विडंबना , कोई नहीं ले रहा खबर / नरूआर के बाढ़ पीड़ित प्लास्टिक के नीचे जिंदगी जीने को मजबूर

Flood victims of Naruar forced to live under plastic
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Flood victims of Naruar forced to live under plastic

दैनिक भास्कर

May 30, 2020, 05:00 AM IST

मधुबनी. सरकार भले  किसी आपदा के समय आम जनमानस के बीच सुरक्षा करने और सभी परेशानियों को दूर करने की एक से एक घोषणा कर देती है। लेकिन समय गुजर जाने के बाद सरकार और इनके अधिकारियों ने विपदा में फंसे लोगों की सभी दुःख और अपनी घोषणा भूल जाते हैं। जिसमें उस वक्त के बाद पीड़ितों के पीड़ा को देखने वाले कोई नहीं होते। फिर उस संकट के दौर में मौजूद अधिकारियों की बीच में ही तबादला हो जाता है। नये अधिकारियों के आने समय दर समय बीतता जाता और समस्या जस का तस रह जाता है। फिर नया कोरोना जैसे आपदा आकर पूर्व के आपदा पीड़ितों की पीड़ा भूल जाते हैं। कोई उस पीड़ा के बीच कराहने वाले व्यक्ति को कोई झांकने वाला तक नहीं मिलता। ऐसी ही हालात इन दिनों कमला नदी तटबंध के टूटने से विस्थापित बाढ़ पीड़ितों की है। जो आज 11 महीने से नरूआर आईबी पर प्लास्टिक के निचे जिंदगी गुजार रहे हैं। वर्ष 2019 के 13 जुलाई की वो काली रात ने नरूआर और गोपलखा के सैकड़ों परिवार के हंसते खेलते हुए जिंदगी को देखते ही देखते कुछ ही मिनटों में चीखने चिल्लाने में जिंदगी में तब्दील हो गया। बाढ़ की चपेट में फंसे लोगों की क्रंदन आवाज ने पत्थर दिल को भी पिघला दिया। तत्कालीन मधुबनी डीएम शीर्षत कपिल अशोक  ने जान पर खेलकर सभी फंसे हुए लोगों को निकालकर नरुआर आईबी पर शरण दिए। करीब एक महीने तक भोजन भी दिया गया। सीएम के द्वारा बाढ़ पीड़ितों को जमीन का पर्चा भी दी गई। लेकिन 11 महीने गुजरने को है। जून में मानसून गिरने बाली है। बाबजूद बाढ़ पीड़ितों को पर्चा वाली जमीन पर प्रशासन नहीं पहुंचाया है। बाढ़ पीड़ितों ने ठंड भरी रात प्लास्टिक के नीचे बिताया। फिलहाल भयानक गर्मी और कोरोना की कहर के बीच उसी प्लास्टिक के नीचे बाढ पीडित विस्थापित लोग अपने नन्हे मुन्हें बाल बच्चों के साथ जीवन बीता रहें हैं।  उन्हें कहीं से कोई आशा की किरण नहीं दिखाई दे रहा है।

बाढ़ पीड़ित कामेश्वर मंडल राकेश मंडल कहते हैं कि सरकार  टूटे हुए बांध भर दिया है। लेकिन हम विस्थापित बाढ़ पीड़ितों को पुनर्वास के लिए अभी तक कोई दूर दूर तक योजना नहीं दिखाई दे रहा है। मई बीतने जा रहा है। जून में मानसून फिर गिरने बाला है। हमारे दुःख दर्द को देखने वाले कोई नहीं है। उक्त पीड़ितों ने सरकार से मानसून गिरने से पहले पुनर्वास की मांग की है।

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