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सीएम की योजना:90 प्रतिशत अनुदान का तीन मत्स्य पालकों को ही मिला लाभ

मधुबनी13 दिन पहले
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मुख्यम॔त्री की ओर से अतिपिछड़ी जातियों के ऐसे लोग जो मत्स्य पालन करना चाहते है उन्हें तालाब खुदवाने के लिए 90 प्रतिशत अनुदान मिलता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अतिपिछड़े वर्ग के ऐसे लोग जो मत्स्य पालन करना चाहते हैं उन्हें इस कार्य से जोड़कर सबल बनाना है। सरकार ने पिछड़े श्रेणी में आने वाले अति पिछड़ा वर्ग के लोगों को मत्स्य किसान समृद्धि बनाने के लिए नए वित्तीय वर्ष में पूरी तरह से ध्यान दिया गया है। इस योजना में निजी भूमि पर नया तालाब निर्माण सात लाख की लागत से किया जाएगा।

जिसमें अति पिछड़ा वर्ग के मत्स्य पालकों को लागत का 90 प्रतिशत राशि बतौर अनुदान सरकार की ओर से दिया जाएगा। तालाब निर्माण पर अनुदान ले सकते हैं। बोरिंग के लिए इकाई लागत 50 हजार में 45 हजार अनुदान मिलेगा। पंपसेट की लागत इकाई 25 हजार में 22.5 हजार रुपए अनुदान मिलेगा। जिला मत्स्य कार्यालय को 8 एकड़ यानी 3.02 हेक्टेयर जमीन में तलाब खुदवाने का लक्ष्य मिला है। निजी तालाब पर ट्यूबवेल व पंपसेट लगाने के लिए 75 हजार की लागत पर भी अनुदान मिलेगा।

मत्स्य पालकों को तालाब निर्माण के बाद तालाब में डाले जाने वाले बिचरा इसका सबसे महत्वपूर्ण पार्ट है। इसलिए विभाग की ओर से बेहतर रख रखाऊ के लिए दवा, खाना, मजदूरी व तालाब में पानी भरने के लिए जेनरेटर में लगने वाला डीजल के लिए भी सरकार अनुदान देगी। जिला जिला मत्स्य पदाधिकारी डा.राजीव रंजन सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से इसके लिए 20 लाख 16 हजार रुपए मिला है। उन्होंने बताया कि प्रति हेक्टेयर तालाब उन्नत इनपुट के लिए एक लाख पच्चास हजार की लागत आती हैं।

विभाग की ओर से जिला को 8 एकड़ में उन्नत इनपुट लगाने का लक्ष्य मिला है। वहीं मत्स्य पालकों को व्यापार में सहयोग के उद्देश्य से मोपेड सह आईस बाक्स के लिए भी 90 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। सरकार की ओर से मोपेड सह आईस बाक्स के लिए 55 हजार की राशि निर्धारित किया गया है। ताकि वित्तीय वर्ष 2020-21 मे अति पिछड़ा वर्ग को मत्स्य पालन के व्यवसाय में अधिक से अधिक लाेगाें की भागीदारी हो सके।
ऐसे मिलता है लाभ
मत्स्य पालन के इच्छुक किसान को पहले ,आवेदन देना होता है। फिर विभाग की ओर से आवेदन मे दिए गए जमीन का स्थल निरीक्षण किया जाता है। जगह सही पाए जाने पर उसे तालाब खोदने को कहा जाता है। तालाब खोदने के बाद विभाग की ओर से उसकी नापी होती है। जिसमे केवल जल वाले भाग को शामिल किया जाता है।भिंडा को इसमें शामिल नही किया जाता है। लाभ के लिए पांच लोगों ने दिया आवेदन जिले से इसके लिए पांच इच्छुक लोगो की ओर से आवेदन विभाग को मिला। जिसमें से तीन लोगों को ही यह लाभ दिया गया। इन तीन लोगो से ही जिला अपने लक्ष्य को पा लिया है। लाभ लेने वाले किसान में मधवापुर प्रखंड के सुजातपुर गांव के शुभम कुमार सिंह, हरलाखी के करुणा राम कुमार यादव , विस्फी प्रखंड के चहुटा गांव निवासी भूपेन्द्र चौधरी शामिल है।

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