कार्यक्रम:जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर गर्भवती की हुई गोद भराई, दिया गया उपहार

मधुबनीएक वर्ष पहले
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जिले के विभिन्न आंगनबाडी केंद्र पर मंगलवार को आईसीडीएस विभाग की ओर से गोद भराई दिवस का आयोजन किया गया। इस मौके पर गर्भवती महिलाओं को उपहार के रूप में पोषण की पोटली भी दी गई। जिसमें गुड़, चना, हरी पत्तेदार सब्जियां, आयरन की गोली, पोषाहार व फल आदि शामिल थे। महिलाओं को उपहार स्वरुप पोषण की थाली भी दी गयी, जिसमें सतरंगी थाली व अनेक प्रकार के पौष्टिक पदार्थ शामिल थे। गर्भवती महिलाओं को चुनरी ओढ़ाकर और टीका लगाकर महिलाओं की गोद भराई की रस्म पूरी की गई।

गर्भवती  महिलाओं को अच्छे सेहत के लिए पोषण की आवश्यकता व महत्व के बारे में जानकारी दी गई। मालूम हो कि हर माह की  7 तारीख को यह गाेद भराई दिवस मनाया जाता है। गोद भराई रस्म में पोषक क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं अन्य महिलाओं ने भाग लिया। सेविकाओं द्वारा गर्भवती महिलाओं के सम्मान में उसे चुनरी ओढ़ा उसे तिलक लगा और गर्भस्थ शिशु की बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गोद में पोषण संबंधी पुष्टाहार फल सेव, संतरा, बेदाना, दूध, अंडा देकर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन की गोली खाने की सलाह दी। केंद्र संख्या 113 बेनीपट्टी, केंद्र संख्या 15 बासोपट्टी सहित जिले के विभिन्न प्रखंड स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर इसका आयोजन किया गया।

बेनीपट्टी की सीडीपीओ सुशीला देवी ने कहा जैसे ही महिलाओं को गर्भधारण की पुष्टि हो जाय वे निकटतम स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सक के निगरानी में रहें तथा नियमित रूप से चेक-अप कराएं। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया। आखिरी महीनों में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इस दौरान आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा की भी मात्रा का होना जरूरी होता है। महिलाओं को प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, जननी सुरक्षा योजना, मातृ शिशु सुरक्षा कार्ड, प्रसव पूर्व देखभाल, एनीमिया की रोकथाम व पौष्टिक आहार के संबंध में जानकारी दी।

गर्भवती को जागरूक करना है लक्ष्य : डॉ. रश्मि वर्मा
आईसीडीएस के डीपीओ डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि इस प्रयास के पीछे उद्देश्य यह है कि जागरूकता की कमी और अभाव में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी आ जाती है। प्रेग्नेंसी के दौरान ध्यान न देने पर महिला कमजोर हो जाती हैं। जिसके कारण पैदा होने वाला बच्चा कमजोर होता है, जो कि कुपोषण का शिकार हो जाता है। ऐसी स्थिति न पैदा हो इसके लिए गर्भवती महिला को बेहतर देखभाल की जानकारी इस दिवस के मौके पर दी गई और पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी गई।

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