पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

संबोधन:लघु और सीमांत किसानों की भागीदारी नगण्य है, पूर्व केंद्रीय मंत्री ने प्रेस को किया संबोधित

मधुबनी14 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • आम आवाम को किसान आंदोलन के जरूरत व स्वरुप पर आत्म चिंतन करना चाहिए

देश में सत्ता प्राप्ति के लिए विपक्ष द्वारा जातीय, क्षेत्रीय, धार्मिक, भाषाई विभेद भड़काया जा रहा है। देश के किसान आंदोलन के नेतृत्व पर वैसे किसानो का कब्जा है जो संपन्न है। सीमांत व लघु किसानों की भागीदारी नगण्य है। सीमांत व लघु किसानो को जो आयकर के दायरे में नही आते है उन्हें उनके खाते में छः हजार रुपये दिये जा रहे है। आम आवाम को किसान आंदोलन के जरूरत व स्वरुप पर आत्म चिंतन करना चाहिए।

आंकड़ों के आधार पर पूर्व केंद्रीय मंत्री हुकुमदेव नारायण यादव ने कहा कि किसान आंदोलन के अधिकांश लोग पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश से है। ये सभी बडे़ व संपन्न किसान है। लधु व सीमांत किसानों के प्रति इनकी कोई संवेदना नही है। किसान आंदोलन चंद मुट्ठीभर संपन्न व आयकर के दायरे में आनेवाले किसानों का आंदोलन है जो राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित है। बिहार में 99.19 प्रतिशत सीमांत किसान है। वहीं कृषि श्रमिक 23.9 प्रतिशत है। हरियाणा में 49.2 प्रतिशत सीमांत किसान है व कृषि मजदूर 16.6 प्रतिशत है। जबकि पंजाब में सीमांत किसान 41.13 प्रतिशत है जबकि कृषि मजदूर 16.2 प्रतिशत है। उपर्युक्त बातें पूर्व केंद्रीय मंत्री हुक्मदेव नारायण यादव ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा। इस दौरान भाजपा के जिलाध्यक्ष सहित अन्य मौजूद रहे।

खबरें और भी हैं...