संवाद:कम शब्दों में अधिक भाव प्रकट कर देने के लिए प्रसिद्ध हैं कालिदास : कुलपति

मोतिहारीएक महीने पहले
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  • कालिदास समय और समाज के साथ संवाद करने का साहस रखते थे

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग और मानव संसाधन विकास केंद्र, रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्यप्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में ‘हिंदी एवं संस्कृत साहित्य-काव्यशास्त्र’ विषय पर द्विसाप्ताहिक राष्ट्रीय पुनश्चर्या कार्यशाला के नौवें दिन के द्वितीय सत्र में कुलपति प्रो.संजीव कुमार शर्मा बतौर वक्ता शामिल हुए। स्वागत वक्तव्य कार्यशाला समन्वयक प्रो. प्रसून दत्त सिंह ने दिया। कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने विस्तार से साहित्य, भाषा, कला की अनिवार्यता पर बात रखी। कालिदास का रचना वैशिष्ट्य वक्तव्य के केंद्र में रहा। प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि मैं संस्कृत भाषा एवं साहित्य का अनुरागी हूं। कालिदास का साहित्य हमेशा से मुझे आश्चर्यचकित करता है। अपनी विशिष्टता के साथ कालिदास समकालीन रचनाकारों एवं आने वालों सहस्त्रों वर्षों तक सभी से ‘भिन्न’ हैं। मैं जब-जब कालिदास को पढ़ता हूं, मुझे ‘भारत’ आभा, प्रकाश एवं ज्ञान अपने तीनों रूपों में महसूस होता है।

कालिदास अपनी लेखिनी के स्पर्श मात्र से सबकुछ कह जाते हैं, अन्य अपने विशद वर्णन के उपरांत भी नहीं कह पाते। कम शब्दों में अधिक भाव प्रकट कर देने और कथन की स्वाभाविकता के लिए कालिदास प्रसिद्ध हैं। ‘अकथ्य’ को संकेत के माध्यम से कहने वाले कालिदास संस्कृत साहित्य का मान हैं, स्वाभिमान हैं। संस्कृत परंपरा के संवाहक कालिदास भारत के वैविध्य को प्रस्तुत करने का साहस रखते हैं, समय एवं समाज के साथ संवाद करने का साहस रखते हैं। कालिदास हमें दूर तक सोचने की दृष्टि देते हैं। संवाद, परिसंवाद की यह दृष्टि हमारी निर्मिति की प्रेरणा है। जीवन, समाज, व्यक्ति के मनोभावों को गहराई से जानने वाले कालिदास हमारी थाती हैं। हमें इस थाती को सहेजना है।

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