सतर्कता जरूरी:अक्टूबर तक सदर अस्पताल के लेबर रूम में 2 हजार 551 प्रसव कराए गए

मधुबनी25 दिन पहले
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सदर अस्पताल परिसर स्थित प्रसव कक्ष। - Dainik Bhaskar
सदर अस्पताल परिसर स्थित प्रसव कक्ष।

सदर अस्पताल स्थित प्रसव में अप्रैल से लेकर अक्टूबर 2021 तक 2 हजार 551 गर्भवती महिलाओं का प्रसव हुआ। अप्रैल से जून माह तक जहां 746 प्रसव हुए ताे वहीं जुलाई में 329, अगस्त में 462, सितंबर माह में 512 प्रसव हुए जबकि अक्टूबर माह में 502 प्रसव हुए। इसमें नार्मल डिलीवरी व सिजेरियन दोनों प्रसव का आंकड़ा है। हालांकि इतनी संख्या में स्त्री एवं प्रसूति रोग चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति होने के बावजूद भी सदर अस्पताल स्थित प्रसव कक्ष में नियमित रूप से सिजेरियन प्रसव नहीं हो पा रहा है।

ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा रात्रि में नियमित सिजेरियन के लिए प्रयास नहीं किया गया लेकिन कभी यह प्रयास पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया। हालांकि काफी इमरजेंसी होने पर कुछ बार सिजेरियन प्रसव करवाया गया था लेकिन नियमित रूप से नहीं हो रहा है।

मालूम हो कि सदर अस्पताल में अब स्त्री एवं प्रसूति रोग चिकित्सक की संख्या 6 हो गई है जिसमें डाॅ. प्रवृति मिश्र, डाॅ. सना फातमा, डाॅ. खुशबू कुमारी, डाॅ. भावना, डाॅ. फारूकी व डाॅ. रागिनी हैं। मालूम हो कि सदर अस्पताल व एक-एक दो अनुमंडलीय अस्पताल को छोड़कर पीएचसी स्तर सिजेरियन प्रसव की सुविधा अबतक बहाल नहीं हो पाई है।

सुरक्षित और सामान्य प्रसव को मिलेगा बढ़ावा
सिविल सर्जन डाॅ. सुनील कुमार झा ने बताया कि प्रसव के दौरान गर्भवती एवं उनके परिजनों को किसी प्रकार की लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि गर्भावस्था के अंतिम दौर यानी प्रसव के वक्त छोटी सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का सबब बन सकती है। इसलिए सुरक्षित और सामान्य प्रसव के लिए संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता देने की जरूरत है।

सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव के दौरान सुरक्षित और सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के सुरक्षा के हर मानकों का ख्याल रखा जाता है। इसलिए, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने के लिए सुरक्षा के मद्देनजर किसी प्रकार का संकोच नहीं करें और संस्थागत प्रसव को ही प्राथमिकता दें।

पीएचसी स्तर पर सिजेरियन प्रसव का किया जा रहा प्रयास
शिशु मृत्यु दर में कमी के लिए बेहतर प्रसव और उचित स्वास्थ्य प्रबंधन जरूरी है। प्रसव पूर्व जांच से ही गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य की सही जानकारी मिलती है। गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास और प्रसव के दौरान होने वाले रक्तस्राव के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है जिसमें प्रसव पूर्व जांच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरुकता न सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। ऐसे में प्रसव पूर्व जांच की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है क्योंकि यह मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सिविल सर्जन डाॅ. सुनील कुमार झा ने बताया कि अनुमंडलीय अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव शुरू करने का निर्देश दिया गया है। पीएचसी स्तर पर भी सिजेरियन प्रसव की सुविधा उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है।

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