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कब बदलेगी तस्वीर:कोसी नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से दहशत, गांव के लोगों की 8 महीने चचरी पुल के सहारे ही कटती है जिंदगी

मधेपुर2 महीने पहले
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बरसात शुरू हो गया है। कोसी नदी के जलस्तर में भी वृद्धि होना शुरू हो गया है। जलस्तर में वृद्धि होते देख नदी के तलछटी में बसे गांवों मे रहने वाले हजारों लोगों की समस्या बढ़नी शुरू हो गई है। लोग किसी तरह से बचाव के विकल्प की तलाश में अभी से लग गए हैं। आवागमन को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक रुप से चचरी सहित अन्य प्रकार के उपाय करने में लग गए हैं। सबसे विकट स्थिति प्रखंड के कोसी दियारा क्षेत्र स्थित बसीपट्टी, गढ़गांव व डारह पंचायत के वाशिंदों की है।

इन गांव के लोगों की जिंदगी आठ महीने चचरी पुल के सहारे ही कटती है। जबकि शेष चार महीने यातायात का साधन नाव हुआ करती है। कुरसों से बसीपट्टी जाने वाली पथ में तिलयुगा नदी के भगता घाट पर स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से प्रतिवर्ष चचरी पुल का निर्माण कराया जाता है। ग्रामीण विद्यानंद मुखिया बताते हैं कि एक बार चचरी पुल बनवाने में 300 बांस सहित अन्य सामाग्रियों समेत मजदूरों पर लगभग एक लाख रुपए खर्च होता है। नवंबर से जून तक आठ महीने चचरी पुल का उपयोग करने के बाद बरसात के समय जब नदी में उफान आती है तो चचरी पुल नदी की तेज धारा में बहकर क्षतिग्रस्त हो जाया करती है।

फिर जुलाई से लेकर अक्टूबर महीने तक भगता घाट पर यातायात का साधन नाव ही हुआ करता है। बसीपट्टी, भगता, सलहेसपुर, लाहवन, गढ़गांव, भवानीपुर, गोबरगढ़ा, असुरगढ़, पीरयाही, बक्साटोल, बैद्यनाथपुर सहित अन्य गांवों की लगभग 20 हजार की आबादी इसी चचरी पुल को पार कर प्रखंड मुख्यालय, अस्पताल, थाना, हाट बाजार जाया करती है। इतना ही नहीं बरसात के शुरूआती दिनों में ही इस पथ की स्थिति नारकीय हो जाती है। दूसरी ओर कोसी क्षेत्र के ललबाराही, करहारा सहित अन्य जगहों पर भी आवागमन का सहारा चचरी पुल ही बना हुआ है।
सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव

बसीपट्टी पंचायत की मुखिया सीता देवी कहतीं हैं कि तिलयुगा नदी के भगता घाट पर बना चचरी पुल कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। किसी भी आपात स्थिति में मरीज को चचरी पुल के सहारे नदी पार कर एम्बुलेंस या निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया जाता है। क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। मुखिया ने बताया कि सुगम सड़क यातायात सुविधा उपलब्ध नहीं रहने का प्रतिकूल प्रभाव पंचायत के विकास कार्यों पर भी पड़ता है।

तय करना पड़ता है 35 किमी का सफर : बीडीओ
बीडीओ अर्चना कुमारी ने बताया कि तिलयुगा नदी पर पुल नहीं रहने के कारण 35 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर सुपौल जिला क्षेत्र से होते हुए बसीपट्टी व गढ़गांव पंचायत तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है। कोसी नदी में प्रतिवर्ष आनेवाली प्रलयकारी बाढ़ के कारण सड़कें खंड पखंड हो जाया करती है। आधारभूत संरचनाओं को व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचता है। उन्होंने बताया कि आवश्यकतानुसार नदी घाटों पर अंचल स्तर से नाव परिचालन की व्यवस्था की गई है।

विधायक गुलजार देवी ने बताया कि पथ का निर्माण अनुरक्षण निधि से किया गया है। संवेदक की लापरवाही के कारण सड़क नहीं बन सका है। विधायक ने संवेदक बीएन इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर दिनेश सिंह पर मामले को अनसुनी करने का आरोप लगाया है।

झोपड़ी में चलता कोसी दियारा क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय रामपुरा।

भाड़े के निजी मकान में चल रहा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
भगता गांव निवासी रालोसपा प्रखंड अध्यक्ष विद्यानंद मुखिया कहते हैं कि तिलयुगा नदी के भगता घाट पर 125 फीट लंबा चचरी पुल ग्रामीणों के सहयोग से बनाया गया है। उन्होंने बताया कि चचरी पुल के सहारे नदी पार कर मरीज को बाइक से अस्पताल पहुंचाने में सुविधा होती है। चचरी पुल नहीं रहने से प्रसव व सर्पदंश के मरीज समय से अस्पताल नहीं पहुंच पाते थे और रास्ते में उनकी मौत हो जाती थी। विद्यानंद मुखिया ने बताया कि आजादी के बाद से सांसद और विधायक सिर्फ वोट मांगने के लिए क्षेत्र में आते रहे हैं और चुनाव जीतने के बाद पुल बनवा देने का झूठा आश्वासन देकर चले जाते हैं।

क्षेत्र के अधिकांश विद्यालय फूस की झोपड़ी में संचालित हो रहे हैं। स्कूलों को पक्का भवन तक नसीब नहीं है। बसीपट्टी में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित है जो भाड़े के निजी मकान में स्थापना काल से चल रहा है। जहां नियमित डॉक्टर और इलाज की समूचित व्यवस्था नहीं है।

दीप गांव के वार्ड-11 में सड़क पर लगी कीचड़ से लोगों को होती है परेशानी

अनुमंडल के लखनौर प्रखंड स्थित दीप गांव में एक पक्की सड़क नहीं बनने से वार्ड 11 के लोगो मे काफी आक्रोश है। वार्ड 11 के लोग में वासुदेवमंडल, गंगाराम मंडल, हिरालाल मंडल, लक्ष्मीनाथ झा, मनीष झा, अरहूला देवी, ममता देवी, रंजीत मंडल मिथिलेश मंडल का कहना यह है कि विकल मिश्रा के घर से वासुदेव मंडल के घर होते हुए मुख्य मार्ग को जोड़ती है। इस सड़क से  प्रतिदिन हजारों लोगो का आने-जाने का एक मुख्य सड़क है।

जो घर से निकलने के बाद बस, ट्रेन, हाट, बाजार, अस्पताल समेत अन्य जगहों को जातें हैं। लेकिन हालात सबके सामने में है। स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हो रही है। लेकिन सरकार के द्वारा नली गली योजना से लेकर अन्य विकास योजनाओं में लाखों करोड़ों खर्च कर रही है। यहां पर आपातकालीन अवस्था जैसे अगलगी या एंबुलेंस लाने की जरूरत पर जाए तो सड़क अभाव के कारण ना अग्निशामक वाहन पहुंच पाएगी और ना ही एम्बुलेंस ही आ पाएगी।  

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