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परेशानी:पानी लगने से किसान अाैर पशुपालकाें की बढ़ी परेशानी, पशुचारे की हो गई है कमी

मधुबनी4 दिन पहले
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प्रखंड के दर्जनभर गांव के लोग गागन नदी से उत्पन्न त्रासदी को प्रतिवर्ष की तरह इसबार भी झेल रहे हैं। गांव से बधार तक विगत डेढ़ महीने से पानी भरा है। किसानों के बिचड़े व आच्छादित धान गल चुके हैं। पशुपालकों की भूसी पानी में बर्बाद हो गई है। खेतों में आच्छादित चारे गल चुके हैं। चारागाहों में पानी भरा है। किसान व पशुपालक मुश्किल के दौर से गजर रहे हैं। इन गांवों में पथलगाढ़ा, दोनवारी, मोतनाजे, जानकीनगर, महुलिया, विषहरिया, कमतौलिया, तेनुआही, मरनैया, महुआ आदि गांव शामिल हैं। खेतों में गागन नदी के पसरा पानी टापू की दिख रहा है। खेत को आबाद करना असंभव हो गया गया है। किसान विपिन यादव, धर्मविजय कुमार, रवीन्द्र कुमार ने बताया कि धान के बिचड़े नहीं बचे हैं।

पशुचारे की भारी कमी हो गई है। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई क्षति का जायजा लेने नहीं पहुंचा है। पशुपालक योगी यादव समेत दर्जनभर लोगों ने बताया की गागन नदी के पानी में पशुचारे गल गए। पशु को चराने की कोई जगह नहीं बची है। पंचायत समिति सदस्य राम कुमार यादव ने कहा है कि इन समस्याओं से प्रशासन को अवगत कराया गया है। किसी ने किसान व पशुपालकों की सुधि नहीं ली है। पदाधिकारी के द्वारा नदी से हुई क्षति के आकलन का प्रयास नहीं किया गया है। सरकारी महकमा इमानदारी से पहल करे, तो समस्या का समाधान संभव है। इस बाबत बीडीओ अखिलेश्वर कुमार ने कहा कि प्रशासन इस समस्या के प्रति संवेदनशील है।

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