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आयोजन:शास्त्रों, वेदों और पुराणों के विचारों को लागू कर भारत विश्वगुरु की ओर होगा अग्रसर : प्रो. गोपाल

मोतिहारी19 दिन पहले
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  • शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में महात्मा गांधी केंद्रीय विवि में विशिष्ट व्याख्यान का हुआ आयोजन

विश्वविद्यालय में नौजवानों के विचारों को जानना आवश्यक : वेंकटेश्वरलू
महात्मा गांधी केंद्रीय विवि के जनसंपर्क प्रकोष्ठ एवं राजनीति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में “विश्व सुरक्षा, मानवाधिकार एवं विश्वविद्यालय” विषय पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता प्रति कुलपति प्रो. जी गोपाल रेड्डी ने की। उन्होंने प्रोफेसर, दार्शनिक, राजनीतिज्ञ सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णन के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्व सुरक्षा कहीं न कहीं भारत पर निर्भर करती है। भारत के विश्व गुरु बनने में चुनौतियां बहुत हैं, परंतु शास्त्रों, वेदों, पुराणों के आधार पर पूरा किया जा सकता है।

उन्होंने विश्वविद्यालयों के लिए शेयरिंग और केयरिंग पॉलिसी अपनाने की बात कही। विश्वविद्यालय एक-दूसरे के संसाधनों को आदान-प्रदान करके आगे बढ़ सकते हैं। बतौर मुख्य अतिथि यूपी प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी के महानिदेशक, आइएसएस लक्को वेंकटेश्वरलू ने कहा कि आज यह बात जानना काफी महत्वपूर्ण है कि विश्वविद्यालय में नौजवानों के क्या विचार हैं? शिक्षण संस्थान की गुणवत्ता एवं वातावरण कैसा है? विश्वविद्यालयों में लगातार ऐसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। विश्वविद्यालय को ईमानदारी से सोचने की जरूरत है कि वह कहां खड़े हैं और जाना कहां है?  वेंकटेश्वरलू ने कहा कि परमात्मा एक हैं, एक ही सत्य है, सभी धर्म-ग्रंथों का सार भी एक ही है। व्यक्ति को सरल स्वभाव रखना एवं साधुवाद को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने भागवत गीता को विश्व उत्थान का आधार बनाए जाने पर जोर दिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भारतीय चरित्र निर्माण संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष राम कृष्ण गोस्वामी ने कहा कि विश्वविद्यालय का शाब्दिक अर्थ है कि जहां विश्व के उत्थान के लिए चिंतन मंथन होता हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा का धर्म यह है कि जो मानव जगत के विकास, मानवाधिकारों की रक्षा, समाज, परिवेश, देश का बेहतर निर्माण तथा समान न्यायवादी व्यवस्था सुनिश्चित करें।

विशिष्ट अतिथि पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आरपी तिवारी ने प्राचीन भारतीय परंपरा को सर्वोत्तम बताते हुए कहा कि जो बात आज पूरा विश्व कर रही है वह पूर्व से ही हमारे वेदों में मौजूद है। उन्होंने कहा कि हमारें 6000 वर्ष पुरानी ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की परंपरा को आज पूरा विश्व ग्लोबल विलेज के रूप में अपना रही है। कार्यक्रम का संचालन मीडिया अध्ययन विभाग के सहायक प्रो. डॉ परमात्मा कुमार मिश्र ने किया। मंगलाचरण डॉ श्याम कुमार झा एवं अतिथि स्वागत उद्बोधन डॉ सरिता तिवारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के संयोजक एवं महामना मदन मोहन मालवीय प्रबंध संस्थान के प्रो. पवनेश कुमार ने किया। मौके पर डॉ नरेंद्र कुमार सिंह समेत विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित थे।

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