आयाेजन:मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण कार्यक्रम का हुआ आयाेजन, मिट्टी की जांच कराने पर दिया जोर

मधुबनी2 महीने पहले
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विश्व मृदा दिवस के अवसर पर संयुक्त कृषि भवन रामपट्टी मधुबनी के सभाकक्ष में मृदा जागरुकता व मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान किसानों की उपस्थिति प्रोत्साहित करने वाली रही। उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए जिला कृषि पदाधिकारी अशोक कुमार ने बताया की जिस तरह मनुष्य के बीमार पड़ने पर बीमार व्यक्ति का जांच कराना आवश्यक होता है, उसी तरह मिट्टी की भी जांच कराना आवश्यक है। ऐसा इसलिए की लगातार रसायनिक उर्वरकों व रसायनिक दवाओं के प्रयोग से मिट्टी बीमार ग्रस्त हो गया है।

किसानों को बहुत कम फायदा हो रहा है। अतः किसान समय-समय पर अपने खेत की मिट्टी की जांच कराएं और जांच के आधार पर जो पोषक तत्व जितनी मात्रा में अनुशंसित किया जाए उसी मात्रा में डालें। इससे आर्थिक बचत होगी और ऊपज भी बढ़ेगी। इस अवसर पर जिला मिट्टी जांच प्रयोगशाला के सहायक निदेशक रसायन दिनेश कुमार ने बताया कि जमीन की ऊपरी 6 इंच तक जो परत होता है असल में वही मिट्टी है। फसलों के लिए यही मिट्टी ही काफी लाभदायक होता है। मिट्टी में प्रमुख रूप से ह्यूमस, अनेकों प्रकार के जीवाणु, कार्बनिक पदार्थ और जल धारण करने की क्षमता विद्यमान रहती है जो पौधों व जीव जंतुओं के सड़ने गलने से बनते हैं। 6 इंच मिट्टी बनने में 90 वर्ष से 900 वर्ष तक लगता है ।

अगर कल कारखानों में बने हुए रसायनिक उर्वरको व रसायनिक दवाओं का प्रयोग किया जाता है तो मिट्टी के ह्युमस व जीवाणु बनने की प्रक्रिया समाप्त हो जाते हैं। मिट्टी को स्वस्थ्य बनाने के लिए पहले अपने खेतों की मिट्टी की जांच जिला मिट्टी जांच प्रयोगशाला में कराएं। जांच 12 पारा मीटर में होता है और निशुल्क होता है। मिट्टी जांच के बाद जो मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराया जाता है उस मृदा स्वास्थ्य कार्ड में जिन जिन पोषक तत्वों की जो भी मात्रा अनुशंसित रहता है उससे ज्यादा उर्वरकों का प्रयोग कदापि नहीं करें।

अनुशंसित पोषक तत्वों की मात्रा की पूर्ति रसायनिक उर्वरकों के बदले जैविक और जीवाणु उर्वरकों से करें। दूसरा जैविक एवं जीवाणु उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी भी स्वास्थ रहेगा और जो उपज प्राप्त होगा उसके सेवन से हम सभी भी स्वस्थ रहेंगे। तीसरा मिट्टी के स्वस्थ्य के साथ साथ हम सब अपने स्वास्थ्य को भी बेहतर बना लेंगे। अंत में शिव कुमार, उप परियोजना निदेशक आत्मा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि मिट्टी के स्वास्थ्य को बचाइए।

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