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ग्राउंड रिपोर्ट:बर्री के 50 परिवार 17 दिनों से पॉलीथिन के नीचे, सीओ अब तक कर रहे हैं जांच

मधुबनीएक दिन पहले
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  • शिवनगर-माधोपुर सड़क पर पॉलीथिन टांगकर मवेशियों के साथ बाढ़ पीड़ितों का रहना मजबूरी
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विनाशकारी बाढ़ के पानी के कारण टापू में तब्दील बेनीपट्टी प्रखंड क्षेत्र के पश्चिमी भू-भाग की बर्री पंचायत के बर्री, रजबा, धनुषी, रजघट्टा, फुलबरिया, नवगाछी, माधोपुर, बाजितपुर, सिरबारा आदि गांवों की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। बर्री पंचायत की तकरीबन 25 हजार की आबादी बाढ़ के कहर से जहां पिछले दो सप्ताह के अधिक समय से कराह रही है। संपूर्ण बर्री पंचायत अभी भी बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है और लोगों के लिए पंचायत के गांवों से बाहर जाने-आने का साधन नाव ही है। बर्री पंचायत के फुलबरिया एवं रजघट्टा में अनेकों जगहों पर लंबी-लंबी दूरी में बाढ़ के पानी ने सड़कों को तोड़ दिया है। बर्री पंचायत के खेतों में लगी धान सहित सभी फसलें बाढ़ के पानी में डूबकर बर्बाद हो गई है।

शिवनगर-माधोपुर सड़क पर बर्री पंचायत के रजबा एवं माधोपुर गांव के तकरीबन 50 महादलित परिवार बाढ़ से विस्थापित होकर पिछले दो सप्ताह के अधिक समय से पॉलीथिन टांगकर मवेशियों के साथ शरण लिए हुए हैं। शिवनगर-माधोपुर सड़क पर पिछले 17 दिनों से बाढ़ से विस्थापित होकर शरण लिए बर्री पंचायत के माधोपुर एवं रजबा गांव के योगी सदाय, भोगी सदाय, अवध सदाय, रामसकल सदा, नीरो सदा, बिके सदा, प्रभु सदा, सतन सदा, लालू सदा, प्रदीप सदा, रत्न सदा, प्रबोध सदा, सागर देवी, ललित देवी, रामदुलारी देवी, तेतरी देवी, साबिता देवी, रामगुलाम यादव आदि बताते हैं कि उनलोगों का घर बाढ़ के पानी में डूबकर ध्वस्त व क्षतिग्रस्त हो गया है।

अंचल प्रशासन द्वारा बनाई गई पांच सदस्यीय टीम अभी तक जांच करने नहीं पहुंची

अगर ठनका गिरा तो चली जाएगी कई लोगों की जान

सरकारी व प्रशासनिक स्तर पर सिवाय एक-एक पॉलीथिन सीट को छोड़कर उनलोगों को और कुछ भी नहीं मिला है। किन्हीं प्रशासनिक अधिकारियों ने आकर अब तक उनलोगों का हालचाल पूछना भी मुनासिब नहीं समझा है। जब तेज हवा बहती है और बारिश की बूंदें पड़ती है तो वो लोग पॉलीथिन को उड़ने से बचाने व अपने-अपने सिर को छिपाने के लिए काफी परेशान हो उठते हैं। फिर जब कड़ी धूप उगती है तो गर्मी से उनलोगों की जानें जाती रहती है। वहीं जब आसमान से तेज गर्जनें की आवाज आती है तो वो लोग ठनका गिरने की आशंका में डर के मारे सहम जाते हैं। उनलोगों के समक्ष खाने-पीने के सामानों और पशुचारे की घोर कमी है।

बाढ़ से विस्थापित लोगों में पॉलीथिन का वितरण किया गया है। अंचल के राजस्व कर्मचारी सहित पंचायत स्तरीय अन्य कर्मचारियों की टीम जांच के लिए बनाई गई है। जांचोपरांत बाढ़ पीड़ितों व विस्थापितों को सरकारी सहायता दिया जाएगा।
प्रमोद कुमार सिंह, सीओ

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