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आक्रोश:तबीयत बिगड़ने पर रामपट्‌टी कोविड केयर सेंटर से डीएमसीएच रेफर किया, अस्पताल प्रबंधन ने नहीं किया एडमिट, ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण जीएनएम की हुई मौत

मधुबनी7 दिन पहले
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स्वास्थ्यकर्मियों को समझाते सिविल सर्जन व सदर एसडीओ। - Dainik Bhaskar
स्वास्थ्यकर्मियों को समझाते सिविल सर्जन व सदर एसडीओ।
  • स्वास्थ्यकर्मियों ने कहा- पांच माह की गर्भवती थी अर्चना, शव के सदर अस्पताल पहुंचते ही कार्य का किया बहिष्कार, ओपीडी सेवा पूरी तरह ठप रही

कोरोना संक्रमण से सदर अस्पताल के लेबर रूम में कार्यरत जीएनएम अर्चना कुमारी की मौत हो गई। वह रामपट्टी कोविड केयर सेंटर में भर्ती थी जहां से उनको डीएमसीएच रेफर कर दिया गया। स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि डीएमसीएच प्रबंधन द्वारा भी उनको एडमिट नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें निजी अस्पताल भी भर्ती नहीं कर रहे थे जिसके बाद एंबुलेंस में ही उनकी मृत्यु हो गई। मिली जानकारी के अनुसार रात करीब डेढ़ बजे उन्हें रेफर किया गया था। उनका आॅक्सीजन लेवल 48 तक पहुंच गया था व डीएमसीएच व निजी अस्पताल में भर्ती नहीं लेने के कारण उनकी मौत हो गई। अर्चना पांच माह की गर्भवती भी थी। सुबह एंबुलेंस से सदर अस्पताल शव पहुंचते ही स्वास्थ्यकर्मियों का रो-रोकर बुरा हाल था। वह 2017 से सदर अस्पताल के लेबर रूम में कार्यरत थी।

उनके निधन पर ओपीडी सेवा पूरी तरह बंद रही हालांकि इमरजेंसी सेवा चालू थी। इधर शव के सदर अस्पताल परिसर में पहुंचते ही स्वास्थ्यकर्मियों का आक्रोश भी बढ़ गया। लोगों ने कहा कि हम स्वास्थ्य कर्मियों को कहीं एडमिट नहीं किया जा रहा है, जबकि हमलोग अपने जान पर खेलकर लोगों की सेवा कर रहे हैं। इनलोगों का कहना है कि पीपीई किट तो दूर की बात है, हमें तो मास्क भी अपने पैसे से खरीदना पड़ रहा है। साथ ही बताया कि 90 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी पाॅजिटिव पाए गए हैं। स्वास्थ्यकर्मियों ने मांग की कि स्वास्थ्यकर्मियों के लिए कम से कम कोविड अस्पतालों में 10 बेड रखी जाए व वेंटिलेटर, आॅक्सीजन व रेमडेसिविर इंजेक्शन की भी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

अधिकारियों के मनाने पर शांत हुए स्वास्थ्यकर्मी

इधर स्वास्थ्यकर्मी अपनी मांगों को लेकर बड़े अधिकारियों के आने और मांगों पर अमल करने की मांग कर रहे थे। इसके बाद डीसीएलआर, सदर एसडीओ अभिषेक रंजन व सिविल सर्जन डाॅ. सुनील कुमार झा के समझाने व उनकी मांगों को पूरा करने संबंधी आश्वासन देने पर सभी काम पर लौटे। वहीं, लेबर रूम के कर्मियों ने भी पिछले वर्ष की प्रोत्साहन राशि देने की मांग की। इन लोगों का कहना है कि जब स्थापना व सीएस कार्यालय के कर्मियों को प्रोत्साहन राशि दी गई तो हमें क्यों नहीं। इस पर सदर एसडीओ अभिषेक रंजन ने आश्वासन दिया कि जो भी नियमानुसार भुगतान संबंधी कार्य होगा उसे शीघ्र कर दिया जाएगा। सिविल सर्जन डाॅ. सुनील कुमार झा ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पांच बेड रखा जा रहा है। साथ ही जो अन्य समस्याएं है उसे शीघ्र दूर कर लिया जाएगा। इसके लिए अस्पताल प्रबंधक को निर्देश दे दिया गया है। ​​​​​​​

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