जताया विराेध:आबादी छोड़कर जलमग्न रहने वाले चंवर में प्रखंड कार्यालय भवन गया, तो किया जाएगा आंदोलन

संग्रामपुर9 महीने पहले
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संग्रामपुर के सियाराम मन्दिर के प्रांगण में बैठक करते ग्रामीण और भूमिदाता। - Dainik Bhaskar
संग्रामपुर के सियाराम मन्दिर के प्रांगण में बैठक करते ग्रामीण और भूमिदाता।

संग्रामपुर प्रखंड मुख्यालय भवन की उत्तरी बरियरिया पंचायत में स्थानांतरण की खबर के बाद मुख्यालय के अगल बगल के गांवों के लोगों में खलबली मच गई। काफी सारे लोग विरोध में उतर आए। लोगों का कहना था कि सोची समझी साजिश के तहत प्रखंड मुख्यालय को जल जमाव वाले क्षेत्र बरियरियां चंवर में भेजा जा रहा है। जिसका वे लोग विरोध करते हैं। यहां तक लोगों ने कहा कि वह संग्रामपुर में प्रखंड निर्माण के लिए जितनी भूमि की जरूरत है उतनी भूमि देने के लिए तैयार हैं।

इसको लेकर रविवार को संग्रामपुर सियाराम मन्दिर के प्रांगण में कई गांवों के सैकड़ों लोगों ने बैठक की। इसमें प्रखण्ड कार्यालय भवन निर्माण के लिए बाजार के अगल बगल ही भूमि उपलब्ध कराने पर सम्मति बनी और छह भूमिदाताओं ने लगभग छह एकड़ भूमि देने की घोषणा कर दी।

यदि यहां भूमि नहीं मिलेगी तब कहीं और स्थानांतरण की बात होगी
यदि यहां भूमि नहीं मिलेगी तब कहीं और स्थानांतरण की बात होगी। लेकिन जब यहां भूमि उपलब्ध है तो बरियरिया के जल जमाव चंवर में निर्जन स्थान पर प्रखण्ड भवन का निर्माण का प्रस्ताव कहीं से तर्क संगत नहीं है। मुखिया सुदिष्ट कुमार ने स्थानीय और वरीय अधिकारियों से अनुरोध किया कि पहले संग्रामपुर में भूमि अधिग्रहण के लिए भूमिदाताओं से मिल कर सहमति ली जाए फिर बात नहीं बनने पर अन्यत्र विचार हो। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हजारों लोग सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे और शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन शुरू हो जाएगा। प्रमुख पति बिनु तिवारी ने बताया कि तत्कालीन एसडीएम धीरेन्द्र मिश्रा के द्वारा पीएचसी के बगल में भूमि मापन कर रिपोर्ट जिले में भेजी गई थी।

प्रखंड के स्थानांतरण से हजारों लोगों का छिनेगा रोजगार
बैठक में उपस्थित नागेंद्र सिंह, पूर्व प्रमुख भोला मियां, अनिल शुक्ला, मत्स्यजीवी महामंत्री लालबाबू निषाद, पंससपति सन्त प्रसाद, अनुपम कुमार, अनवर अली सहित सभी लोगों ने एक स्वर में कहा कि विगत तीन दशक से एक प्रखंड कार्यालय के चलते हजारों गरीब और बेरोजगार छोटे छोटे धंधे और दुकान कर अपना गुजारा कर रहे हैं। जिले का सबसे पुराना बाजार संग्रामपुर बाजार इसी कार्यालय के कारण गुलजार रहता है। जिससे लगभग पन्द्रह लाख सलाना राजस्व जाता है। इसी तरह इसके अगल बगल के गांवों के लोगों की जीविका भी कमोबेस इस कार्यालय के कारण जुड़ी है। जिस दिन यह स्थानांतरित होकर दूर चला गया उसी दिन यहां के सारे रोजगार धंधे चौपट हो जाएंगे।

भूमिदाताओं ने कहा- जरूरत पड़ी तो मुफ्त में देंगे भूमि
प्रखण्ड भवन के निर्माण को लेकर भूमिदाता अरुण प्रसाद,गोल्डन प्रसाद,अशोक प्रसाद,अवधेश प्रसाद,पुटु प्रसाद,पपू प्रसाद और अनिल पांडेय ने अपनी अपनी भूमि जो एक ही जगह पर है देने की बात कही।कहा कि भवन निर्माण के लिए आवश्यकता पड़ी तो निःशुल्क भूमि दिया जाएगा। सक्रिय समाजसेवी शंम्भु प्रसाद ने दूरभाष से कहा कि एक साजिश के तहत प्रखण्ड को यहां से गुपचुप तरीके से हटाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। इस मामले को लेकर सभी ग्रामीण कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

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