शारदीय नवरात्र:लाखों श्रद्धालु करते हैं सिद्धपीठ उच्चैठ भगवती की पूजा

मधुबनी9 दिन पहले
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सिद्धपीठ उच्चैठ भगवती की प्रतिमा। - Dainik Bhaskar
सिद्धपीठ उच्चैठ भगवती की प्रतिमा।
  • बेनीपट्टी प्रखंड से 5 किमी दूर थुम्हानी नदी एवं सरोवर के तट पर स्थित है सिद्धपीठ उच्चैठ भगवती मंदिर

बेनीपट्टी प्रखंड व अनुमंडल मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम कोण में पवित्र थुम्हानी नदी एवं सरोवर के तट पर अवस्थित सिद्धपीठ उच्चैठ भगवती रामायण काल से पूर्व की मानी जाती हैं। यह भगवती भक्तों पर दया करनेवाली, चारों पुरुषार्थ अर्थात धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष प्रदान करनेवाली मानी जाती हैं। सालों भर पड़ोसी राष्ट्र नेपाल और बिहार के कोने-कोने से भक्तजन यहां पहुंचकर भगवती की पूजा-अर्चना करते हैं। शारदीय नवरात्र के दौरान लाखों श्रद्धालु भगवती की पूजा करते हैं। सिंह पर सवार वन दुर्गा उच्चैठ भगवती की ढ़ाई फीट की कलात्मक प्रतिमा गदा, चक्र, शंख एवं पद्य धारण की हुई है। भगवती की चरण के बाएं बगल मछली प्रतिमा का प्रतीक और चरण के दाएं बगल नीचे ब्रम्हाजी की प्रतिमा का प्रतीक है।

राजा जनक की यज्ञ भूमि है उच्चैठ

कहा जाता है कि राजा जनक की यज्ञ भूमि उच्चैठ स्थान ही रहा है और उन्हें वरदान भी यहीं से मिला था।राम, लक्ष्मण एवं विश्वामित्र को दुर्गा के दर्शन उच्चैठ भगवती स्थान में ही हुए। नरलीला केलिए उच्चैठ वासिनी ही सीता रूप में थीं। पांचों पांडवों को उच्चैठ भगवती का आशीर्वाद मिला। ब्रह्माजी द्वारा उच्चैठ में सृष्टि की रचना की गई। ब्रह्मा, राम, अर्जून, इंद्र द्वारा यहां शक्ति पूजा की गई थी। कालिदास को ज्ञान की प्राप्ति उच्चैठ भगवती से ही हुआ था। कालिदास के नाम से आज भी एक डीह यहां विद्यमान है। कालिदास डीह पर कुछ वर्षों पूर्व श्रीहनुमान मंदिर की स्थापना की गई थी।

17 वें शक्तिपीठ के रूप में विख्यात है उच्चैठ स्थान

महामाया देवी के संबंध में प्रकाशित कई पुस्तकों में वर्णित तथ्यों के अनुसार, भारत के कुल 51 शक्तिपीठों में उच्चैठ वासिनी 17 वां शक्तिपीठ के रूप में शुमार हैं। उच्चैठ भगवती का प्रभाव सर्वोत्तम एवं सर्वोत्कृष्ट माना जाता है। यह सहज भाव से प्रसन्न होकर मानव मात्र का संकट एवं विपत्ति दूर कर देती हैं। इनकी आराधना सहज और सरल है। परंतु, साधक केलिए मोक्ष प्राप्ति केलिए जटिल व कठिन भी है। अनेकों साधकों को भगवती की पूजा व आराधना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति हुई है। ऐतिहासिक, पौराणिक, धार्मिक व पर्यटन की दृष्टि से सिद्धपीठ उच्चैठ भगवती स्थान जिले में महत्वपूर्ण है।

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