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विरोध:स्कूल के बच्चों को ग्रीष्मावकाश अवधि का मध्याह्न भोजन का खाद्यान बांटने के आदेश का विरोध किया

मोतिहारीएक महीने पहले
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  • डीईओ व डीपीओ माध्याह्न भोजन योजना से मिला बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमंडल

सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सरकारी स्कूल के बच्चों को विद्यालय बंदी व ग्रीष्मावकाश अवधि का मध्याह्न भोजन का खाद्यान व खाद्य सुरक्षा भत्ता देने का फैसला किया है। इसको लेकर मध्याह्न भोजन योजना के निदेशक ने पत्र जारी किया है। खाद्यान वितरण की घोषणा के साथ ही शिक्षकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ का प्रतिनिधिमंडल जिला शिक्षा पदाधिकारी अवधेश कुमार सिंह व डीपीओ माध्याह्न भोजन योजना जावेद आलम से मिला।

संघ से जुड़े शिक्षकों ने डीईओ को आवेदन देकर सरकार के इस निर्णय का विरोध जताया। साथ ही लॉकडाउन को देखते हुए बच्चों के बीच खाद्यान का वितरण डीलर के माध्यम से तथा राशि का वितरण डीबीटी के माध्यम से कराने की मांग की। सोशल डिस्टेंसिंग के पालन का हवाला देते हुए शिक्षकों को इस कार्य से अलग रखने का आग्रह किया है। सरकारी निर्देश के मुताबिक विद्यालय बंदी व ग्रीष्मावकाश अवधि ( चार मई, 20 से 31 जुलाई, 20) तक सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के लाभुक बच्चों को मध्याह्न भोजन व खाद्य सुरक्षा भत्ता दिया जाना है।

वर्तमान में कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए सभी विद्यालय बच्चों के लिए बंद हैं। ऐसी परिस्थिति में बच्चों को राष्ट्रीय फुड सिक्यूरिटी एक्ट के तहत 80 दिनों का खाद्यान व खाद्य सुरक्षा भत्ता देने का निर्देश दिया गया है। इसको लेकर अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग ने सभी डीपीओ को पत्र जारी कर निर्देश के अनुपालन का निर्देश दिया है। इसके लिए खाद्यान का आवंटन भी कर दिया गया है। पूर्वी चंपारण के बच्चों के लिए कक्षा एक से पांच के लिए 3495.52 मैट्रिक टन व कक्षा छह से आठ तक के बच्चों के लिए 2824.38 मैट्रिक टन खाद्यान का वितरण किया जाएगा।

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