पहल:पाॅल्ट्री डेवलपमेंट योजना का लाभ अब भी ले सकते हैं बीपीएल के लोग

मधुबनी6 महीने पहले
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जिले में केन्द्र प्रायोजित राष्ट्रीय पशुधन मिशन कार्यक्रम के तहत बैकयार्ड पाॅल्टी डेवलपमेंट योजना जो 2020-21 चलाया गया। इस योजना के तहत जिले के 1150 अनुसूचित जाति के बीपीएल परिवारों को चिन्हित कर उनके बीच 28 दिवसीय चुजा वितरण कार्यक्रम किया जाना था। जिला पशुपालन पदाधिकारी डाॅ. विनोद सिंह ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसुचित जाति के बीपीएल परिवारों को स्वालंबन बनाना व अंडा उत्पादन में बढोतरी करना है। इस योजना के अंतर्गत जिले के विभिन्न प्रखंडों से 1150 की जगह 1235 आवेदकों की ओर से आवेदन दिया गया है।

लेकिन जब मिले आवेदन के बाद ऐसे परिवार को लाभ देने की बात चली तो, लोग पीछे हटने चले लगे। लोगों की उदासीनता के एक कारण यह भी था कि कोरोना बीमारी के बीच तरह तरह की बात से आवेदक पीछे हटने लगे। तो वही कोरोना के कारण अधिक से अधिक लोगों के बीच सरकार की इस योजना का जो प्रचार प्रसार होना चाहिए। वह नहीं हो सका। बावजूद इसके जो आवेदन आया है। इन आवेदकों की आवेदन में वरीयता के हिसाब से योजना के तहत चिन्हित प्रत्येक परिवार को इसका लाभ मिलना था।

जिले में अब तक 1150 की जगह 234 लाभुक ही इस लाभ के लिए चयनित हो सके है। जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताए की इच्छुक लोग अभी भी इस योजना का लाभ ले सकते है। आवेदन चूज पालन का सेड बनाकर 1500 रूपए ले सकते है। साथ ही 10 रूपये प्रति चूजा के हिसाब 45 चूजा देना है और उन परिवार से 450 रूपये लेना है। जिले के सभी प्रखंड के प्रखंड पशु पालन पदाधिकारी, संबंधित क्षेत्र के बीडीओ, मुखिया व विकास मित्र के सहयोग से चूजा वितरण कार्य पुरा करना था।

इसके लिए विकास मित्र को सभी प्रखंड से 60 परिवारों को चिन्हित करना है। इनमें से 50 को इसका लाभ मिलेगा। 20 प्रतिशत से अधिक लोगों को इसके लिए चयनित किया जाना है कि यदि चयनित आवेदकों में से कोई आवेदक समय पर यह लाभ लेने नहीं आए तो उनके जगह पर अतिरिक्त आवेदन कर्ता को यह लाभ दिया जा सके। लेकिन कोरोना की कहर, उपयुक्त प्रचार प्रसार का नहीं होना, साथ ही आवेदक की उदासीन रूची के कारण 1150 की जगह महज अभी तक तकरीबन 250 ही आवेदन चयनित हुआ।

इस योजना के लाभ लेने में महिला को दी गई थी प्राथमिकता
इस योजना के लाभ में महिला को पहली प्राथमिकता दी गई है। इस योजना के अंतर्गत मिलने वाले सभी चुजा टीकाकृत होगा। लाभुकों को मिलने वाला चूजा लेयर बर्ड है। चूजा पालक एक तरह से मिली लेयर पोल्ट्री फार्म का संचालन करेंगे। एक लेयर बर्ड साल में 220 से 260 अंडा देगी। एक साल पूरा होने पर इनमें अंडा देने की क्षमता कम हो जाती हैं। तब मुर्गी पालक इसे मांस में इस्तेमाल कर सकते हैं। 250 अंडा बेचकर लाभुक अच्छी कमाई कर सकते है। बैकयार्ड पोल्ट्री फार्म चलाने में खर्च भी कम आते है। क्योंकि यह लेयर बर्ड अथवा मुर्गी आसपास घूमकर अपने खाने की जुगाड़ कर लेते हैं। जिला पशु पालन पदाधिकारी ने बताया कि योजना का लाभ लेने वाले इच्छुक लोग अब अगले वित्तीय वर्ष मे पंचायत के मुखिया, विकास मित्र या प्रखंड पशु पालन पदाधिकारी से संपर्क कर आवेदन जमा कर सकते हैं ।

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