राजद के वरीय नेता बजरंगी नारायण ठाकुर का निधन:हार्ट अटैक से हुई मौत, शोक संवेदनाओं का लगा तांता; लोगों ने कहा- वे कभी सिद्धान्त से नहीं भटके

मोतिहारीएक महीने पहले
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जेपी आंदोलन से उपजे बजरंगी नारायण ठाकुर ने खाटी भोजपुरिया वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। - Dainik Bhaskar
जेपी आंदोलन से उपजे बजरंगी नारायण ठाकुर ने खाटी भोजपुरिया वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई थी।

राजद के प्रसिद्ध व वरीय नेता बजरंगी नारायण ठाकुर अब नहीं रहे। उनकी मृत्यु हृदय गति रूकने के कारण हो गई। वे शारदीय नवरात्रि के अवसर पर अपने पैतृक गांव कुंडवा चैनपुर के गोरगांवा में थे। गांव में शौच जाने के दौरान उन्हें हार्ट अटैक हुआ। परिजन आननफानन में उन्हें अनुमंडलीय अस्पताल ढाका ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

घटना बुधवार की संध्या करीब चार बजे की बताई जाती है। मृतक के शव को फिलहाल गोरगांवा ले जाया गया। इधर जैसे ही उनकी मौत की खबर फैली। लोग शोकाकुल हो गए। बहुत से लोग सोशल मीडिया के माध्यम से शोक व्यक्त कर अपनी संवेदना जताने लगे।

उनके निधन पर पूर्व केंद्रीय मंत्री व राज्यसभा सदस्य डॉ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि बजरंगी भाई एक अभिभावक के रूप में थे। उनका इस तरह से चला जाना दिल को गहरा चोट महसूस कराया है। हम शोकाकुल परिजनों के प्रति इस दुख की घड़ी में खड़े हैं।

दुख व्यक्त करने वालों में पूर्व विधायक बब्लू देव ने भी उन्हें अभिभावक बताते हुए अपनी संवेदना व्यक्त की है। इसके अलावा जिला राजद के जिलाध्यक्ष सुरेश प्रसाद यादव, अधिवक्ता राजीव कुमार द्विवेदी उर्फ पप्पू दुबे, एनामुल हक, अरुण यादव, शशिकांत मिश्र, कांग्रेस जिलाध्यक्ष शैलेंद्र कुमार शुक्ला, पूर्व विधायक सुरेश मिश्रा, मुमताज अहमद, गप्पू राय, आलोक शर्मा, जितेंद्र सिंह, रवि शंकर दुबे, पत्रकार विनोद कुमार सिंह, सच्चिदानंद सत्यार्थी, धनंजय कुमार,विजय कुमार पांडेय, राकेश कुमार सिंह, प्रभात रंजन मुन्ना आदि ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

भोजपुरी के सफल वक्ता के रूप में याद किए जाएंगे

जेपी आंदोलन से उपजे बजरंगी नारायण ठाकुर का राजनीतिक सफर कई मायनों में यादगार रहेगा। उन्होंने जनता दल के बाद राष्ट्रीय जनता दल में रह कर ताउम्र राजनीति की। एक खाटी भोजपुरिया वक्ता के रूप में अपनी पहचान बनाई थी। सभा बड़ा हो या छोटा सभी लोगों को बजरंगी नारायण ठाकुर का भाषण सुनने का इंतजार रहता था। उनके भाषण में जो मिठास लोगों को मिलती थी, उसे लोग नहीं भुला पाते थे।

लंबी राजनीति के बाद भी उन्हें राजद या जनता दल ने उच्च सदन में जाने का मौका नहीं दिया। लेकिन वे कभी भी सिद्धांत की राजनीति से निर्णय नहीं बदले। पूर्व विधायक रामाश्रय प्रसाद सिंह ने कहा कि बजरंगी नारायण ठाकुर के निधन से संपूर्ण चंपारण ही नहीं, बिहार को क्षति हुई है। वे एक स्वच्छ छवि के नेता के रूप में याद किए जाएंगे।

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