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लक्ष्य पूरा हाेना असंभव:धान अधिप्राप्ति के लिए 30 दिन से भी कम समय बचा, 32 फीसद हुई खरीदी

मधुबनी3 महीने पहले
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  • 1 लाख 5 हजार मीट्रिक टन की अधिप्राप्ति का मिला था लक्ष्य
  • अधिकारी ने कहा: लक्ष्य की बात नहीं करेंगे, पिछले वर्ष से ज्यादा खरीदी होगी

धान अधिप्राप्ति के लिए अब 30 दिन से भी कम का समय बचा है। ऐसे में विभाग की ओर से निर्धारित किए गए लक्ष्य काे प्राप्त करना जिले में चुनाैती बना हुआ है। वतर्मान में जिला लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। मालूम हाे कि जिला को धान अधिप्राप्ति के लिए 1 लाख 5 हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य मिला था जबकि जिले के विभिन्न पैक्स की ओर 31 जनवरी तक 33 हजार 252 एमटी की ही खरीदारी हो सकी है।

यानी बीते दो माह मे जिला अपने लक्ष्य का महज 32 प्रतिशत ही खरीदारी कर सका है। अब सवाल है कि जो काम बीते दो माह में नहीं हो सका, वहां काम पैक्स अध्यक्ष अब 28 दिनों मे कैसे कर सकेंगे। इस संबंध मे जिला सहकारिता पदाधिकारी अमृताश ओझा ने बताया कि मैंने यहां 8 जनवरी से कार्यभार संभाला है।

अपनी ओर से कोशिश में लगा हुआ हूं कि बीते साल की तुलना मे इस साल धान अधिप्राप्ति का कार्य बेहतर हाे। लेकिन लक्ष्य को हासिल करने के सवाल पर वे चुप्पी साधते दिखे। जबकि पैक्स को अभी तक बैंक की ओर से 51 करोड़ रुपए सीसी के रूप मे दिया जा चुका है। पैक्स की ओर से खरीदी गई 33 हजार 252 एमटी धान में से 31 हजार 500 एमटी धान की राशि का भुगतान कर दिया गया है।

किसानों ने कहा : सरकार की नीति ही गलत है

जिले के निम्नवर्गीय किसान इसके लिए सरकार को जिम्मेदार मानती है। किसान सुमन कुमार की मानें तो उनका साफ कहना है कि हम निम्नवर्गीय किसान धान तैयार करने के साथ ही गेंहू की खेती में लग जाते है। ऐसे मे सरकार व पैक्स की ओर से नवंबर या दिसंबर माह में धान खरीदने का फरमान आता है।

यदि हम सरकार या पैक्स के भरोसे रहेगे तो गेंहू की खेती नहीं कर पाएंगे। इसलिए औने-पौने दरों पर धान को बेचने पर मजबूर होते हैं। लागत निकालने की मजबूरी और नए फसल की तैयारी के लिए बस किसी भी तरह से धान को बेचना मजबूरी होता है। सरकार की इस नीति से वास्तविकता में 20 प्रतिशत किसानों को भी लाभ नहीं मिल पाता है। नीति में बदलाव की जरूरत है।

एक क्रय केंद्र होने के कारण लगातार उत्पन्न हो रही समस्या

धान अधिप्राप्ति लक्ष्य के अनुरूप नहीं होने के पीछे कई पैक्स अध्यक्षों ने बताया कि जिले मे 104 चार पैक्स ऐसे है जिनका चुनाव होना है। इन्हें धान अधिप्राप्ति कार्य से दूर रखा गया है। शेष बचे पैक्स में भी कई पैक्स यह कहते हुए धान की अधिप्राप्ति नहीं कर रहे है कि पिछले साल धान की अधिप्राप्ति तो की लेकिन अभी तक कमीशन की राशि नहीं मिली है। इतना ही नहीं हथलन खर्च, भाड़ा, गनी बैग की राशि अभी तक राज्य खाद अधिनियम की ओर से नहीं दी गई है।

इस कारण पैक्स पर अतिरिक्त सूद का अधिभार पड़ गया है। पैक्स की परेशानी इसलिए भी बढ़ जाती हैं कि जिले में एक मात्र सीएमआर क्रय केन्द्र घोघरडीहा में खोला गया है। इस कारण पैक्स का धान 15 दिनों तक ट्रक व ट्रैक्टर पर लदा सेंटर पर खड़ा रहता है। सरकार अगर सही मायने में किसान की हक की बात करती है तो उन्हें पैक्स को लगने वाले 11 प्रतिशत ब्याज को कम कर 0 से 3 प्रतिशत ब्याज पर राशि उपलब्ध करानी चाहिए। साथ ही अन्य राज्यों की तरह यहां के किसानों को भी धान का समर्थन मूल्य 1888 की जगह 2500 रुपए दिया जाए।

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