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कार्ययाेजना:कालाजार उन्मूलन के लिए चलाया जा रहा अभियान, छिड़काव शुरू किया गया

मधुबनी11 दिन पहले
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  • 8 दिसंबर तक हाेगा छिड़काव कार्य, हर दिन 60-65 घरों में हाेगा छिड़काव

जिले में कालाजार उन्मूलन को लेकर सिंथेटिक पायराथाइड का छिड़काव मंगलवार से शुरू कर दिया गया है। इस क्रम में सभी 21 प्रखंडों में छिड़काव का कार्य किया जा रहा है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डाॅ. एसपी सिंह ने बताया कि 15 सितंबर से 8 दिसंबर तक चिन्हित करीब 114 गांव मे छिड़काव के लिए आदेश दिया गया है। इसके तहत कर्मियों को रोजाना कम से कम 60-65 घरों में छिड़काव करने को कहा गया है। इसमें एक भी घर नहीं छूटे इसका ख्याल रखने को कहा गया है। इस काम में आशा, फैसिलिटेटर व प्रखंड स्तर के कर्मियों व अधिकारियों को शामिल किया गया है। इसके सही क्रियान्वयन को लेकर सबंधित कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया है। खासकर कोरोना को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

इसके तहत कोरोना प्रोटोकॉल का अनुपालन करने की बात कर्मियों को बताई गई है। बताया कि कालाजार की वाहक बालू मक्खी को खत्म करने तथा कालाजार के प्रसार को कम करने के लिए इंडोर रेसीडूअल स्प्रे (आईआरएस) किया जाता है। यह छिड़काव घर के अंदर दीवारों पर छह फीट की ऊंचाई तक होती है। कहा कि लोगों को प्रत्येक घर में छिड़काव कराना चाहिए। चाहे वह पूजा घर हो, बाथरूम हो या मवेशियों का स्थान। सभी जगहों पर छिड़काव कराने से कालाजार संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। छिड़काव के दो घंटे बाद घर में प्रवेश करना चाहिये। साथ ही छिड़काव के छह महीने तक घर मे पेंटिग नहीं करानी चाहिए। इसे लेकर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर एसपी सिंह ने बताया कि जिले के सभी 21 प्रखंडों के 114 गांवों में, 151380 घरों में, 383474 कमरों में और 759726 प्रभावित लोगों के बीच छिड़काव किया जाएगा जिसके लिए 6990 सिंथेटिक पायराथाइड की आवश्यकता है।

मास्क का प्रयोग करने की दी जा रही है सलाह
जिले में छिड़काव काम में लगे कर्मियों को कोरोना संक्रमण के मद्देनजर विशेष सावधानी बरतने की सलाह डॉ. एस पी सिंह ने दी है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घरों में छिड़काव के दौरान कर्मियों को मास्क पहनने की हिदायत दी गई है। इस दौरान संक्रमण से दूर रहने के लिए खास सावधानी बरतने की भी बात कही गई है। कर्मियों को संक्रमण से बचाने के लिए हाथ को साफ करने को कहा गया है। इसके लिए मास्क व सेनेटाइजर कर्मियों को उपलब्ध करा दिया गया है।

इस तरह से फैलता है कालाजार
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार नीरज कुमार सिंह ने कहा कि कालाजार एक संक्रमण बीमारी है जो परजीवी लिस्मैनिया डोनोवानी के कारण होता है। यह एक वेक्टर जनित रोग भी है। इस बीमारी का असर शरीर पर धीरे-धीरे पड़ता है। कालाजार परजीवी बालू मक्खी के जरिये फैलता है जो कम रोशनी वाली और नम जगहों जैसे कि मिट्टी की दीवारों की दरारों और चूहे के बिलों तथा नम मिट्टी में रहती है। बालू मक्खी यही संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलाती है। इस रोग से ग्रस्त मरीज खासकर गोरे व्यक्तियों के हाथ, पैर, पेट और चेहरे का रंग भूरा हो जाता है। इसी से इसका नाम कालाजार यानी काला बुखार पड़ा। कालाजार के लक्षण की जानकारी देते हुए कहा कि रुक-रुक कर बुखार आना, भूख कम लगना, शरीर में पीलापन और वजन घटना, तिल्ली और लीवर का आकार बढ़ना, त्वचा सूखी, पतली होना और बाल झड़ना असादि कालाजार के मुख्य लक्षण हैं। इससे पीड़ित होने पर शरीर में तेजी से खून की कमी होने लगती है।

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