कार्रवाई:सदर अस्पताल के 4 चिकित्सकों को पोस्टमाॅर्टम करने से इनकार करना पड़ा महंगा, कार्रवाई होगी

मधुबनी2 महीने पहले
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  • अधीक्षक ने संबंधित चिकित्सकों का वेतन अवरुद्ध करते हुए विभागीय कार्रवाई का किया अनुरोध

शव का पोस्टमार्टम करने से इंकार करने पर सदर अस्पताल के 4 चिकित्सकों का वेतन अवरूद्ध करते हुए अनुशासनिक कार्रवाई करने के लिए सदर अस्पताल के अधीक्षक ने सिविल सर्जन डा. सुनील कुमार झा से अनुरोध किया है। सिविल सर्जन डा. सुनील कुमार झा को लिखे पत्र में सदर अस्पताल के अधीक्षक ने कहा है कि 26 सितंबर को अपराह्न लगभग 4:45 बजे औंसी ओपी थाना ओपी की एक महिला का शव पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा गया था। आकस्मिक विभाग में अपने कर्तव्य पर उपस्थित डा. अरशद हुसैन के साथ डा. मुकेश कुमार को आब्जर्वर के रूप में प्रतिनियुक्त कर पोस्टमार्टम करने के लिए निर्देश दिया गया था। लेकिन खेद है कि डा. मुकेश कुमार द्वारा यह कहकर पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया गया कि मजिस्ट्रेट उपलब्ध कराने के बाद ही शव का पोस्टमार्टम करेंगे।

यही बात बार-बार कहने के बाद अपने ड्यूटी से चले गए। जबकि इस पोस्टमार्टम के लिए मजिस्ट्रेट की प्रतिनियुक्ति करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। इससे स्पष्ट होता है कि चिकित्सा पदाधिकारी के द्वारा जानबूझ कर पोस्टमार्टम नहीं करने के लिए अनावश्यक रूप से इस प्रसंग को जटिल बनाकर माहौल को संगीन बना दिया गया है। शव के साथ आए परिजनों के द्वारा ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य प्रशासन को काफी खड़ी खोंटी सुनाई गई जिसके बाद रात्रि 9 बजे अपने रोस्टर पर उपस्थित डा. भवेश कुमार झा को पोस्टमार्टम करने के लिए निर्देश दिया गया। लेकिन उन्होंने ऑब्जर्वर के प्रतिनियुक्ति होने के बाद पोस्टमार्टम की बात कहीं।

अगले दिन जिस चिकित्सक को पोस्टमाॅर्टम करने का दिया था निर्देश, उन्होंने भी काम करने से किया मना

अधीक्षक ने यह भी लिखा है कि अगले दिन 27 सितंबर को ओपीडी में अपने रोस्टर पर उपस्थित चिकित्सक डा. बिनोद कुमार को उक्त शव का पोस्टमार्टम करने के लिए निर्देश दिया गया। लेकिन डा. बिनोद ने यह कहकर पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया कि जब शव 26 सितंबर को आया था तो पूर्व के चिकित्सकों द्वारा पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया। साथ ही, यह भी कहा गया कि मैं पोस्टमार्टम किसी भी हाल में नहीं करूंगा। बाद में सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डा. मिश्र के द्वारा तीन चिकित्सकों की टीम गठित कर पोस्टमार्टम करवाया।

जिसमें दो पुरूष व एक महिला चिकित्सक शामिल थी। अधीक्षक ने यह भी लिखा है कि इस तरह शव के 24 घंटे तक पोस्टमार्टम नहीं किया जाना स्वास्थ्य प्रशासन की विफलता एवं गंभीर चिंता का विषय है। इससे स्पष्ट होता है कि सदर अस्पताल के चिकित्सक अपने पद के गरीमा के प्रति संवेदनशील नहीं हैं। बार-बार इस तहर के आचरण से सदर अस्पताल जैसे अति संवेदनशील संस्थान में कोई भी अप्रिय घटना घट सकती है। अधीक्षक ने सीएस से अनुरोध किया है कि अपने स्तर से सभी संबंधित चिकित्सक पर कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाय। साथ ही, वेतन अवरूद्ध करते हुए विभागीय कार्रवाई संचालित की जाय। जिससे चिकित्सकों पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ सके।

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