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ऐसे जज्बे को सलाम:कोविड संक्रमित पीएचसी प्रभारी आइसोलेशन में रहकर कर रही पीएचसी का प्रबंधन, वीसी से लोगों को टीका लेने के लिए कर रही हैं जागरूक

मोतिहारीएक महीने पहले
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आइसोलेशन में मॉनिटरिंग करती डॉ. शीतल नुरुल्ला। - Dainik Bhaskar
आइसोलेशन में मॉनिटरिंग करती डॉ. शीतल नुरुल्ला।
  • 28 अप्रैल को डॉ.शीतल नरुल्ला की रिपोर्ट अाई थी पॉजिटिव, मोबाइल पर ही कोरोना मरीजों का कर रही इलाज

प्रतिकूल परिस्थिति में भी अपने कर्तव्यपथ पर अडिग रहकर सेवा-भावना के साथ काम करना ही मनुष्य को खास बनाता है।ऐसी ही कर्तव्यनिष्ठता का उदाहरण बन रही हैं अरेराज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ शीतल नुरुल्ला। वे विगत 28 अप्रैल को कोविड पॉजिटिव पाई गई। गंभीर लक्षण दिखने के बाद उन्होंने अपना एंटीजन एवं आरटीपीसीआर टेस्ट कराया। एंटीजन जांच में हाई लेवल कोविड संक्रमण पाया गया और वो होम आइसोलेट हो गईं। उन्हें काफी दिक्कतें हो रही थी, कोविड के संपूर्ण लक्षण से जूझ रही थी।

उन्होंने इस दौर में अपना काम कभी नहीं छोड़ा। इस दौरान पीएचसी के मुख्य चिकित्सकों की प्रतिनियुक्ति डेडिकेटेड कोविड हॉस्पिटल में लगा दी गई, जिससे पूरे अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही उनपर आ गई। उन्होंने हौसला नहीं हारा ,इसे सार्थक चुनौती माना। वो लगातार वैक्सिनेशन, नियमित टीकाकरण, पॉजिटिव ट्रैकिंग, मेडिकल किट की उपलब्धता, सेनिटाइजेशन, अलग अलग स्थानों पर टीकाकरण केंद्र बनाना एवं कोविड जांच सहित अन्य कार्य नियमित करती रही। ये सभी केन्द्रों का वीडियो मॉनिटरिंग करती रही।

डेडिकेटेड कोविड अस्पताल के कंट्रोल रूम का नंबर उनके पास होने के कारण लगातार क्षेत्र से आ रहे फोन कॉल को सुनना एवं लोगों को सार्थक सुविधा उपलब्ध कराना उनके लिए चुनौती बनी हुई है किंतु उनका कहना है कि वे इसे अवसर मानकर सेवा-भावना से ये सब कर पा रही है। अपने कोविड दौर का अनुभव साझा करते हुए डॉ शीतल बताती हैं कि ये समय उनके लिए बहुत ही कठिन बीत रहा है। एकतरफ जहां क्षेत्र के लोगों की समस्याओं का समाधान करना है और स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करानी है तो वही दूसरी ओर परिवार की परेशानियों से भी रु-ब-रु होना है। वो बताती हैं कि परिवार में दो छोटे-छोटे बच्चे हैं, बूढ़ी एवं बीमार सास हैं। जिनको कोई संभालने वाला नहीं है। इनके पति डॉ. नीरज कुमार संग्रामपुर पीएचसी के प्रभारी हैं।

जो सुबह से लेकर देर शाम तक अस्पताल के काम से बाहर रहते हैं। इस दौरान परिवार को देखने वाला कोई नहीं है। उन्होंने बताया कि 28 अप्रैल को दिए गए आरटीपीसीआर जाँच का रिपोर्ट अब तक नहीं आया है। अब वो पहले से अच्छा महसूस कर रही हैं, किंतु जांच रिपोर्ट आने के उपरांत ही संक्रमण के बारे में जानकारी हो पाएगी। डॉ. शीतल बताती हैं कि कोविड वैक्सीन लेने के कारण ही आज वो सुरक्षित हैं वरना जिस ढंग से संक्रमण का अटैक हुआ था।रिकवर कर पाना मुश्किल होता। उन्होंने क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि लोग अधिक से अधिक संख्या में वैक्सीन लगवाएं। ये जीवनरक्षी है।

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