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मांगी गई दुआएं:महामारी से निजात दिलाने के लिए मांगी गई दुआएं

मधुबनीएक महीने पहले
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रमजान के आखरी जुमा जिसे अलविदा भी कहा जाता है। रमजान के आखरी जुमा को लेकर सुबह से लोग तैयारी में लगे रहते थे। लेकिन लॉगडाउन के कारण दूसरी बार न मस्जिदों मे भीड़ लगी न ईद की बाजार सजी। टोपी से लेकर नए कपड़ों की सैकड़ों दुकाने इन दिनों सुबह ही खुल जाया करती थी। रेडिमेेड की दुकान हो या दर्जी की दुकान सभी भड़े रहते थे। लगभग एक सप्ताह से चल रहे लॉगडाउन में दुकानदारों को उम्मीद थी की इस बार ईद आजादी के साथ सबके साथ मनाने का मौका मिलेगा। लेकिन एक बार फिर लॉकडाउन लगने से इस बार ईद तो मनेगी मगर वो मिठास नहीं होगी। ठीक अलविदा जुमा जैसे ही लोग अपने अपने घरों में नमाज़े अदा करेंगे। दर्जी से लेकर नाई तक प्रतीक्षा में थे की रमजान और ईद में अल्लाह कुछ मेहरबान होगा दुकाने खुलेंगी तो कुछ रोजी रोटी मे बरकत होगी। मगर रमजान भी बंदी में गया अब अलविदा भी गुजर गया। इस अलविदा रोज कि तरह मौअजीन ने साफ सफाई की और आजान दिया। अगर न नमाज़ी आए न भीड़ लगी चंद लोगों ने नमाज अदा किया। और इमाम ने अल्लाह से दुआ किया कि जल्द भारत और दुनिया को इस अजाब से निजात दिलाए। जिसके लिए एक दिन पहले ही सभी को अपील किया गया था कि सभी नमाज के बाद कोरोना से निजात के लिए दुआ करे। ताकि हम सब पहले की तरह मिलजुल कर सभी लोग पहले की तरह फिर से पर्व मना सके। छोटी ईद मानी जाने वाली अलविदा जुमा में बच्चे बढ़े सभी मायूस दिखे और कहा कि पिछले वर्ष नमाजियों के भीड़ का आलम यह था की सभी मस्जिद के बाहर अतिरिक्त व्यवस्था की जाती थी। मगर इस वर्ष फिर से लॉकडाउन ने रमजान और अलविदा के खुशियों की बलि चढ़ गई।

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