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आफत की बाढ़:कोसी, भूतही बलान और कमला बलान में 17 दिनों बाद फिर अाई बाढ़, मधेपुर में 30 हजार लाेग प्रभावित

मधुबनी14 दिन पहले
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कबछुआ गांव के निकट लचका पुल पर बह रहा बाढ़ का पानी। पुल के जलमग्न होने के बाद लोग जान को जोखिम में डालकर जा रहे हैं, क्योंकि प्रशासन ने नाव की व्यवस्था नहीं की है। - Dainik Bhaskar
कबछुआ गांव के निकट लचका पुल पर बह रहा बाढ़ का पानी। पुल के जलमग्न होने के बाद लोग जान को जोखिम में डालकर जा रहे हैं, क्योंकि प्रशासन ने नाव की व्यवस्था नहीं की है।
  • कमला बलान नदी के किनारे स्थित रजौर, दर्जिया, रहिका, नवटोलिया और बैद्यनाथपुर गांव पानी से घिरे, लोगों का पलायन शुरू

एहि नदी के याह व्यवहार, खोलू धरिया उतरू पार... पौनी गांव निवासी संत जीबछ दास ने बाढ़ के पानी को कबछुआ गांव के निकट पार करते समय ये बातें कही। वे कबछुआ गांव होते हुए एक संत भंडारा में भाग लेने धावघाट गांव की ओर जा रहे थे। कबछुआ और बिसनपुर गांव के बीच मुख्य सड़क पर बने लचका पुल के ऊपर से भूतही बलान नदी का पानी वेग के साथ बह रहा था। वहां लोग कपड़ा खोलकर हाथ में लेकर पानी को पार कर रहे थे। पुल के ऊपर से दो फीट पानी का बहाव हो रहा था। लेकिन वेग इतना तेज था कि आमतौर पर पानी में उतरने का साहस लोग नहीं जुटा पा रहे थे। रामभजन दास ने बताया कि भूतही बलान नदी में कब बाढ़ आ जाती है और कब सूख जाती है, इसका कोई ठिकाना नहीं रहता है।

उन्होंने बताया कि बाढ़ आने के अगले 24 घंटे बाद निचले भू-भाग को छोड़कर बाढ़ का पानी निकल भी जाता है। इससे फसलों को काफी क्षति पहुंचती है। भूतही बलान नदी की बाढ़ से मटरस, बिसनपुर, कबछुआ, श्रीपुर, गोरियारी, पचमनियां, चटनमा, करहारा पूर्वी, ललबाराही, भगता, लाहवन सहित एक दर्जन गांव घिरा हुआ है। प्रखंड क्षेत्र की लगभग 30 हजार की आबादी बाढ़ से एकबार फिर घिर चुकी है। इन गांवों में सड़क संपर्क एक बार फिर भंग हो चुका है। गांव से बाहर निकलने का एकमात्र सहारा नाव बना हुआ है। जबकि प्रभावित क्षेत्रों में नाव की घोर किल्लत है।

3 जुलाई काे भूतही बलान में पहली बार आई थी बाढ़

घनश्याम यादव ने बताया कि इससे पहले भूतही बलान नदी में 3 जुलाई को बाढ़ आई थी। दो-तीन दिन के बाद बाढ़ का पानी निकल गया जिसके बाद कोसों दूर से धान का बिचड़ा लाकर पंपिंग सेट की मदद से धान की खेती की गई थी लेकिन धान की फसल इस बाढ़ में डूब गई है। इसी तरह कमला बलान नदी के किनारे अवस्थित रजौर, दर्जिया, रहिका, नवटोलिया और बैद्यनाथपुर गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। ग्रामीण सड़कें डूबी हुई है।

सीओ ने कहा : एसडीआरएफ टीम और प्रशिक्षित गोताखोर अलर्ट हैं

बीरपुर कोसी बराज से मंगलवार शाम कोसी नदी में इस वर्ष का सर्वाधिक 2 लाख 35 हजार 975 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से प्रखंड के गढ़गांव, भवानीपुर, गोबरगढ़ा, गेवाल, मेनाही, परियाही, असुरगढ़, लुचबनी, बक्साटोल, बसीपट्टी पूर्वी भाग में पानी फैल गया है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ईंधन चलित निजी नाव ही आवागमन का साधन बना हुआ है। सीओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि नदियों के जलस्तर में वृद्धि जारी है। नावों का परिचालन करवाया जा रहा है। विकट स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ अाैर प्रशिक्षित गोताखोरों को अलर्ट माेड पर रखा गया है।

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