10 लाख से लगेगी मशीन:औषधीय पौधों के सुगंधित तेल से गमकेगा चम्पारण, केवीके में शुरू होगा तेल निकालने का प्लांट, पहले प्रोसेसिंग के लिए गोरखपुर जाते थे किसान

मोतिहारी14 दिन पहले
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सुगंधित तेल प्रोसेसिंग प्लांट व औषधीय पौधे। - Dainik Bhaskar
सुगंधित तेल प्रोसेसिंग प्लांट व औषधीय पौधे।
  • केवीके में स्थापित हुआ डिस्टिलेशन प्लांट, जिले के हजारों किसान होंगे लाभान्वित, पांच सौ एकड़ में होती है औषधीय पौधों की खेती

औषधीय गुणों वाले खुशबूदार पौधों का सुगंधित तेल अब जिले में निकलेगा। इन औषधीय पौधों से तेल निकालने के लिए केवीके में डिस्टिलेशन प्लांट लगाया गया है। यह प्लांट काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल संस्थान नई दिल्ली व आईआईआईएम जम्मू के सहयोग से स्थापित हुआ है। जिसकी लागत करीब दस लाख बताई जाती है। अभाी कर जिले में पांच सौ एकड़ में औषधीय पौधों की खेती होती है। डिस्टिलेशन प्लांट के लगने के बाद खेती के रकबे में वृद्धि होगी। इसके लिए लिए अभी तक किसानों को गोरखपुर के प्लांट पर निर्भर रहना पड़ता था। लगी मशीन के टंकी की क्षमता 800 क्विंटल बताई जा रही है। इस मशीन से प्रतिदिन दो शिफ्ट में 400-400 क्विंटल किसानों के औषधीय पौधों से तेल निकालने का कार्य सम्पन्न होगा।

किसानों की आमदनी बढ़ाने में होगा सहायक
जिले में अधिकांश किसान परंपरागत खेती करते है। महज 500 एकड़ में औषधीय सुगंधित पौधों के खेती यहां होती थी। जबकि आय में बढ़ोतरी के लिए किसान सब्जी की खेती का सहारा लेते थे। लेकिन मूल्य की कमी ज्यादा के कारण उसमें भी अधिक मुनाफा नहीं हो पाता था। इस प्लांट के लगने के बाद किसान औषधीय पौधों की खेती कर अपनी आमदनी बढ़ा पाएंगे। अब किसानों को खेती का उपयुक्त लाभ प्रत्यक्ष रूप से यहीं मिल जाएगा।

यूपी के कुशी नगर जाता था माल

यहां प्लांट के नहीं होने से पूर्व में किसानों द्वारा उत्पादित औषधीय पौधों का प्रोसेसिंग गोरखपुर के कुशीनगर स्थित प्लांट में होता था। अब यह सुविधा यहां होने से उनके आय में वृद्धि होगी व खर्च का बोझ कम होगा। वहीं यहां प्लांट स्थापित हो जाने से क्षेत्र के अन्य किसानों में भी औषधीय, गुणों वाला आयुर्वेदिक पौधों की खेती करने में बढ़ोतरी हागी। फिलहाल जिले के संग्रामपुर, पहाड़पुर, बंजरिया, मोतिहारी आदि के किसानों ने लगभग पांच सौ एकड़ में औषधीय पौधों की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं।

बाजार में है अधिक मांग
औषधीय पौधों में सुगंधा, खस्ता, रजनी गंधा का प्रयोग इत्र आदि बनाने में किया जाता है। इन दवाओं का उपयोग, साबुन, हैंडवास बनाने में काम आता है। सतावर स्वास्थ्य वर्धक, जड़ी बूटी और च्यवनप्राश आदि के बनाने में प्रयोग किया जाता है।

यहां होती है पौधों की खेती
पूर्वी व पश्चिमी चंपारण में औषधीय पौधों की खेती खासकर लेमन ग्रास, चित्रोमेला, खस, तुलसी, मेंथा आदि की खेती करते हैं। इसका तेल निकाल कर बाजार में बेचते हैं। ​​​​​​​

इन जगहों उपलब्ध होंगे औषधीय पौधे
डीएफओ प्रभाकर झा ने बताया कि जीवधारा हाई स्कूल के सामने बापूधाम स्थायी पौधशाला में औषधीय व खुशबूदार प्रजातियों का पौधा उपलब्ध होगा। सभी प्रकार के पौधे किसानों को न्यूनतम दर 10-15 रुपए प्रति पौधा उपलब्ध होगा। पौधशाला में कई बीमारियों के निदान करने वाले रक्त चंदन, सफेद चंदन जैसे पौधे भी उपलब्ध होंगे। केवीके हेड डॉ. अरबिंद कुमार सिंह ने बताया कि प्लांट कार्य करना आरंभ कर दिया है।​​​​​​​

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