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बाढ़ का कहर:मधवापुर में अधवारा समूह की नदियों में आई बाढ़ और बारिश के पानी से 50 हजार लोग घरों में कैद

मधुबनी7 दिन पहले
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  • एक महीने से लोगों के घर-आंगन व सड़कों पर बह रहा बाढ़ का पानी, अंचल प्रशासन मौन
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मुख्यालय स्थित प्रखंड सह अंचल एवं थाना परिसर में बाढ़ का पानी इस बार नहीं घुसा है। जिसके कारण स्थानीय प्रशासन की नजरों में इस बार कहीं भी प्रखंड क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति नहीं है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके इतर है। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण के बीच भारी वर्षापात एवं बाढ़ के कारण वैसे तो संपूर्ण प्रखंड क्षेत्र के लोग कई तरह की मुसीबतों से तबाह पिछले एक महीने से तबाह हैं। लेकिन,अधवारा समूह की धौंस एवं रातो नदी किनारे बसे दर्जन भर गांव के लोग इस बार की बाढ़ और वर्षापात से पिछले एक महीने से खासे तंग व तबाह होकर जलालत भरी जिंदगी जीने को विवश हैं। करीब 50 हजार लोग घरों में कैद है। वर्षापात एवं बाढ़ के पानी से कई पंचायत के कई गांव चारों तरफ से घिरे हुए हैं।

लोगों के घर आंगन, दरवाजे पर पानी घुसा ही हुआ नहीं है। बल्कि, एक महीने से जल जमाव की स्थिति बनी हुई है। कई परिवार विस्थापन की जिंदगी जीने को विवश हैं तो कई इसी पानी के बीच रहकर अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। आधा दर्जन सड़कों पर एक महीने से बाढ़ का पानी बहने से दो दर्जन से अधिक गांव के हजारों लोग रोजमर्रे की वस्तु खरीदने, इलाज कराने के लिए कई तरह की फजिहतें झेलते हुए कोई घुटने भर तो कोई कमर व छाती भर पानी हेलकर मुख्य पथ या बाजार तक पहुंच पा रहे हैं। पानी हेलकर जाना आना, इन कीचड़ और उबड़ खाबड़ सड़कों में गिरकर चोटिल होना इनकी किस्मत बन गयी है। लेकिन, इन तमाम फजीहतों के बावजूद, स्थानीय प्रशासन, विधायक एवं सांसद इन लोगों की परेशानी जानने एवं समाधान करने की बात तो दूर रही कोई खोज खबर लेना भी मुनासिब नहीं समझा रहे हैं।

कोई अधिकारी फोन तक रिसिव नहीं करता
स्थानीय जनता एवं पंचायत प्रतिनिधियों की मानें तो नीचे से ऊपर तक के कोई अधिकारी फोन तक रिसीव नहीं कर रहे हैं। जबकि,जैसे जैसे जल जमाव की अवधि बढ़ती जा रही पानी के शिकार हुए गांव मोहल्ले के लोगों की परेशानियां घटने की बजाय दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। इस सबके बावजूद, इन हजारों पीड़ितों के दुख दर्द बांटने की बात तो दूर रही कोई जख्म पर मरहम लगाने को कोई तैयार नहीं हैं। नदियों में आने वाली बाढ़ की कहानी भी अजीब है न कम है और ना अधिक।प्रलयंकारी बाढ़ के बाद ही कुंभकर्णी निंद्रा से पदाधिकारी जगते हैं। लेकिन, इस बार की बाढ़ तो उन ग्रामीणों के लिए प्रलयंकारी से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। क्योंकि,पहले एक से दो दिन में बाढ़ का जख्म बंद हो जाता था। अबकी यह रुकने का नाम नहीं ले रहा।

यहां बहता है पानी
एसएच 75 से भौगाछी जाने वाली सड़क पर, एसएच-75 उत्तरा चौक से पिहबाड़ा, सोबरौली, करहुआं गोट,करहुआंघाट, एसएच 75 बैंगरा से तरैया भाया अवारी, पतार जाने वाली पीएम सड़क पर डामु गाछी के समीप,इस चौक से उच्चैठ जाने वाली आरईओ पथ पर मिनती, रतौली एवं पोखरौनी में, वहीं नदी के उसपार अंदौली पररी पथ में, पररी पतार पथ में कई जगह लंबी दूरी में सड़क टूट गयी है और बाढ़ का पानी बह रहा है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों के आने जाने का हाल क्या होगा।

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