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लापरवाही:एक साल बाद भी नरुआर के विस्थापित नहीं लौटे घर आईबी मैदान में 13 जुलाई 2019 से झाेपड़ी में बसेरा

मधुबनी2 महीने पहले
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  • कमला बलान नदी के पश्चिमी व पूर्वी तटबंध के टूटने से गांवों में आई थी बाढ़

एक साल बीत जाने के बाद भी नरूआर के सैकड़ों विस्थापित लोग अपने घर नहीं लौट पाएं हैं। आज भी सभी लोग बारिश व धूप के बीच नरुआर आईबी के मैदान में परिवार वालों के साथ प्लास्टिक से बनज झुग्गी झोपड़ी में जीवन काट रहें हैं। प्रदेश सरकार के आदेश के बाद भी स्थानीय व जिला प्रशासन अभी तक गंभीर नहीं हुआ है। बीते 13 जुलाई 2019 की रात कमला बलान नदी की पश्चिमी व पूर्वी तटबंध के टूटने से नरूआर व गोपलखा समेत कई गांवों में बाढ़ ने कोहराम मच दिया था।

सैकड़ों लोगों आफत की बाढ़ के कारण विस्थापित होकर नरुआर आईबी में परिजन व पशुओं को लेकर पहुंच गए। एक वर्ष से सभी विस्थापितों की जिंदगी जीने को विवश हैं। वह भी कोई स्थाई भवन या मकान में नहीं बल्कि प्लास्टिक से बनी झुग्गी में एक एक दिन गुजार रहें हैं। विस्थापितों ने कहा कि एक वर्ष से अधिक समय बीत गया अपने स्थाई घर नहीं गए हैं। बाढ़ के पानी के कारण गड्ढा हो गया था। हालांकि सरकार ने कुछ स्थानों पर मरम्मत भी किया लेकिन उनकी जमीन पर अभी भी घर बनाने लायक स्थान नहीं बना है। आज भी वह स्थान बहुत नीचे है। विस्थापितों ने बताया कि कुछ दिन तक प्रशासन की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद सभी ने एक साथ मुंह मोड़ लिया। हम सभी को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।

आधे को ही मिली छह हजार की सहायता राशि
विस्थापितों ने बताया कि जब बाढ़ आई तो हम लोग अपना जरूरी सामान लेकर नरुआर स्थित आईबी मैदान पर आए गए। इसके बाद अधिकारी भी आए और उन्होंने तत्काल छह हजार रुपए की सहायता राशि देने बात कही थी। इसके बाद भी अब आधे लोगों की सहायता राशि मिली है। सहायता राशि के लिए कई बार अंचल कार्यालय का चक्कर भी लगाया। इसके अलावा कई एसडीओ और सीओ साहब को ज्ञापन भी दिया गया। लेकिन अब तक आधे लोगों को सहायता राशि नहीं मिली है।
प्रशासन ने नए स्थान पर जमीन का पर्चा भी दिया
विस्थापितों ने बताया कि पुनर्वास के लिए लगातार गुहार लगाने के बाद सीएम के आदेश पर नए स्थान पर बसने के लिए जमीन का पर्चा भी दिया। लेकिन वह स्थान भी बहुत नीचे है। कमला बलान तटबंध का मुआयना करने पहुंचे सीएम नीतीश कुमार से विस्थापित राकेश मंडल ने दर्द सुनाया। जिसपर सीएम पर्चा वाली जमीन को भरने का आदेश दिया। बावजूद जमीन को भरने का कोई पहल शुरू नहीं हुआ है।

एसडीओ बाेले- विभाग को भेजी सूची
एसडीओ शैलेश चौधरी ने कहा जो जमीन बह गया था। उन विस्थापित लोगों का उसे री स्टोर करने के लिए जलसंसाधन विभाग के सूची में है। उसे भरा जाएगा। पर्चा वाली जमीन तो भरने की बात नहीं है।

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