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हॉट स्पॉट वार्ड-21:लाेगाें की न ताे थर्मल स्क्रीनिंग हुई और न चस्पाया गया पोस्टर, सिर्फ नाम-पता व सर्दी-खांसी पूछ कर हुआ सर्वे

मोतिहारी2 महीने पहले
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  • कंटेनमेंट जोन में नहीं है कोई बंदिश, एक-दूसरे से मिल रहे हैं लोग, अब तक 35 संक्रमित मिले हैं
  • दो लोगों की संक्रमण के कारण हो चुकी है मौत, लेकिन अब भी सख्ती बरतने में कोताही हो रही है

शहर का वार्ड 21 भवानीपुर जिरात मोहल्ला कोरोना का हॉटस्पॉट बना है। यहां गत 29 जून से 2 अगस्त तक 35 लोग संक्रमित मिल चुके हैं। इनमें 2 लोगों की मौत भी हो चुकी है। लगातार संक्रमित लोगों के मिलने के कारण इस मोहल्ला को प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन बनाया है। लेकिन कंटेनमेंट जोन कि कोई बंदिश यहां लागू नहीं की गई है। नियमानुसार, कंटेनमेंट जोन में लोगों के घर से निकलने पर भी पूरी पाबंदी होती है। लेकिन, इस वार्ड के लोग न सिर्फ घर से निकल रहे हैं। बल्कि एक-दूसरे से मिल भी रहे हैं। शहर में भी घूम रहे हैं। मोहल्ला के अंदर भी लोगों की गतिविधि जारी है। दुकानें खुल रही है। इस मोहल्ला को जोड़ने वाली तीन सड़कों में बैरिकेडिंग की गई है। जबकि एक सड़क खुली है। जिससे लोग वाहन लेकर आते-जाते हैं।

लोगों के आने-जाने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। शुक्रवार की दोपहर कंटेनमेंट जोन में भास्कर की टीम गई। वहां सड़कों पर आवाजाही दिखी। बाइक भी चल रहे थे। मधुबन छावनी चौक के पास बैरिकेंटिंग के बगल से लोग साइकिल निकालते दिखे। वहां बैरिकेटिंग के भीतर दो दुकानें खुली मिली। महिला कॉलेज के समीप बैरिकेंडिंग से लड़कियां आ रही थी। बगल में प्रभावती गुप्ता उच्च विद्यालय खुला मिला। पूछने पर लड़कियों ने बताया कि विद्यालय में उनका फार्म भरा रहा है। इसलिए वे लोग आई हैं। बैरिकेडिंग के पास दंडाधिकारी व पुलिस बल तैनात थे। उनलोगों ने बताया कि विद्यालय खुला है जिस कारण लड़कियां आ-जा रही है।

सही तरीके से सर्वे नहीं होने के कारण संक्रमण का बढ़ता जा रहा है ग्राफ, सर्वे में बरती गई लापरवाही जिंदगी पर भारी पड़ रही है

कंटेनमेंट जोन में ंअनाधिकृत रूप से घुसने पर युवक को भगाते दंडाधिकारी।
कंटेनमेंट जोन में ंअनाधिकृत रूप से घुसने पर युवक को भगाते दंडाधिकारी।

सर्वे के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई
इस वार्ड में पहली बार 29 जून को कोरोना संक्रमित मिले थे। उसके बाद सर्वे के लिए आशा कार्यकर्ता को भेजा गया था। जिसने कुछ घर में जाकर लोगों से नाम पता पूछा। उनसे सिर्फ सर्दी-खांसी और बुखार की जानकारी ली। न लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग की और न ही जो संक्रमित मिला था उसके घर पोस्टर चिपकाया। वार्ड के कुणाल कुमार ने बताया कि उनके घर सर्वे हुआ था। सिर्फ नाम पूछा गया था। एक बार सर्वे करने महिला आई थी। कुछ ऐसा ही कहना था जितेंद्र कुमार व दिनेश कुमार का।

जितेंद्र ने बताया कि उनके घर दो-तीन बार सर्वे हुआ है। लेकिन, थर्मल स्क्रीनिंग नहीं की गई। न हीं संक्रमित के घर पर पोस्टर चस्पाया गया। जबकि हरि ठाकुर व राजन कुमार ने बताया कि उनलोगों के घर का सर्वे नहीं हुआ है। प्रशासन की ओर से फल-सब्जी व अन्य सामान को भी नहीं भेजा जाता। जिस कारण वे लोग जरूरत के सामान को लेने बाहर जाते हैं।

कर्मियों की कमी से परेशान हैं अधिकारी

डीसीएम नंदन झा ने बताया कि शहरी क्षेत्र में मात्र 16 आशा हैं। जबकि वार्ड 38 है। ऐसे में सर्वे करने में परेशानी हो रही है। उन्होंने माना कि गाइडलाइन को पूरी तरह फॉलो नहीं किया जा रहा है। संसाधन की कमी को भी बड़ा कारण बताया। प्रशासनिक आकड़ों के अनुसार गत पांच अगस्त तक जिले में 261 कंटेनमेंट जोन बनाए गए थे जिसमें 92 को क्लोज कर दिया गया है। क्लोज करने के बाद यहां सेनेटाइज नहीं कराया गया है। जबकि नियमानुसार कंटेनमेंट जोन खत्म होने के बाद क्षेत्र को सेनेटाइज कराना है।

वार्ड पार्षद डॉ उदय बिहारी ने बताया कि उनके वार्ड में लगभग तीन सौ लोगों की जांच की गई है। अब तक 35 लोग संक्रमित मिले थे। जिसमें अधिकाशं ठीक हो गए है। उन्होंने बताया कि वार्ड को कभी सेनेटाइज नहीं किया गया है। वहीं, अापदा अपर समाहर्ता अनिल कुमार ने बताया कि अधिकारियों को जांच करने का निर्देश दिया गया है। नियम तोड़ते पकड़े जाने पर सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी। कंटेनमेंट जोन में लॉकडाउन के नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

स्क्रीनिंग के लिए नहीं दी गई मशीन
सर्वे करने वाली आशा मालती ने बताया कि वह 3 जुलाई को सर्वे की थी। उसे न पोस्टर दिया गया था न ही थर्मल स्क्रीनिंग मशीन। सिर्फ घर-घर जाकर लोगों से लक्षण पूछने व नाम पता लेने को कहा गया था। घर पर जाने पर लोग उसका सहयोग नहीं कर रहे थे। न लक्षण की जानकारी दिए। न ही ठीक से अपना नाम पता बताया। वह करीब 80 घरों का सर्वे की थी। दवा दुकान से नहीं लिया गया डाटा दवा दुकानदार व चिकित्सकों को सर्दी-खांसी व बुखार वाले मरीजों को दवा देने के साथ उनका पूरा पता लेने का निर्देश दिया था।

जिसे प्रशासन को उपलब्ध कराना था। लेकिन, यहां ऐसा नहीं हुआ है। उक्त वार्ड के बगल में कई दवा की दकानें है। एक दुकानदार ने बताया कि अभी तो अधिकतर लोग सर्दी-खांसी व बुखार की दवा ले रहे हैं। लेकिन, प्रशासन की तरफ से उनका नाम-पता लेने का कोई निर्देश नहीं दिया गया था। इसलिए वे लोग किसी से जानकारी नहीं लेते।

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