कार्यक्रम:स्वास्थ्य संस्थान की गुणवत्ता प्रमाणित करने के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन

मधुबनीएक महीने पहले
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  • सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक, गायनेकोलॉजिस्ट व अस्पताल प्रबंधक ने लिया हिस्सा

सोमवार को सुमन कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य संस्थान के गुणवत्ता प्रमाणित करने के लिए एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। पटना में आयोजित इस कार्यशाला में सदर अस्पताल के कार्यकारी अधीक्षक डा. देवशंकर मिश्रा, ब्लड बैंक के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा. बिनोद कुमार झा, डा. खुशबू कुमारी, डाॅ. भावना गुरूंग, अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद आदि ने भाग लिया। मालूम हो कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित सुरक्षित मातृत्व आश्वासन सुमन कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सदर अस्पताल को राज्यस्तर से चिह्नित किया गया है।

कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए जिले के प्रभारी अधीक्षक, प्रभारी प्रसव कक्ष, गायनेकोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिक व अस्पताल प्रबंधक को एक दिवसीय राज्यस्तरीय प्रशिक्षण दिया गया। विदित हो कि सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन कार्यक्रम) को केंद्र सरकार द्वारा 10 अक्टूबर 2019 को आरंभ किया गया था। इस योजना के अंतर्गत गर्भवती महिला तथा गर्भस्थ शिशु को विभिन्न प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं। जिससे कि गर्भवती महिलाएं व उनके बच्चों की मृत्यु दर में गिरावट लायी जा सके।

योजना के तहत प्रसव के 6 महीने बाद तक माता और सभी बीमार नवजात शिशु को नि:शुल्क स्वास्थ्य लाभ दिया जाता है। सुमन योजना का उद्देश्य हर महिला और नवजात शिशु को सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधा पर जाने के लिए किसी भी कीमत पर सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना है। सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार झा ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सदर अस्पताल सहित सभी पीएचसी में शिविर लगाकर स्त्री रोग विशेषज्ञ अथवा एमबीबीएस चिकित्सक द्वारा गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की जाती है।

साथ ही, उच्च जोख़िम गर्भधारण महिलाओं की पहचान कर उचित प्रबंधन सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाता है। इसमें उच्च रक्तचाप, वजन, शारीरिक जाँच, मधुमेह, एचआईवी एवं यूरिन के साथ जटिलता के आधार पर अन्य जाँच की जाती है। उच्च जोखिम गर्भधारण महिलाओं को भी चिह्नित किया जाता एवं बेहतर प्रबंधन के लिए दवा के साथ जरूरी परामर्श दी जाती है।सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार झा ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जाँच की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उन्हें बेहतर परामर्श देना है। बेहतर पोषण गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होने से बचाता है।

गर्भावस्था में ये पांच टेस्ट कराना जरूरी, ध्यान देना बेहद जरूरी है

ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, ब्लड प्रेशर, हीमोग्लोबिन, अल्ट्रासाउंड करवाना जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान 4 प्रसव पूर्व जाँच प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं में कमी लाता है। सीएस डा. झा ने बताया कि पूर्व की गर्भावस्था या प्रसव का इतिहास, दो या उससे अधिक बार गर्भपात हुआ हो, बच्चा पेट में मर गया हो या मृत पैदा हुआ हो, प्रसव के दौरान या बाद में अधिक रक्तस्राव हुआ हो, टीबी या मिरगी का होना, पीलिया या लिवर की बीमारी, हाइपोथायराइड से ग्रसित होना आदि उच्च जोखिम गर्भधारण के लक्षण हैं।

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