पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

लचर व्यवस्था:80 हजार की लागत से भगता घाट पर बना चचरी पुल बहा, लाेगाें को आने-जाने में होगी परेशानी

मधुबनी22 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
लौकहा में बांस-बल्ला लगाकर सड़क को बंद करते ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
लौकहा में बांस-बल्ला लगाकर सड़क को बंद करते ग्रामीण।
  • मरीजों को अस्पताल ले जाने सहित काम से बाजार जाने के लिए तय करनी होगी लंबी दूरी

यास तूफान के कारण हुई अतिवृष्टि से प्रखंड मुख्यालय से कोसी दियारा क्षेत्र की एक बड़ी आबादी का सड़क संपर्क शनिवार की सुबह से भंग हो गया है। सुगम यातायात के लिए कोसी, भूतही बलान तथा तिलयुगा नदी पर जनसहयोग से बनाई गई चचरी पुल नदियों में रातों रात आई ऊफान के कारण पानी की तेज धारा के साथ बह गई। तिलयुगा एवं भूतही बलान नदी के भगता घाट, लाहवन घाट, चटनमा-बड़ियरबा घाट और कोसी नदी के बकुआ घाट पर निर्मित चचरी पुल क्षतिग्रस्त हो गई है जिससे डारह और बकुआ पंचायत के लोगों का पंचायत मुख्यालय से भी सड़क संपर्क भंग हो चुका है। भगता, लाहवन, बसीपट्टी, नोनीयारी, गढ़गांव, भवानीपुर, गोबरगढ़ा, असुरगढ़, बकुआ सहित दर्जन भर गांवों का प्रखंड मुख्यालय से सीधा सड़क संपर्क भंग हो गया है।

इन गांवों की लगभग 30 हजार की आबादी गांव में कैद होकर रह गई है। बसीपट्टी गांव निवासी प्रखंड प्रमुख लक्ष्मी देवी ने बताया कि भगता घाट पर चचरी पुल टूट जाने के कारण किसी भी विकट स्थिति में स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। मरीजों को अस्पताल ले जाने और आवश्यक कार्यों से बाजार जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। बसीपट्टी पंचायत के पूर्व मुखिया लालेश्वर प्रसाद सिंह ने बताया कि मधेपुर जाने के लिए अब 30 किलोमीटर की अधिक दूरी तय कर सुपौल जिला क्षेत्र से जाना पड़ेगा। चचरी पुल रहने से किसी भी आपात स्थिति में 15 मिनट में मधेपुर पहुंचा जा सकता था लेकिन अब दो घंटे का सफर तय करना पड़ेगा।

पुल के बहने से भगता, लाहवन, बसीपट्टी, नोनीयारी आदि गांव के 30 हजार लाेग प्रभावित हुए हैं

सरकारी नाव भी तेज धारा में बह गई
भगता घाट के नाविक रामबिलास साफी और मो. अलाउद्दीन ने बताया कि चचरी के साथ-साथ घाट पर बांध कर रखी गई सरकारी नाव भी पानी की तेज धारा में शुक्रवार रात बह गई। इस कारण शनिवार की सुबह से इस मार्ग पर यातायात पूर्णत: बाधित हो गया है। वहीं, बकुआ गांव निवासी परमेश्वर यादव ने बताया कि चचरी पुल के क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण अब एकमात्र नाव का ही सहारा है।

सीओ ने कहा : आवागमन के लिए नाव की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है

भगता गांव निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद मुखिया ने बताया कि बसीपट्टी, गढ़गांव और डारह पंचायत की आबादी को प्रखंड मुख्यालय से जोड़ने के लिए नवंबर महीने में भगता घाट पर चचरी पुल का निर्माण करवाया गया था। जनसहयोग से बांस जमा की गई और लगभग 80 हजार रुपए खर्च कर तिलयुगा नदी पर चचरी पुल का निर्माण करवाया गया था। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष नवंबर-दिसंबर महीने में यहां पर जनसहयोग से चचरी पुल का निर्माण करवाया जाता है। बरसात के महीने में नदी में बाढ़ आने पर प्रतिवर्ष चचरी पुल क्षतिग्रस्त हो जाती है।

साल के 6 महीने तक चचरी पुल के सहारे तो शेष 6 महीने नाव के सहारे लोग नदी पार करते हैं। उल्लेखनीय है कि फुलपरास की पूर्व विधायक गुलजार देवी द्वारा भगता घाट पर पुल निर्माण की अनुशंसा की गई थी। लेकिन अद्यतन इस दिशा में धरातल पर कोई कार्य नहीं किया गया है। वहीं बकुआ घाट पर पुल निर्माण का कार्य पिछले चार सालों से मंथर गति से चल रहा है। मधेपुर सीओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि भगता घाट पर यातायात व्यवस्था बहाल करने के लिए नाव की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि पानी की तेज धारा में बह गई नाव को खोजने का निर्देश नाविक को दिया गया है।

बांस-बल्ला लगा सड़क काे लोगों ने बंद किया

प्रखंड परिक्षेत्र में यास तूफान के साथ चार दिनों तक हुई बारिश ने जलनिकासी की व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। खुटौना, लौकहा सहित अधिकांश क्षेत्रों में मुख्य सड़क से लेकर गली मोहल्ले की सड़कों पर जलजमाव की समस्या उत्पन्न हो गई है। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़कें पानी-पानी हो गई है। लौकहा बंगाली टोल की सड़क पर जमा पानी लोगों के घरों में प्रवेश कर गया। सड़क पर घुटना से अधिक पानी जमा रहा। 48 घंटे से अधिक समय होने के बाद भी सड़क पर पानी जमा होने के कारण आक्रोशित ग्रामीणों ने बांस-बल्ला लगाकर घेराबंदी कर दी। हालांकि क्षेत्रीय विधायक भरत भूषण मंडल, मिंटू शाहजादा आदि ने आक्रोशित लोगों को मुख्य सड़क से पानी हटवानेे का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद लोगों ने खबर लिखे जाने तक बांस-बल्ला नहीं हटाया है।

खबरें और भी हैं...