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प्रतिक्रिया:नई नीति में एमफिल हटा देने से छात्रों का एक वर्ष बच जाएगा : प्राचार्य तिवारी

मधुबनी13 दिन पहले
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  • 0वीं में बोर्ड परीक्षा नहीं लेने से छात्रों के भविष्य पर प्रभाव पड़ेगा : यादव

केंद्र सरकार के नए शिक्षा नीति 2019 का विभिन्न शिक्षाविदों ने स्वागत किया है और कहा है कि इससे कई प्रकार की समस्याओं का छुटकारा मिलेगा। इन लोगों का कहना है कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई शिक्षा नीति से उच्च शिक्षा स्तर पर अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि कुछ लोगों ने इस नीति में कुछ बदलाव की भी मांग की है। जेएमडीपीएल महिला कॉलेज के प्राचार्य डाॅ.उदय नारायण तिवारी ने कहा कि नई नीति में एमफिल हटा देने से छात्रों का एक वर्ष बचेगा।  उन्होंने कहा कि एमफील का पीएचडी के लिए कोई उपयोग नहीं था व अनावश्यक रूप से एक वर्ष छात्रों का बर्बाद होता था। साथ ही उन्होंने नए नाम शिक्षा मंत्रालय किए जाने पर भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व में यही नाम था।

इसलिए नाम संक्षिप्त कर सरकार ने नई अच्छी पहल की है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह राष्ट्र के विकास में सहायक होगी। नई शिक्षा नीति में कुछ बदलाव की आवश्यकता : ब्रह्मदेव | प्राइवेट स्कूल एंड चिल्ड्रन वेलफेयर एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष ब्रह्मदेव यादव ने कहा कि नई नीति में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आवश्यक है। 10 में बोर्ड परीक्षा नहीं लिए जाना एक तरह से शैक्षणिक गुणवत्ता के मेघा पर प्रहार है, छात्रों के शैक्षणिक गुणवत्ता के मेघा के मूल्यांकन का एक मात्र मध्यम परीक्षा है 10वीं बोर्ड परीक्षा नहीं होने से छात्र लक्षयहीन होंगे। जिसका कुप्रभाव छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा सरकार को नीति में संशोधन कर 10वीं बोर्ड परीक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए।

नई शिक्षा नीति सुधारवादी प्रक्रिया: महादेव मिश्र
जिला प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रधान सचिव महादेव मिश्र ने नई शिक्षा नीति 2019 का स्वागत किया है। मिश्र ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की बात इसमें कही गई है। क्षेत्रीय भाषाओं के आधार पर शिक्षकों की विशेष नियुक्ति भी पारंपरिक विरासत को अक्षुण्ण रखने के लिए एक सुधारवादी प्रक्रिया है। लेकिन संस्कृत को वैकल्पिक विषय में न डालकर इसे माध्यमिक स्तर तक एक आवश्यक विषय के रूप में रखने की जरूरत है। नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना एवं इसके लिए वित्तीय व्यवस्था उच्च शिक्षा स्तर पर अनुसंधान को बढावा देगा। शिक्षा में समय-समय पर समीक्षोपरांत परिवर्तन भी एक अत्यावश्यक विषय है। इसके लिए राष्ट्रीय शिक्षा आयोग की स्थापना भी अति महत्वपूर्ण है।

विलुप्त हो रही स्थानीय भाषा को मिलेगा संरक्षण
मिथिला स्टूडेंट यूनियन के राघवेंद्र रमण ने कहा कि नए शिक्षा नीति में विज्ञान के साथ कला और खेल को शामिल किया गया है इससे छात्रों को लाभ मिलेगा। इसके बाद नये शिक्षा नीति में तीन भाषाओं को शामिल किया है, इसमें स्थानीय भाषा को भी इसमें शामिल किया जाएगा जिससे देश में विलुप्त हो रहे स्थानीय भाषा का संरक्षण होगा। इस शिक्षा नीति से मैथिली भाषा को स्थान मिलेगा। साथ ही प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा की पढ़ाई से मैथिली भाषा का भी उत्थान होगा जबकि हमलोग कई वर्षों से मिथिलांचल में प्रारंभिक कक्षाओं में मैथिली की पढ़ाई की मांग करते आ रहे हैं।

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