टीका जरूर लें:3 दिनों में 43 नए संक्रमित मरीज मिले 42 माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं

मधुबनी8 महीने पहले
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  • जिले में 1.90 लाख से अधिक लोगों काे दी जा चुकी है कोविड-19 की वैक्सीन

जिले में लगातार कोरोना पाॅजिटिव मरीजों की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। आईडीएसपी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार शनिवार को 12 और रविवार को 26 कोरोना पाॅजिटिव जिले में पाए गए तो वहीं सोमवार को पाॅजिटिव मरीजों की रफ्तार पर थोड़ा ब्रेक लगा व पांच नए पाॅजिटिव मरीज पाए गए हैं।

जिले में अलग-अलग प्रखंडों के नए मरीजों की पहचान की गई। इसके साथ ही जिले में एक्टिव संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 93 हो गई इसमें ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग शामिल हैं। सभी पॉजिटिव मरीजों के संपर्क में आए लोगों की पहचान की जा रही है। फिलहाल जिले में 42 माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाया गया है जिसे सोमवार की देर शाम तक बढ़ाया जा सकती है। संक्रमण के चेन को तोड़ने के लिए सभी को कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। बचाव को लेकर प्रत्येक दिन अलग-अलग स्थानों पर जांच का सैंपल लिया जा रहा है। जिले में अब तक 7605 मरीज कोरोना से संक्रमित हुए हैं जिसमें 7509 मरीज स्वस्थ हुए हैं। वर्तमान में 93 मरीज कोरोना से संक्रमित हैं।

जिले में अब तक 1 लाख 90 हजार से अधिक लोगों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है जिसमें 15,976 हेल्थ केयर वर्कर को प्रथम डोज,11666 हेल्थ केयर को सेकंड डोज, 8689 फ्रंटलाइन वर्कर को प्रथम डोज, 3662 फ्रंटलाइन वर्कर को सेकंड डोज, 1,04,299 लोग जो 60 वर्ष से ऊपर के हैं को प्रथम डोज, 4756 को सेकंड डोज तथा 45 से 59 वर्ष के 33278 लोगों को प्रथम डोज और1481 लोगों को सेकंड डोज दिया जा चुका है।

10 अप्रैल को 12515 लोगों को टीका दिया गया जबकि 11 अप्रैल को 8877 लोगों को टीका दिया गया। इधर कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़ने को लेकर सभी कोविड अस्पताल भी एक्टिव मोड में आ गए हैं। जयनगर, झंझारपुर, फुलपरास, बेनीपट्टी, रामपट्टी के साथ साथ सभी आइसोलेशन में सभी को एक्टिव मोड में रहने का निदेश दिया गया है।

मालूम हो कि 31 मई तक सभी स्वास्थ्यकर्मियों व चिकित्सकों का अवकाश रद्द कर दिया गया है। वहीं अब ट्रूनेट जांच करवाने वालों की आरटीपीसीआर जांच दूसरे दिन भी की गई।

सदर अस्पताल में यह व्यवस्था ट्रूनेट की जांच में लगातार बढ़ रहे पाजिटिव मरीजों की संख्या के कारण लागू हुआ है। ऐसे में ट्रूनेट जांच की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा हो गया है।

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