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भारी क्षति हुई है:बारिश के कारण हुए जलजमाव से परमानंदपुर में सैकड़ों एकड़ में लगी फसल डूबी, किसान परेशान

मधुबनी19 दिन पहले
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परमानंदपुर गांव में बारिश के पानी में डूबे खेत। - Dainik Bhaskar
परमानंदपुर गांव में बारिश के पानी में डूबे खेत।
  • फसल डूबने से निराश किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग, हर साल बाढ़ और बारिश से मचती है तबाही

स्थानीय परमानन्दपुर गांव में इन दिनों सैकड़ों एकड़ में लगी फसल बारिश के पानी से डूब गया है। जिसमें परमानन्दपुर, नवानी, सिरखडि़या और सैकड़ों एकड़ खेतों में लगी फसल डूबकर बर्बाद कर हो गया है। वर्षों पूर्व से यहां के किसानों के खेतिहर जमीन नीचे रहने के कारण शुरू में ही खेती कर लेते हैं। लेकिन उसके बावजूद भी प्रत्येक साल बारिश के कारण डूब जाता है। किसानों को एक नही, दो नही बल्कि तीन-तीन बार खेतों में धान रोपाई करनी पड़ती है। यानी उपज और लागत के बराबर भी नहीं आ पाती है। परमानन्दपुर गांव दो नदियों के बीच बसा हुआ है। यहां गेहूंवां, सुपेन और नहर का कहर हर साल किसानों और गांव वालों को झेलना पड़ता है। अभी तो बारिश की पानी है। यदि उक्त दोनों नदियों की पानी फैलता है तो लोगों की काफी परेशानी बढ़ जाती है। परमानन्दपुर गांव के लोग पूर्ण रुप से खेती पर निर्भर रहते हैं। खेती ही इनलोगों का मुख्य पेशा है।  इस गांव के हर दरवाजे पर मवेशियों मिलेंगे। बाढ़ के समय में मवेशियों के चारा का बड़ा समस्या उत्पन्न हो जाते हैं। इतना ही नही पानी फैलने पर गांव में सर्पदंश का खतरा मंडराने लगता है। कई लोग सर्पदंश से मर चुके हैं। गांव की आबादी तीन हजार के आसपास है। गांव में आज भी शिक्षित लोगों की संख्या बहुत कम है। गांव के लोगों को नौकरी नही होने के कारण बेरोजगारी प्रमुख समस्या है। ग्रामीणों में शंभू कुमार राय, दुलारचंद सदाय, डा. ललन सदाय, जितेन्द्र राय, वार्ड सदस्य विजय राय, मिश्रीलाल चौपाल, लखन ठाकुर, विजय मंडल, अनिल मंडल आदि लोगों ने बताया कि गांव में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और जागरूकता के अभाव में परमानन्दपुर उत्थान के बजाय पतन की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उक्त ग्रामीणों ने बताया कि परमानन्दपुर के साथ विकास के मामले में भेदभाव किया जा रहा है।  परमानन्दपुर की अनदेखी बर्दाश्त नही की जाएगी। परमानन्दपुर में आज भी कई परिवार का स्थिति दयनीय है जो जिंदगी से परेशान हैं। दिन-रात खाने के और पहनने को लेकर परेशानी में जी रहे हैं। कुछ गरीब परिवार को समाजिक संगठन के साथ-साथ प्रशासनिक मदद की बेहद जरुरत है।

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