रचनाओं को किया याद:डोगरी लेखिका पद्मा सचदेव के निधन पर रचनाओं को किया याद

मधुबनी2 महीने पहले
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  • स्वचालित कविगोष्ठी व अकादमी के सदस्यों ने शोक व्यक्त किया

डोगरी लेखिका पद्मश्री पद्मा सचदेव के निधन पर स्वचालित कविगोष्ठी व अकादमी के सदस्यों की ओर से शनिवार को शोक-संवेदना व्यक्त किया है। शोक-संवेदना व्यक्त करते हुए स्वचालित कविगोष्ठी के संयोजक भाषाविद् प्रो. जे. पी. ने कहा पद्मा की कविता में जो लोक-तत्व हैं, वह उनके डोगरी में लिखी और गाई गई गीतों की देन है। सह-संयोजक उदय जायसवाल ने कहा पद्मा ने हिन्दी और डोगरी में कई किताबें लिखी। मेरी कविता, मेरे गीत ने उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार दिलाया। वह रेलवे सलाहकार समिति की मानव सदस्या भी थीं। प्रो. नरेंद्र नारायण सिंह निराला ने कहा उनका जन्म जम्मू के पुरमंडल इलाके में संस्कृत के विद्वान प्रोफेसर जयदेव बादु के घर में 1940 में हुआ था। प्रो. शुभ कुमार वर्णवाल ने कहा पद्मा बहुत उदार स्वभाव की थीं।

वह कवितायें लिखती और घर मिलने आए मित्रों को गाकर भी सुनाती थी। पद्मा जी 2001 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित हुई और 2007-2008 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कविता के लिए कबीर सम्मान से सम्मानित हुई थी। शोक-संवेदना व्यक्त करने वालों में पूर्व डीआईजी चन्द्रशेखर दास, भोलानंद झा, प्रो. रिजवान सिद्दीकी, डाॅ. रानी झा, दयानंद झा, चन्द्रपति विजय, डाॅ. विनय विश्वबंधु, डाॅ. बंशीधर मिश्र, डाॅ. संजीव शमा, डाॅ. अनिल ठाकुर, डाॅ. बिजय शंकर पासवान, पं. प्रजापति ठाकुर, दिलीप कुमार झा, डाॅ. गोपीनाथ झा रमण, कल्याण भारद्वाज, प्रो. इश्तियाक अहमद, अजीत आजाद, सतीश साजन, धर्मेंद्र भाई, प्रीतम निषाद, राजेश पांडेय आदि शामिल हैं।

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