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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:पति के फेफड़े तक पहुंच चुका था संक्रमण, फिर भी नहीं मानी हार

मोतिहारी2 दिन पहले
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  • इलाज के दौरान भाई भी हुआ था संक्रमित, , खुद संक्रमित होकर डॉक्टर के सुझाव पर करती रही उपचार, तीनों ने जीती कोरोना से जंग

मेरे पति 36 वर्षीय विपुल कुमार एक्सिस बैंक पटना में मैनेजर हैं। 13 अप्रैल को उन्हें पहली बार फीवर आया। वह पटना में थे। फोन से बातचीत के दौरान उन्होंने मुझे फीवर होने की बात बताई। मैंने उन्हें मोतिहारी 14 अप्रैल को बुला लिया। समान्य बुखार जानकर उन्हें पैरासिटामोल दी। 15 अप्रैल को टेस्ट कराने सदर अस्पताल ले गई। 16 अप्रैल को मां की एनिवर्सरी थी। जिसमें हम सभी लोग शामिल हुए। उस दिन खाने में कोई स्वाद नहीं था। न स्मेल आ रहा था। कोरोना होने का शक हुआ तो 17 अप्रैल को टेस्ट कराई।

हम दोनों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। रिपोर्ट देखकर मन घबरा गया। घर में छोटे-छोटे दो बच्चे और मां-पिताजी थे। गाड़ी से पिताजी वह दोनों बच्चों को अपनी मौसी के यहां भेज दी और हम दोनों घर में होम आइसोलेट हो गए। एक कमरे में पति और दूसरे कमरे में मैं रह रही थी। मेरी मां हम दोनों को छोड़कर नहीं गई। वह घर पर ही रही। मेरा भाई कुणाल आशीष भी था। इन दोनों की चिंता मुझे थी। मैने अपने दोस्त की मदद से पीएचसीएच के एक डॉक्टर का नंबर लिया। उन्हें सारी स्थिति बताई। वह दवा देकर उपचार का तरीका बताए।

उनके बताए अनुसार इलाज शुरू की। मेरे पति को अधिक फीवर था। वह कुछ खा पी ही नहीं रहे थे। जिससे उनकी तबीयत खराब हो रही थी। इस बीच 19 अप्रैल को भाई भी पॉजिटिव हो गया। घर में तीन लोग पॉजिटिव थे और मां अकेले सबके लिए खाना बनाती, दवा की व्यवस्था करती घर के कामकाज करती थी। जिससे उसके भी पॉजिटिव होने का डर बना रहता था। हम तीनों सुबह में नींबू पानी के बाद चाय लेने लगे। कीवी, फल, ड्राई फ्रूट, हल्दी दूध के बाद ब्रेड आमलेट लेते थे। उसके बाद सुबह की दवा खाकर आराम करते थे।

दोपहर में दाल चावल खाते थे। रात में चिकेन खाते थे। दिन भर में दो-तीन निंबू पीने लगे। हमारी दिनचर्या बदल गई। सुबह में मोबाइल पर देख कर हम तीनों योग करते थे। छठे दिन पति ने सांस लेने में तकलीफ होने की जानकारी दी। मैंने तुरंत पीएमसीएच के डॉक्टर को सारी बात बताई। उन्होंने एचआरसीटी कराने को कहा। मैंने पति का सीटी स्कैन कराया। वहां डॉक्टर ने 40 प्रतिशत फेफड़ों में संक्रमण होने की बात बताई। डॉक्टर ने मेरा हौसला बढ़ाया। उनके समझाने पर मेरा आत्मविश्वास बढ़ा। उन्होंने एक सुई लिखा।

जिसे सुबह-शाम तीन दिनों तक लेना था। मैंने पड़ोसी से पति को सुई दिलवाया। सुई लेने के बाद मेरे पति को सांस लेने की परेशानी खत्म हो गई। पीठ में जो दर्द हो रहा था वह भी खत्म हो गया और बुखार भी उतर गया। इससे मेरा आत्मविश्वास और बढ़ा। मैं अपने सगे संबंधी और दोस्तों से सुबह-शाम वीडियो कॉलिंग कर बात कर अपने स्थिति को साझा करने लगी। इससे संक्रमितों को अकेलापन महसूस नहीं होगा। इस तरह 14 दिन बीत गए। 30 अप्रैल को वे लोग टेस्ट कराने गए तो किट उपलब्ध नहीं था। जिस कारण वे लोग लौट आएं। जिले में पता करने पर मधुबन में किट होने की जानकारी मिली। तब मधुबन जाकर टेस्ट कराई। जिसमें हम तीनों नेगेटिव आई।

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