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भारत-नेपाल की शादियों पर लॉकडाउन का साया:दूल्हे के साथ नेपाल बॉर्डर तक ही बैंड-बाजा और बारात; पिया के घर जाने के लिए दुल्हनों को दो डोली बदलने की मजबूरी

मोतिहारी4 महीने पहले
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भारत-नेपाल बॉर्डर पर गाड़ी बदलते दूल्हा-दुल्हन। - Dainik Bhaskar
भारत-नेपाल बॉर्डर पर गाड़ी बदलते दूल्हा-दुल्हन।
  • भारत-नेपाल में होने वाली शादियों में बरती जा रही है सख्ती
  • बिना बारात के शादी रचाने जा रहे हैं भारतीय दूल्हे

भारत और नेपाल में होने वाली शादियों पर लॉकडाउन का ऐसा साया पड़ा है कि भारतीय दूल्हे बिन बाराती शादी रचाने जा रहे हैं। नेपाल बॉर्डर तक ही बैंड, बाजा और बारात की चमक-दमक, इसके बाद दूल्हे को अकेले दुल्हन के द्वार जाना पड़ रहा है। दरअसल, कोरोना के प्रकोप को देखते हुए बॉर्डर पर काफी सख्ती बरती जा रही है।

एक ओर जहां दूल्हे के साथ बारात में सिर्फ भाई और पिता को एंट्री मिल रही है, वहीं दुल्हन को विदाई के समय बॉर्डर पर अपनी डोली बदलनी पड़ रही है। नेपाली नंबर की गाड़ी से आ रही दुल्हन को भारतीय नंबर की गाड़ी चेंज करनी पड़ रही है। इसी तरह दूल्हे को भी बॉर्डर पर नेपाली नंबर प्लेट की गाड़ी पर ही शादी के लिए जाने दिया जा रहा है। लॉकडाउन में ऐसी सख्ती शादियों का रंग तो फीका कर ही रही है, साथ ही दूल्हे-दुल्हन की परेशानी भी बढ़ा रही है।

नेपाल बॉर्डर पर ही रोक दी बारात

भारतीय परिक्षेत्र के रामगढ़वा प्रखंड के बेला ग्राम निवासी सगीर अहमद के बेटे अब्दुल अजीज की बारात गुरुवार को नेपाल के वीरगंज वार्ड संख्या 2 में शादी हुई। इसको लेकर रामगढ़वा पुलिस कार्यालय से अनुमति लेकर नियमानुकूल 20 लोगों की बारात निकली। नेपाल में लॉकडाउन के कारण बारातियों को बॉर्डर पर ही छोड़ना पड़ा। सिर्फ दूल्हा और उसके पिता दुल्हन के दरवाजे तक जा सके। बारात में शामिल इनके परिजन व मुख्य सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुस सलाम ने बताया कि ऐसा लॉकडाउन के कारण ही हो रहा है अन्यथा नेपाल से तो भारत का भावनात्मक जुड़ाव आरम्भ से ही रहा है। शादी विवाह तो उत्सव के रूप में मनाने का आयोजन होता है, लेकिन कोरोना एक आपदा के रूप में आया है। इससे निपटने के लिए लॉकडाउन ही सबसे बेहतर उपाय है। इसलिए मानवता की सुरक्षा के लिए लॉक डाउन का सहयोग करने की जरूरत है। फिर सब कुछ सामान्य होने पर उत्सव का आयोजन किया जा सकता है।

नेपाल के साथ भारत का बेटी-रोटी का रहा है रिश्ता

नेपाल के तराई क्षेत्र और भारतीय सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों में भावनात्मक लगाव रहा है। इस मुल्क के साथ भारत का बेटी-रोटी का रिश्ता रहा है। इसलिए दोनों क्षेत्र में वैवाहिक संबंध जोड़ने में लोग हिचकते नहीं हैं। खुले बॉर्डर के कारण लोग बेधड़क शादियों में आते-जाते भी हैं, लेकिन लॉकडाउन ने शादी का मजा किरकिरा कर दिया है। लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है।

सीमावर्ती इलाके के लोगों की पीढ़ियों से नेपाल में रिश्तेदार हैं। इसलिए शादी-ब्याह के मौके पर लोग उत्सुक रहते थे। इसी बहाने अपने नाते- रिश्तेदारों से मिलने का भी मौका मिल जाता था, लेकिन लॉकडाउन ने सारे अरमानों पर पानी फेर दिया है। ऐसे में लोगों को अपने घर की शादियों में भी बारात ना जा पाने का दुख है। वहीं, दूल्हा-दुल्हन भी मन मसोस कर रह जा रहे हैं।

बॉर्डर पर ही दूल्हे-दुल्हन को उतरने की मजबूरी

भारत से नेपाल शादी करने जा रहे दूल्हे को बॉर्डर पर ही उतरना पड़ रहा है। दूल्हे के साथ नेपाली नम्बर की गाड़ी से सिर्फ उसके भाई और पिता को ही अंदर जाने की अनुमति मिल रही है। सभी बाराती को बॉर्डर पर छोड़कर बिन बारात दूल्हे को शादी करने जाने की मजबूरी है। वही हाल दुल्हन की भी है। पहले नेपाल अवस्थित अपने मायके से गाड़ी पर बैठकर दुल्हन सीधे ससुराल चली आती थी, लेकिन लॉकडाउन के कारण इस पर ब्रेक लग गया है। मायके से नेपाली नम्बर की गाड़ी से चली दुल्हन बॉर्डर पर आती है और फिर वहां उसे भारतीय परिक्षेत्र में खड़ी भारतीय नम्बर की गाड़ी में सवार होना पड़ता है। यानि, पिया के घर जाने के लिए दुल्हनों को दो बार डोली बदलनी पड़ रही है।

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