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बाढ़ का असर:नेपाल में भारी बारिश के कारण अधवारा समूह की नदियों में फिर आई उफान, धौंस नदी के टूटे तटबंधों से पानी के बहाव में आ गई तेजी

मधुबनी11 दिन पहले
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  • लगातार तीन दिनों से नेपाल में हो रही बारिश, भूतनाथ मंदिर के समीप पानी चौर लगा फैलने, लोग रात में जाग कर रहे हैं निगरानी

मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक नेपाल के जल ग्रहण क्षेत्र सहित प्रखंड क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से रुक रुककर मूसलाधार एवं झमाझम बारिश हुई है। इस दौरान कभी भी धूप नहीं खिली बल्कि, हमेशा आसमान में काले बादल छाए रहे। जिसके कारण गांव की गलियों से मुख्य सड़क तक एवं खेत, खलिहान, नहर नाले सभी पानी पानी हो गया है। वहीं,अधवारा समूह की धौस, यमुनी, सिमरा, रातो, मरहा नदियों के जल स्तर में काफी वृद्धि हो गई है और एक बार फिर इन नदियों में पुनः बाढ़ आ गई है।

साथ ही धौस एवं रातो नदी के टूटे तटबंधों एवं लो लैंड वाले स्थलों से बाढ़ का पानी नदी से बाहर निकल कर खेतों एवं सड़कों पर फैलने लगा है। गत 9 जुलाई के बाद लगातार छह बार इन नदियों में बाढ़ आई है। पूर्ण रूप से बाढ़ का अंत ही नहीं हुआ है। इन नदियों में हर एक दो दिन के बाद बाढ़ के पानी बढ़कर बाहर निकलने और घटने का सिलसिला जारी है। एक महीने से यह रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। जिसके कारण धौस, यमुनी एवं रातो नदी किनारे बसे ग्रामीणों सहित प्रखंड क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांवों के हजारों लोग एक महीने से रतजग्गा करने को विवश हैं।

हालांकि,अभी इस पानी से सीधे तौर पर कोई गांव या मुख्य सड़क के हताहत होने की स्थिति नहीं आयी है। लेकिन, जिस तरह से अधवारा समूह की नदियों में बाढ़ को ले लुका छिपी का खेल जारी है। इससे,लोगों के दिलों दिमाग में चिंता की लकीरें बढ़ने लगी है। दो तीन बार घर आंगन में घुसे पानी से लोगों ने राहत की सांस भी नहीं ली है कि बाढ़ का सिलसिला जारी है।कई तरह की अनहोनी की चिंताएं लोगों को सताने लगी है। दर्जनों परिवार के सैकड़ों लोग बेघर होकर विस्थापित जीवन जी रहे हैं।सैकड़ों लोग पानी के बीच जलालत भरी जिंदगी जीने को विवश हैं।

लेकिन, प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगा। किसी ने इन डूबती जनता की जख्म पर राहत का मरहम लगाना तो दूर की बात हुयी। ढाढ़स बंधाना भी मुनासिब नहीं समझा। बलवा में एपीएचसी के समीप,साहरघाट में कोसी नहर के नजदीक, भौगाछी में पिहबाड़ा में, सोबरौली में एवं अंदौली में अवारी भूतनाथ मंदिर के समीप बाढ़ का पानी बाहर पूर्व की तरह टूटे तटबंधों से कम मात्रा में बीती देर शाम से ही निकलकर चौर में फैलने लगा है ।हालांकि,इसकी गति अभी काफी धीमी है। लेकिन, बलवा से साहर जाने वाली कच्ची सड़क पर होते हुए एनएच 104 के ह्यूम पाइप से निकल रहा है।

बलवा, साहरघाट, भौगाछी, पिहबाड़ा, सोबरौली और अंदौली में टूटे तटबंधों से निकल रहा धीमी गति से पानी, लोगों का पलायन शुरू

तीन दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा
वहीं, साहरघाट कोसी नहर में एवं भौगाछी जाने वाली सड़क तथा चौर में फैलने लगा है। यही स्थिति पिहबाड़ा, सोबरौली धोबी टोल एवं अंदौली भूतनाथ मंदिर के समीप है। पिछले सप्ताह आयी बाढ़ से इन गांव के हजारों लोग अभी उबड़ भी नहीं पाए थे कि पुनः बाढ़ ने दस्तक दे दिया। जिससे नदी किनारे सहित प्रखंड क्षेत्र के करीब तीन दर्जन गांवों पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। इस भारी वर्षापात में दर्जनों कच्चे एवं पक्के मकान बुरी तरह दरक कर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं, करीब छह दर्जन परिवार विस्थापित हो गए हैं।

जो, गांव एवं पंचायत के स्कूलों में आज भी शरण लिए हुए हैं। जबकि, साहर उत्तरी, साहर लालू नगर, दक्षिणी के महादलित बस्ती, पिहबाड़ा के वार्ड संख्या 1, 2, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 13, 14 बुरी तरह बारिश एवं बाढ़ के पानी से पिछले सप्ताह से घिरा हुआ है। इसी तरह उत्तरा के मिनती, रतौली, सलेमपुर के डुमरा, पोखरौनी, तरैया के पररी, तरैया, पतार, एवं पिरोखर पंचायत के सुजातपुर एवं पिरोखर गांव के कई मोहल्ले वर्षा के पानी से बुरी तरह घिरा हुआ है। लोगों के घर आंगन में जलजमाव की स्थिति बनी हुई है। लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है।
नहीं हो रहा कहीं दवा का छिड़काव
जलजमाव के बाद आबादी के बीच पानी में कचरा से सड़ने बदबू उठने लगी है। इन इलाके के लोगों को वैश्विक महामारी के बीच कई तरह के संक्रामक बीमारी फैलने की आशंकाएं है। लेकिन, अबतक इन गांवों में न तो ब्लिचिंग पाउडर एवं चुना का छिड़काव कराया गया है और ना जिंक टेबलेट, हेलोजन की गोली आदि जलजमाव वाले इलाके के चापाकलों में डाला जा रहा है। हालांकि, सीएचसी प्रभारी डॉ. कामेश्वर महतो की मानें तो बाढ़ की पूरी तैयारी स्वास्थ विभाग के पास है।

लेकिन, अनुबंधित कर्मियों के हड़ताल पर रहने और भारी संख्या में स्वास्थ कर्मियों के पॉजिटिव आने के कारण इसे आशा कार्यकर्ताओं द्वारा संचालित कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 39 स्नेक बाइट, 20 ड्रग बाइट, 4700 ओआरएस पैकेट, 80 जिंक टेबलेट, सात हजार हेलोजन टेबलेट, 120 बोरी ब्लिचिंग पाउडर एवं 216 बोरी चूना पाउडर का स्टॉक उनके पास था। सीएचसी, साहरघाट एवं बैंगरा उप केंद्र को रोस्टर केंद्र बनाकर वितरित किया जा रहा है।

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