बह रहा है। यातायात पूर्णतया प्रभावित है। नाव के अभाव में लोग बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए भी बाढ़ से घिरे कई गांवों में नाव उपलब्ध नहीं है। प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का पानी घर में प्रवेश कर जाने के कारण दर्जनों परिवार विस्थापन का दंश झेलने को विवश हैं। विस्थापित परिवार खुले आसमान के नीचे जानमाल के साथ पश्चिमी कोसी तटबंध सहित अन्य ऊंचे स्थलों पर शरण लिए हुए हैं। मंगलवार को खरीक कोसी तटबंध पर बाबाजी मुखिया, मनीया देवी, कैलाश मुखिया सहित लगभग एक दर्जन परिवार जानमाल के साथ शरण ले रखे हैं। 
पेयजल एवं पशुचारा की हाे रही दिक्कत 
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल एवं पशुचारा की दिक्कत है। अधिकतर चापाकल बाढ़ में डूब चुका है। हरा पशुचारा के लिए किसानों को कोसों दूर का सफर करना पड़ता है। मंगलवार अपराह्न तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के नदियों की जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी रहने से लोग काफी चिंतित थे। बाढ़ प्रभावित गांवों का मोटर बोट की सहायता से भ्रमण कर बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत एवं बचाव कार्य चलाने की मांग राजद के वरिष्ठ नेता दिवाकर प्रसाद यादव तथा सीपीआईएम नेता राम नारायण यादव ने प्रशासन से की है।

किसी भी आपात स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए भी बाढ़ से घिरे कई गांवों में नाव तक नहीं है उपलब्ध

करहारा गांव के मुख्य पथ पर बहता बाढ़ का पानी।
करहारा गांव के मुख्य पथ पर बहता बाढ़ का पानी।

बाढ़ के पानी से एक दर्जन गांव घिरे

प्रखंड क्षेत्र में तकरीबन एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर गया है। बाढ़ के पानी से प्रखंड क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के घिरने से आवागमन अवरुद्ध हो गया है। भारतीय सीमा क्षेत्र होकर बहने वाली अधवारा समूह की धौस, कोकरा, बुढ़नद, थुमहानी, खिरोई आदि नदियों का पानी उछलने के कारण प्रखंड क्षेत्र के एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। भारतीय सीमा क्षेत्र होकर बहने वाली इन नदियों में नेपाल से पानी आया है। नेपाल की छोटी-बड़ी नदियों से पानी भारतीय सीमा क्षेत्र होकर बहने वाली नदियों में आया है।

मंगलवार को इन नदियों के जलस्तर में समय दर समय बढ़ोतरी हो रही थी। प्रखंड क्षेत्र के जो गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं उनमें अति बाढ़ प्रभावित करहरा, हथियरबा, सिमरकोण, बिरदीपुर, गुलरियाटोल, नवगाछी, बर्री, रजबा, माधोपुर, धनुषी, फुलबरिया, रजघट्टा, बिशनपुर आदि शामिल है। बाढ़ के पानी से घिरने के बाद इन गांवों के लोगों ने अपने माल-मवेशियों के साथ बाढ़ से बचाव करने का उपाय ढूंढना प्रारंभ कर दिया है। बाढ़ की विभीषिका की आशंका से इन गांवों के लोग सहमे हुए हैं। सरकारी व प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ आने के समय में बचाव की तैयारी होने से बाढ़ प्रभावित इन गांवों के लोग आक्रोशित भी हैं।

दर्जनों गांवों का आवागमन अवरुद्ध

बाढ़ का पानी आने से बेनीपट्टी प्रखंड क्षेत्र के पश्चिमी भू-भाग के शिवनगर व फुलवरिया के बीच निर्माणाधीन उच्चस्तरीय पुल का डायवर्सन एवं सोइली से गुलरियाटोल व करहरा जानेवाली सड़क का डायवर्सन डूब गया है। इन डायवर्सन के बाढ़ के पानी में डूबने से दर्जनों गांवों का सड़क संपर्क अवरुद्ध हो गया है। माधोपुर के निर्माणाधीन पुल के डायवर्सन एवं सोइली से गुलरियाटोल व करहरा जानेवाली सड़क के डायवर्सन पर करीब 3 फीट बाढ़ के पानी का बहाव हो रहा है। अति बाढ़ प्रभावित इन क्षेत्रों के ग्रामीणों ने बताया कि यदि नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का सिलसिला इसी प्रकार जारी रहा तो इन डायवर्सन पर बिना नाव के परिचालन के लोगों के द्वारा आवागमन करना संभव नहीं हो सकता है।

इन डायवर्सन पर बड़े वाहनों का परिचालन तो बाढ़ का पानी बहने के साथ ही बंद हो गया है। परंतु, पांव-पैदल, साइकिल, बाइक व ऑटो वालों को जान हथेली पर रखकर मंगलवार को आवागमन करते हुए देखा गया। वहीं बेनीपट्टी-मधवापुर पीडब्लूडी मुख्य पथ के उच्चैठ व मलहा मोड़ के मध्य पिछले करीब पांच वर्षों से निर्माणाधीन पुल का डायवर्सन फिलहाल डूबा तो नहीं है परंतु, अब बाढ़ के पानी में डूब जाने की पूरी संभावना है।

कमला में तेज गति से हो रहा कटाव

मंगलवार की दोपहर बाद प्रखंड क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र भकुआ पंचायत के बलुआ टोल में कमला नदी की रफ्तार कम हुई। लेकिन नदी के जलस्तर में कमी होने से कटाव की आशंका बढ़ गई है। नदी के किनारे बसे करीब एक हजार से अधिक परिवार के लोग में भय बना हुआ है। कटाव के डर से लोग घर को छोड़कर ऊंचे स्थान के किनारे बैठ कर अपना समय व्यतीत कर रहे हैं। भकुआ पंचायत के बलुआ टोल में नदी से करीब सौ मीटर दूर सड़क पर अपना घर छोड़कर करीब एक दर्जन से अधिक महिला चिंहित थी।

65 वर्षीय मीना देवी रोते हुए बताती है कि बौआ सब साल अहिना होय छय, कुनु तरह स भूखे प्यासे स्कूल सहित कोनो उच्च स्थान में जाकअ नरकीय जीबन जिबैत छिय। रामदेव पासवान,सिकंदर पासवान,रविंद्र पासवान ,विकास कुमार सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि सरकार के द्वारा बाढ़ पूर्व तैयारी के नाम पर महज कागजी घोड़ा दौड़ाया जाता है। उन्होंने बताया कि सुक्की साइफन से भकुआ घाट तक कमला नदी के पूर्वी साइड में रिंग बांध के साथ एक पुल की मांग करते आ रहे हैं। प्रभारी सीओ सतीश कुमार ने बताया कि अंचल क्षेत्र के भकुआ बलुआ टोल, बेलदरही में नदी में कटाव स्थल का निरीक्षण कर कटाव स्थल पर बांस बल्ला व जिओ बैग से रोकने के लिए निर्देशित किया गया है।

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