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अच्छी खबर:निगम में शामिल किए गए क्षेत्र में रहने वाले भूमिहीनों का किया जा रहा सर्वे, विभाग को भेजी जाएगी रिपोर्ट

मधुबनी7 दिन पहले
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दोमंठा स्थित महादलित टोले में सर्वे के दौरान मौजूद लोग व निगम कर्मी। - Dainik Bhaskar
दोमंठा स्थित महादलित टोले में सर्वे के दौरान मौजूद लोग व निगम कर्मी।
  • नागरिकाें की सुविधा में विस्तार की दिशा में कार्य किया जा रहा है, हर आदमी को रहने का मिलेगा ठिकाना

नगर परिषद से नगर निगम में अपग्रेड होने के बाद निगम क्षेत्र में शामिल किए गए क्षेत्रों में नागरिक सुविधा विस्तार की दिशा में कार्य प्रारंभ कर दी गई है। इसके लिए वर्तमान में निगम क्षेत्र में शामिल किए गए नए क्षेत्र में भूमिहीनों के सर्वे का कार्य चल रहा है।

साथ ही सर्वे के दौरान भूमिहीन लोगों के रहने के स्थान के बारे में भी सूचना एकत्र की जा रही है। जिसमे इनकी ओर से रहने के लिए किस प्रकार की भूमि का उपयोग किया जा रहा है। वहीं सरकारी भूमि पर रहने वाले भूमिहीनों के भूमि की प्रकृति सहित भूमि किस विभाग के अधीन है। इसके संबंध में भी सूचना जुटाई जा रही है। सर्वे कार्य मे लगे नप के सिटी मैनेजर नीरज कुमार झा ने बताया कि वर्तमान में शहर के वार्ड 30 व वार्ड 13 के आसपास के कुछ क्षेत्रों का सर्वे किया गया है। जिसमें मुख्य रूप से दलित व महादलित बस्ती को फोकस किया गया है।

दलित व महादलित बस्ती के लोगों के वास के बारें में विस्तृत सूचना एकत्र की जा रही है। इन सभी सूचनाओ को एकत्र कर विभाग में भेजा जाएगा। अगली कार्रवाई विभाग से आदेश आने के बाद की जाएगी। साथ ही आगामी भविष्य में ऐसे लोगों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था सरकार की ओर से किए जाने की संभावना है। व्यवस्थित तरीके से सभी लोगों के रहने की व्यवस्था की जाएगी।

पीएम स्वनिधि योजना का विस्तार किया जाएगा

मालूम हो कि केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे पीएम स्वनिधि योजना का विस्तार निगम के अधीन आनेवाले नए क्षेत्रों में भी की जाएगी। ऐसे क्षेत्र के फुटपाथ व वेंडरों को पीएम स्वनिधि योजना का लाभ दिया जाएगा। डे-नूलम की ओर से सर्वे कर ऐसे लोगों की सूची तैयार की जाएगी। तत्पश्चात उन्हें योजना का लाभ दिया जाएगा। वर्तमान में यह योजना शहर के केवल 1 से 30 वार्ड में चल रहा है। इसमें भी सर्वे कर इस दिशा में सार्थक कार्रवाई नहीं हुई है। फुटपाथ यूनियन के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि सर्वे के कार्य में भी कागजी खानापूर्ति की गई है। निगम व विभागीय लापरवाही के कारण शहरी क्षेत्र में किसी भी योजना का लाभ लाभार्थी नहीं मिल पाता है। वास्तविक वेंडर व फुटपाथियों का सर्वे भी नहीं किया गया है।

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