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आश्वासन:50 वर्षों बाद भी नही हुआ छौड़ादानो के तीयर नदी में डैम का निर्माण, चुनाव में सिर्फ मिलता आश्वासन

छौड़ादानोएक महीने पहले
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  • विधानसभा के छौड़ादानो प्रखंड में इस बार भी तीयर नदी पर डैम व स्लुइस गेट का निर्माण बना है चुनावी मुद्दा

नेपाल की सरहद को छुता नरकटिया विधानसभा के छौड़ादानो प्रखंड में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा इस बार भी तीयर नदी पर डैम तथा सलुइस गेट का निर्माण बना हुआ है। जनता की यह मांग दशकों पुरानी है और राजनेताओं का जनता से किया वादा आज भी पूरा नहीं हो सके हैं। लेकिन, सुशासन सरकार के मुखिया नीतीश कुमार लगभग एक दशक पूर्व जब प्रखंड मुख्यालय में चुनावी सभा को संबोधित करने आए थे तब, कुछ लोगों ने ध्वस्त डैम की ओर ध्यान आकर्षित कराया था।  लोगों की मांग पर उन्होंने तीयर नदी में डैम के पुनर्निर्माण कराने का भरोसा भी दिलाया था। तब उस समय क्षेत्र की जनता को उम्मीद की हल्की किरण नजर आई थी। लेकिन, तीयर नदी में बने ध्वस्त डैम का पुनर्निर्माण आज तक नहीं हो सका है। चुनाव की घड़ी आने पर सभी दलों के नेता इस बड़े मुद्दे को भुना वोट बैंक बनाने की जुगत में लग जाते हैं। लेकिन चुनाव बीतने के बाद जनता से किए डैम पुनर्निर्माण के वादे अधूरे रह जाते हैं। किसान प्रमोद राय, विद्यानंद यादव, मनोज यादव, अभिषेक तिवारी, ध्रुव प्रसाद आदि ने बताया कि इस डैम के बन जाने से दर्जनों गांवों के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही बिजली का उत्पादन भी किया जा सकेगा। 1970 में आई भीषण बाढ़ में तीयर नदी में बना डैम ध्वस्त हो गया | 1970 में आई भीषण बाढ़ में तीयर नदी में बना डैम ध्वस्त हो गया। जिसके बाद से पांच दशक बीतने के बावजूद भी आज तक इसका पुनर्निर्माण नही कराया जा सका है। हालांकि, निवर्तमान विधायक डॉ. शमीम अहमद द्वारा सदन में इस मुद्दे को कई बार उठाया गया है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नही हो सकी है। किसानों का कहना है कि जब तक यह डैम था छौड़ादानो धान का कटोरा के नाम से जाना जाता था। लेकिन इस डैम के ध्वस्त होने के बाद सिंचाई की समस्या होने लगी और किसानों की फसल उचित सिंचाई के अभाव में हर साल दम तोड़ने लगी। इससे किसानों के हौसले भी पस्त होने लगे और कई किसानों ने खेती- किसानी करना छोड़ दूसरा व्यवसाय अपना लिया। इस डैम के सहारे मधुबन कैनाल में पानी गिरता था। जिससे कुदरकट, धपहर, जुआफर, मलाही, एकडरी, श्रीपुर, बेला, खैरवा, मसही, दुहोसुहो, फतुआ सहित दर्जनों गांव तक इस डैम का पानी पहुंचता था और सिंचाई में काफी सुविधा होती थी।

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